दिल्ली-एनसीआर से आवारा कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विवाद

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नई दिल्ली, 12 अगस्त 2025 — सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश ने पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं के बीच तीखी बहस छेड़ दी है। इस आदेश के तहत दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाज़ियाबाद की सभी कॉलोनियों से आवारा कुत्तों को पकड़कर डॉग शेल्टर में भेजा जाएगा।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस फैसले को “मानवीय और विज्ञान-आधारित नीति से पीछे हटने वाला कदम” बताया। उन्होंने कहा, “ये मूक प्राणी समस्या नहीं हैं जिन्हें मिटा दिया जाए। आश्रय, नसबंदी, टीकाकरण और सामुदायिक देखभाल से हम बिना क्रूरता के सड़कों को सुरक्षित रख सकते हैं।”

राहुल गांधी ने चेताया कि बिना सोचे-समझे बड़े पैमाने पर हटाना न केवल निर्दयी है, बल्कि इससे हमारी संवेदनशीलता भी खत्म होती है। उनके अनुसार, जनसुरक्षा और पशु कल्याण दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।

इस आदेश के खिलाफ कई पशु अधिकार संगठनों ने सोमवार को दिल्ली के इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया, जिसमें कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया। एक कुत्ता देखभालकर्ता ने आरोप लगाया, “हम सिर्फ पशुओं को खाना खिलाने का काम करते हैं, लेकिन हमें जेल में डाला जा रहा है।”

पेटा इंडिया एडवोकेसी एसोसिएट, शौर्य अग्रवाल ने इस आदेश को “अव्यवहारिक और अवैज्ञानिक” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह न केवल अराजकता पैदा करेगा बल्कि पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियमों के तहत अवैध भी है। अग्रवाल के अनुसार, दिल्ली में लगभग 10 लाख आवारा कुत्ते हैं, जिनमें से केवल आधे की ही नसबंदी हुई है। सभी को शेल्टर में रखना लगभग असंभव है और इससे स्थिति और बिगड़ेगी।

पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि स्थायी समाधान केवल नसबंदी और टीकाकरण जैसे मानवीय तरीकों से ही संभव है, न कि बड़े पैमाने पर कुत्तों को हटाकर। वहीं, सरकार और अदालत का रुख फिलहाल इस दिशा में अलग नजर आता है।


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दिल्ली-एनसीआर से आवारा कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विवाद

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अगस्त 12, 2025

नई दिल्ली, 12 अगस्त 2025 — सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश ने पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं के बीच तीखी बहस छेड़ दी है। इस आदेश के तहत दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाज़ियाबाद की सभी कॉलोनियों से आवारा कुत्तों को पकड़कर डॉग शेल्टर में भेजा जाएगा।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस फैसले को “मानवीय और विज्ञान-आधारित नीति से पीछे हटने वाला कदम” बताया। उन्होंने कहा, “ये मूक प्राणी समस्या नहीं हैं जिन्हें मिटा दिया जाए। आश्रय, नसबंदी, टीकाकरण और सामुदायिक देखभाल से हम बिना क्रूरता के सड़कों को सुरक्षित रख सकते हैं।”

राहुल गांधी ने चेताया कि बिना सोचे-समझे बड़े पैमाने पर हटाना न केवल निर्दयी है, बल्कि इससे हमारी संवेदनशीलता भी खत्म होती है। उनके अनुसार, जनसुरक्षा और पशु कल्याण दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।

इस आदेश के खिलाफ कई पशु अधिकार संगठनों ने सोमवार को दिल्ली के इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया, जिसमें कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया। एक कुत्ता देखभालकर्ता ने आरोप लगाया, “हम सिर्फ पशुओं को खाना खिलाने का काम करते हैं, लेकिन हमें जेल में डाला जा रहा है।”

पेटा इंडिया एडवोकेसी एसोसिएट, शौर्य अग्रवाल ने इस आदेश को “अव्यवहारिक और अवैज्ञानिक” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह न केवल अराजकता पैदा करेगा बल्कि पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियमों के तहत अवैध भी है। अग्रवाल के अनुसार, दिल्ली में लगभग 10 लाख आवारा कुत्ते हैं, जिनमें से केवल आधे की ही नसबंदी हुई है। सभी को शेल्टर में रखना लगभग असंभव है और इससे स्थिति और बिगड़ेगी।

पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि स्थायी समाधान केवल नसबंदी और टीकाकरण जैसे मानवीय तरीकों से ही संभव है, न कि बड़े पैमाने पर कुत्तों को हटाकर। वहीं, सरकार और अदालत का रुख फिलहाल इस दिशा में अलग नजर आता है।