किसानों की समस्याओं पर भाकियू (टिकैत) का सख्त रुख, प्रशासन को सात दिन का समय
बहराइच | 06 जुलाई 2026 किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर भारतीय किसान यूनियन…

अमृतपाल बहराइच
रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़
बहराइच | 06 जुलाई 2026
किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने प्रशासन के खिलाफ अपना रुख और कड़ा कर दिया है। सोमवार को संगठन के पदाधिकारियों और किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल तहसील मुख्यालय पहुँचा, जहाँ उन्होंने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) मोतीपुर को ज्ञापन सौंपकर किसानों की लंबे समय से लंबित समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।
किसानों ने उठाए ये अहम मुद्दे
ज्ञापन में किसानों ने कई महत्वपूर्ण समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। प्रमुख मांगों में मक्का फसल के सत्यापन और फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया में आ रही तकनीकी बाधाओं को दूर करना शामिल है। साथ ही खतौनी में दर्ज त्रुटियों को समयबद्ध तरीके से ठीक करने और राजस्व विभाग में कथित अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई की मांग भी की गई।
धान की रोपाई के मौसम को देखते हुए किसानों ने पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा लो-वोल्टेज की समस्या समाप्त करने की आवश्यकता बताई। इसके अलावा यूरिया और डीएपी जैसी आवश्यक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता, कालाबाजारी पर रोक और क्षेत्र में हो रहे अवैध बालू एवं मिट्टी खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग रखी गई।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम
भाकियू (टिकैत) के प्रदेश उपाध्यक्ष गुरुवंत सिंह चीमा ने कहा कि यदि प्रशासन एक सप्ताह के भीतर किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाता, तो संगठन तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश सचिव गुरप्रताप सिंह, महासचिव मलकित सिंह, उपाध्यक्ष गुरवंत सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। किसानों का कहना था कि लंबे समय से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है, जिससे उनमें असंतोष बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि अब वे अपनी मांगों को लेकर शांत नहीं बैठेंगे और आवश्यकता पड़ने पर व्यापक आंदोलन करेंगे।
निष्कर्ष
बहराइच में किसानों द्वारा उठाए गए ये मुद्दे केवल स्थानीय स्तर की परेशानियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि व्यवस्था से जुड़ी उन चुनौतियों को भी सामने लाते हैं जिनका असर सीधे किसानों की आजीविका पर पड़ता है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह तय समय के भीतर किसानों की मांगों पर कितना प्रभावी निर्णय लेता है।
