टीबी की बीमारी और इलाज: कारण, लक्षण, जांच, बचाव और उपचार की पूरी जानकारी

0

टीबी यानी ट्यूबरकुलोसिस (Tuberculosis) एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। यह बीमारी सबसे अधिक फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन शरीर के दूसरे अंगों में भी टीबी हो सकती है। समय पर पहचान और सही उपचार मिलने पर टीबी का इलाज संभव है। हालांकि, इलाज को बीच में छोड़ना या दवाओं को अनियमित तरीके से लेना बीमारी को गंभीर बना सकता है।

भारत समेत दुनिया के कई देशों में टीबी सार्वजनिक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण चुनौती रही है। इसलिए बीमारी के लक्षणों को समझना, समय पर जांच कराना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार पूरा उपचार लेना बेहद जरूरी है।

टीबी क्या है?

टीबी एक जीवाणु संक्रमण है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बोलने के दौरान हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों के माध्यम से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। हालांकि, केवल संक्रमण होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति को सक्रिय टीबी हो ही जाएगी। कुछ लोगों में बैक्टीरिया शरीर में मौजूद रहते हैं लेकिन बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं देते। इसे सामान्यतः निष्क्रिय या सुप्त टीबी संक्रमण कहा जाता है।

जब बैक्टीरिया सक्रिय होकर बीमारी पैदा करते हैं, तब इसे सक्रिय टीबी कहा जाता है। फेफड़ों की सक्रिय टीबी होने पर संक्रमण दूसरों तक फैलने की संभावना रहती है।

टीबी के प्रमुख लक्षण

फेफड़ों की टीबी में लक्षण धीरे-धीरे विकसित हो सकते हैं। प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं—

  • लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी
  • खांसी के साथ बलगम आना
  • कभी-कभी बलगम में खून दिखाई देना
  • सीने में दर्द या असहजता
  • बुखार या शरीर का तापमान बढ़ना
  • रात में अधिक पसीना आना
  • भूख कम लगना
  • कमजोरी और लगातार थकान
  • बिना स्पष्ट कारण वजन कम होना

शरीर के दूसरे हिस्सों में टीबी होने पर लक्षण प्रभावित अंग के अनुसार अलग हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, लिम्फ नोड, हड्डी, पेट या मस्तिष्क से संबंधित टीबी में अलग-अलग प्रकार की समस्याएं सामने आ सकती हैं।

लंबे समय से खांसी, बुखार या अन्य संदिग्ध लक्षण बने रहने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

टीबी कैसे फैलती है?

फेफड़ों की सक्रिय टीबी वाले व्यक्ति के खांसने, छींकने, बोलने या गाने के दौरान बैक्टीरिया युक्त सूक्ष्म कण हवा में फैल सकते हैं। बंद और कम हवादार स्थानों में लंबे समय तक निकट संपर्क रहने पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

टीबी आमतौर पर हाथ मिलाने, साथ बैठने या सामान्य वस्तुओं को छूने मात्र से नहीं फैलती। इसलिए टीबी से पीड़ित व्यक्ति के प्रति भेदभाव करने के बजाय उसे उचित चिकित्सा और सामाजिक सहयोग देना चाहिए।

टीबी की जांच कैसे होती है?

टीबी की जांच व्यक्ति के लक्षण, बीमारी के संभावित स्थान और चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर की जाती है। फेफड़ों की टीबी की स्थिति में डॉक्टर बलगम की जांच, आणविक परीक्षण, छाती का एक्स-रे तथा अन्य आवश्यक परीक्षण कराने की सलाह दे सकते हैं।

कुछ मामलों में मॉलिक्यूलर टेस्ट से टीबी के बैक्टीरिया की पहचान करने के साथ-साथ कुछ दवाओं के प्रति संभावित प्रतिरोध की जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है।

यदि टीबी फेफड़ों के अलावा किसी अन्य अंग में होने की आशंका हो तो डॉक्टर संबंधित अंग के अनुसार अलग जांच करा सकते हैं।

टीबी का इलाज कैसे होता है?

