जून 29, 2026

पहली ही बारिश में बहा सिंगाही–नौरंगाबाद मार्ग, विकास कार्यों की गुणवत्ता पर उठे सवाल

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सिंगाही (लखीमपुर खीरी):
मानसून की पहली तेज बारिश ने जहां लोगों को भीषण गर्मी से राहत पहुंचाई, वहीं क्षेत्र में हुए विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति भी सामने ला दी। सिंगाही से नौरंगाबाद को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग पहली ही मूसलाधार बारिश का दबाव नहीं झेल सका और सड़क का एक बड़ा हिस्सा तेज पानी के बहाव में क्षतिग्रस्त हो गया। सड़क कट जाने से आवागमन बाधित हो गया है और स्थानीय लोगों के सामने रोजमर्रा की आवाजाही एक बड़ी चुनौती बन गई है।

सड़क का कटाव बना दुर्घटना का कारण

सड़क के बीचों-बीच हुए गहरे कटाव ने पूरे मार्ग को बेहद खतरनाक बना दिया है। यह सड़क आसपास के कई गांवों को सिंगाही बाजार और अन्य प्रमुख स्थानों से जोड़ती है। प्रतिदिन इस मार्ग से छात्र-छात्राएं, किसान, व्यापारी और नौकरीपेशा लोग गुजरते हैं। सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

रात के समय या बारिश के दौरान कटाव स्पष्ट दिखाई न देने के कारण दुर्घटना की आशंका और अधिक बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते उचित सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

ग्रामीणों में बढ़ी चिंता

सड़क टूटने के बाद क्षेत्र के लोगों में चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का निर्माण कुछ समय पहले ही कराया गया था, लेकिन पहली ही बारिश में उसका इस तरह क्षतिग्रस्त हो जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार यदि आने वाले दिनों में लगातार बारिश होती रही तो सड़क का शेष हिस्सा भी बह सकता है, जिससे कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह टूटने की आशंका है। इसका सबसे अधिक प्रभाव विद्यार्थियों, मरीजों और किसानों पर पड़ेगा।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क टूटने के बाद भी संबंधित विभाग की ओर से अभी तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। न तो क्षतिग्रस्त स्थान पर बैरिकेडिंग की गई है और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। ऐसे में लोग अपनी जान जोखिम में डालकर उसी रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को तत्काल मौके का निरीक्षण कर अस्थायी सुरक्षा व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि किसी दुर्घटना को रोका जा सके। साथ ही सड़क की स्थायी मरम्मत का कार्य भी जल्द शुरू किया जाना चाहिए।

आवागमन और जनजीवन पर असर

सड़क क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीण क्षेत्रों का आवागमन प्रभावित हुआ है। किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में कठिनाई हो रही है, जबकि स्कूली बच्चों और दैनिक यात्रियों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं के संचालन में भी दिक्कत आने की आशंका जताई जा रही है।

गुणवत्ता पर उठे सवाल

पहली ही बारिश में सड़क का बह जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क निर्माण के दौरान जल निकासी, मिट्टी की मजबूती और पुलिया जैसी संरचनाओं का पर्याप्त ध्यान रखा जाना आवश्यक होता है। यदि इन पहलुओं की अनदेखी की जाती है तो मानसून के दौरान ऐसी समस्याएं सामने आती हैं।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि—

  • क्षतिग्रस्त सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
  • दुर्घटनाओं से बचाव के लिए बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत लगाए जाएं।
  • निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मजबूत जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए।

निष्कर्ष

सिंगाही–नौरंगाबाद मार्ग का पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त होना केवल एक सड़क का टूटना नहीं, बल्कि ग्रामीण आधारभूत ढांचे की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े करता है। समय रहते मरम्मत और सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो यह समस्या आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकती है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन शीघ्र कार्रवाई करते हुए सड़क को सुरक्षित और सुचारु रूप से चालू कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

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