जून 28, 2026

भारत–यूके व्यापार संबंधों में नया मोड़: लंदन में “इंडिया–यूके: पार्टनर्स इन प्रोग्रेस” सत्र की प्रमुख झलक

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लंदन में आयोजित “इंडिया–यूके: पार्टनर्स इन प्रोग्रेस” कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक साझेदारी को नई गति देने का आह्वान किया। उन्होंने भारतीय और ब्रिटिश कंपनियों से आग्रह किया कि वे आपसी सहयोग को और मजबूत करते हुए प्रस्तावित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के अवसरों को वास्तविक व्यावसायिक सफलता में बदलें।

इस मौके पर चार महत्वपूर्ण नॉलेज रिपोर्ट्स भी जारी की गईं, जिनका उद्देश्य दोनों देशों के व्यापारिक अवसरों, निवेश संभावनाओं और औद्योगिक सहयोग को बेहतर ढंग से समझना और आगे बढ़ाना है।


भारत–यूके आर्थिक साझेदारी का विस्तार

पीयूष गोयल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक संबंध अब एक नए और अधिक मजबूत चरण में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि CETA केवल एक औपचारिक समझौता नहीं है, बल्कि यह भविष्य में आर्थिक सहयोग की दिशा तय करने वाला एक परिवर्तनकारी ढांचा साबित होगा।

इस समझौते के माध्यम से दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने, तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहित करने, नवाचार को गति देने और सप्लाई चेन को अधिक मजबूत व लचीला बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।


जारी की गई नॉलेज रिपोर्ट्स की भूमिका

कार्यक्रम में FICCI, CII, UKIBC-HSBC और CareEdge द्वारा तैयार चार अलग-अलग विश्लेषणात्मक रिपोर्ट्स जारी की गईं। इन रिपोर्ट्स में विभिन्न क्षेत्रों में व्यापार विस्तार की संभावनाओं, उद्योगों की वर्तमान स्थिति और आर्थिक रेटिंग से जुड़े पहलुओं का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

इन रिपोर्ट्स का उद्देश्य कंपनियों को यह समझाना है कि वे आने वाले समय में CETA के तहत मिलने वाले अवसरों का अधिकतम लाभ कैसे उठा सकती हैं।


प्रमुख सुझाव और चर्चाएँ

इस सत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई, जिनमें निम्न बिंदु प्रमुख रहे—

  • MSME सेक्टर पर फोकस: छोटे और मध्यम उद्योगों को समझौते के लाभों के बारे में अधिक जागरूक बनाने पर जोर दिया गया।
  • प्रक्रियाओं में सरलता: व्यापार से जुड़े नियमों और प्रमाणन प्रक्रियाओं को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता बताई गई।
  • कुशल कार्यबल की आवाजाही: भारत और ब्रिटेन के बीच विशेषज्ञों और पेशेवरों की आवाजाही को सुगम बनाने का सुझाव दिया गया।
  • क्षेत्रीय सहयोग का विस्तार: स्वास्थ्य, उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान एवं तकनीक, सेवाएँ और उपभोक्ता वस्तुओं जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करने पर चर्चा हुई।

भारत–यूके संबंधों का बढ़ता महत्व

भारत और ब्रिटेन के बीच यह साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह अब रणनीतिक और तकनीकी सहयोग की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।

  • आर्थिक मजबूती: यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा जोड़ सकता है।
  • रणनीतिक सहयोग: पारंपरिक व्यापार के साथ-साथ रक्षा, तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग का दायरा बढ़ रहा है।
  • भविष्य की संभावनाएँ: जुलाई 2026 से लागू होने वाले CETA और DCC समझौतों को दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

निष्कर्ष

भारत–यूके CETA केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी की मजबूत नींव रखता है। पीयूष गोयल का संदेश स्पष्ट रहा कि भारतीय उद्योगों को इसे केवल एक कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि एक ठोस व्यापारिक रणनीति के रूप में अपनाना चाहिए।

इस पहल से न केवल द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि होगी, बल्कि नवाचार, निवेश और वैश्विक सहयोग के नए अवसर भी विकसित होंगे।

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