टीबी का उपचार कई एंटी-टीबी दवाओं के संयोजन से किया जाता है। दवाओं का चुनाव टीबी के प्रकार, मरीज की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, जांच रिपोर्ट और दवा प्रतिरोध जैसे कारकों के आधार पर चिकित्सक करते हैं।

टीबी के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण बात है कि दवाएं डॉक्टर द्वारा बताए गए तरीके और अवधि तक नियमित रूप से ली जाएं। मरीज को अपनी स्थिति बेहतर लगने पर भी उपचार स्वयं बंद नहीं करना चाहिए।

इलाज के दौरान डॉक्टर समय-समय पर जांच और स्वास्थ्य की निगरानी कर सकते हैं। यदि किसी मरीज में दवा-प्रतिरोधी टीबी पाई जाती है तो उसके लिए सामान्य टीबी से अलग उपचार योजना की आवश्यकता हो सकती है।

दवा बीच में छोड़ना क्यों खतरनाक है?

टीबी की दवाएं नियमित रूप से लेना उपचार की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। यदि मरीज दवाएं बार-बार छोड़ता है या बिना चिकित्सकीय सलाह के उपचार बंद कर देता है, तो बीमारी दोबारा सक्रिय हो सकती है और कुछ मामलों में दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है।

दवा-प्रतिरोधी टीबी का उपचार अधिक जटिल हो सकता है। इसलिए मरीज को निर्धारित उपचार पूरा करने के लिए परिवार और स्वास्थ्यकर्मियों का सहयोग लेना चाहिए।

टीबी से बचाव के उपाय

टीबी के संक्रमण को रोकने के लिए कई सावधानियां अपनाई जा सकती हैं। यदि किसी व्यक्ति में फेफड़ों की सक्रिय टीबी की पुष्टि होती है तो चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार शुरू करना संक्रमण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बचाव के लिए—

  1. लंबे समय से खांसी या अन्य संदिग्ध लक्षण होने पर जांच कराएं।
  2. घर और कार्यस्थल में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें।
  3. डॉक्टर की सलाह के अनुसार टीबी की दवाएं नियमित लें।
  4. टीबी के मरीज के साथ रहने वाले लोगों को आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
  5. बच्चों के टीकाकरण में BCG वैक्सीन की भूमिका महत्वपूर्ण है; इसके बारे में स्थानीय टीकाकरण कार्यक्रम और चिकित्सक की सलाह का पालन करें।
  6. पौष्टिक भोजन, पर्याप्त आराम और सामान्य स्वास्थ्य की देखभाल पर ध्यान दें।

टीबी के मरीज के लिए भोजन और जीवनशैली

टीबी के उपचार के दौरान शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। मरीज को अपनी क्षमता और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार संतुलित आहार लेना चाहिए। भोजन में दालें, अनाज, सब्जियां, फल, दूध या उपयुक्त विकल्प तथा प्रोटीन के अन्य स्रोत शामिल किए जा सकते हैं।

पर्याप्त नींद और आराम भी महत्वपूर्ण हैं। धूम्रपान और तंबाकू से दूरी रखना फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से जरूरी है। किसी भी सप्लीमेंट या घरेलू उपचार को दवाओं का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

टीबी को लेकर भ्रांतियां और सामाजिक भेदभाव

टीबी को लेकर समाज में कई गलत धारणाएं मौजूद हैं। कुछ लोग टीबी को लाइलाज बीमारी समझते हैं, जबकि उचित निदान और निर्धारित उपचार से इसे ठीक किया जा सकता है। इसी तरह टीबी से पीड़ित व्यक्ति से सामाजिक दूरी या भेदभाव करना समस्या को बढ़ा सकता है।

जरूरी है कि मरीज को बीमारी छिपाने के लिए मजबूर करने के बजाय समय पर जांच और उपचार के लिए प्रोत्साहित किया जाए। परिवार का भावनात्मक सहयोग उपचार के दौरान मरीज के लिए उपयोगी हो सकता है।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

यदि खांसी लंबे समय तक बनी रहती है, लगातार बुखार रहता है, रात में अधिक पसीना आता है, शरीर में असामान्य कमजोरी महसूस होती है या बिना कारण वजन कम हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है। खांसी के साथ खून आने, सांस लेने में गंभीर परेशानी या तेज सीने के दर्द जैसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

निष्कर्ष

टीबी गंभीर संक्रामक बीमारी जरूर है, लेकिन समय पर जांच, सही दवाओं और पूरा उपचार मिलने पर इसका इलाज संभव है। बीमारी की पहचान में देरी और दवाओं को बीच में छोड़ना उपचार को कठिन बना सकता है। इसलिए लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

टीबी से जुड़े किसी भी लक्षण या जांच रिपोर्ट के बारे में व्यक्तिगत सलाह के लिए योग्य डॉक्टर या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। किसी अन्य व्यक्ति की दवा या इंटरनेट पर मिली जानकारी के आधार पर टीबी की दवा शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें