जून 28, 2026

रूस के भीतर यूक्रेन का बड़ा प्रहार: संविधान दिवस पर दो तेल रिफाइनरियों पर हमले का दावा, युद्ध ने लिया नया और खतरनाक मोड़!

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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने दावा किया है कि यूक्रेन ने अपने संविधान दिवस के अवसर पर रूस के भीतर स्थित दो महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरियों को लंबी दूरी के हमलों से निशाना बनाया। ज़ेलेंस्की के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य रूस की युद्ध क्षमता को कमजोर करना और उसकी सैन्य मशीन को ईंधन आपूर्ति से होने वाले लाभ को कम करना है।

ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि रूस के क्रास्नोडार क्षेत्र स्थित स्लावयांस्क तेल रिफाइनरी, जो अग्रिम मोर्चे से लगभग 300 किलोमीटर दूर है, सफलतापूर्वक निशाना बनाई गई। इसके अलावा रूस के यारोस्लाव क्षेत्र में स्थित एक अन्य तेल रिफाइनरी पर भी हमला किया गया, जो यूक्रेन की सीमा से लगभग 700 किलोमीटर दूर बताई गई है। उन्होंने इसे यूक्रेन की लंबी दूरी की सैन्य क्षमता का महत्वपूर्ण प्रदर्शन बताया।

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे अभियान रूस की युद्ध छेड़ने की क्षमता को कमजोर करते हैं। उनके अनुसार, हर सफल हमला रूस के संसाधनों को सीमित करता है और शांति की दिशा में एक और कदम साबित हो सकता है। उन्होंने यूक्रेनी सैनिकों और देश का समर्थन करने वाले सभी लोगों का आभार भी व्यक्त किया।

हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। रूस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है। युद्ध के दौरान दोनों पक्ष अक्सर एक-दूसरे पर हमलों के दावे करते हैं, जिनकी तत्काल पुष्टि संभव नहीं होती।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस के ऊर्जा ढांचे पर ऐसे हमले लगातार जारी रहते हैं, तो इसका असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति, अर्थव्यवस्था और वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका है।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष अब केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रहा है। दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे के रणनीतिक ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने से युद्ध का दायरा लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे हालात में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी गहराती जा रही है, क्योंकि इस संघर्ष का प्रभाव पूरी दुनिया की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

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