जुलाई 9, 2026

दिल्ली हाईकोर्ट में मसासामोंग एओ की जमानत याचिका पर सुनवाई, ईडी से मांगा जवाब

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नई दिल्ली, 9 जुलाई 2026: दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित नागा उग्रवादी मसासामोंग एओ की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी किया है। अदालत ने मामले में एजेंसी से विस्तृत स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही तिहाड़ जेल प्रशासन से आरोपी का नाममात्र रोल (Nominal Roll) भी मांगा गया है, ताकि उसकी हिरासत और जेल में बिताए गए समय का रिकॉर्ड अदालत के सामने रखा जा सके।

लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं एओ

मसासामोंग एओ को वर्ष 2022 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले मार्च 2026 में ट्रायल कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने राहत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति प्रतीक जलान की पीठ ने ईडी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई तक आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा।

बचाव पक्ष ने रखे ये प्रमुख तर्क

एओ की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनका मुवक्किल करीब साढ़े तीन वर्ष से जेल में बंद है। उनका कहना था कि यह अवधि कथित मनी लॉन्ड्रिंग अपराधों के लिए निर्धारित अधिकतम संभावित सजा के लगभग आधे के बराबर है।

बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि इसी मामले में एक अन्य आरोपी के खिलाफ बिना गिरफ्तारी के ही आरोपपत्र दाखिल किया गया था। ऐसे में एओ को लगातार हिरासत में रखना उचित नहीं माना जाना चाहिए।

पारिवारिक परिस्थितियों का भी दिया गया हवाला

जमानत याचिका में एओ की व्यक्तिगत और पारिवारिक परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया। अदालत को बताया गया कि उनकी आयु 49 वर्ष है, जबकि उनके माता-पिता लगभग 90 वर्ष के हैं और नागालैंड के एक छोटे से गांव में रहते हैं। उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से वे दिल्ली आकर अपने बेटे से मुलाकात नहीं कर पा रहे हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को यह भरोसा भी दिलाया गया कि यदि जमानत दी जाती है तो वह अदालत द्वारा निर्धारित हर शर्त का पूरी तरह पालन करेंगे और जांच या न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।

मामले की पृष्ठभूमि

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत दिसंबर 2019 में हुई थी, जब अलेमला जामिर के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। बाद में इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई।

जांच के दौरान मसासामोंग एओ को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 2021 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इसी मामले से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन की जांच के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अलग मामला दर्ज किया।

मामले का महत्व

यह मामला केवल मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया में लंबी अवधि की हिरासत, जमानत के अधिकार, और मानवीय परिस्थितियों जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को भी सामने लाता है।

अब सभी की नजर दिल्ली हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर रहेगी, जहां ईडी की स्थिति रिपोर्ट और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर अदालत यह तय करेगी कि मसासामोंग एओ को जमानत दी जाए या नहीं। यह फैसला ऐसे मामलों में न्यायिक संतुलन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जांच एजेंसियों की दलीलों के बीच महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।

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