नेपाल में फिर बाढ़ का खतरा, भोटेकोशी नदी का जलप्रवाह बढ़ने से प्रशासन अलर्ट

0

काठमांडू: नेपाल अभी कुछ दिन पहले आई विनाशकारी बाढ़ से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया है कि भोटेकोशी नदी में एक बार फिर जलप्रवाह बढ़ने से नई बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। प्रभावित इलाकों में पहले से ही राहत, बचाव और लापता लोगों की तलाश का अभियान जारी है। ऐसे समय में नदी के बढ़ते प्रवाह ने प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने भोटेकोशी नदी के रासुवा क्षेत्र में बाढ़ के प्रवाह में दोबारा वृद्धि की सूचना मिलने के बाद लोगों को सतर्क रहने की अपील की है। प्राधिकरण ने विशेष रूप से रासुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन सहित प्रभावित तथा नदी के किनारे बसे क्षेत्रों में काम कर रहे राहत और बचाव दलों को अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा है।

पहले की तबाही के बाद नई चुनौती

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जनजीवन प्रभावित किया था। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद अचानक पानी, मलबे और चट्टानों का तेज बहाव नदी तंत्र में पहुंचा, जिसने भोटेकोशी और उसके बाद त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचाई। कई गांव, सड़कें, पुल और अन्य महत्वपूर्ण ढांचे प्रभावित हुए।

इस आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि हजारों लोगों के लापता या संपर्क से बाहर होने की खबरें सामने आई हैं। 30 अगस्त तक विभिन्न रिपोर्टों में नेपाल और तिब्बत को मिलाकर मृतकों और लापता लोगों की संख्या में लगातार बदलाव दर्ज किया गया, क्योंकि दूरदराज के इलाकों से आंकड़े जुटाए जा रहे हैं।

ऐसे मुश्किल समय में नदी का जलप्रवाह फिर बढ़ना राहत अभियान के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। बचाव दल जहां पहले से प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की तलाश और सहायता पहुंचाने में जुटे हैं, वहीं नए जलप्रवाह की आशंका उन्हें अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर कर सकती है।

भोटेकोशी नदी में क्यों बढ़ा खतरा?

भोटेकोशी नदी हिमालयी क्षेत्र से निकलने वाली तेज प्रवाह वाली नदी है। हालिया आपदा के बाद इसके ऊपरी हिस्सों में मलबे और पानी के अस्थायी जमाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई थी। विशेषज्ञों और अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि यदि किसी स्थान पर जमा पानी अचानक बाहर निकलता है, तो इससे नीचे की ओर अचानक बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग ने भी भोटेकोशी क्षेत्र में खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होने की बात कही थी। अधिकारियों के अनुसार, ऊपरी क्षेत्र में नदी के मार्ग में बने अस्थायी अवरोधों के कारण पानी का दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में अवरोध टूटने पर पानी के साथ पत्थर, मिट्टी और मलबा नीचे की ओर तेजी से पहुंच सकता है।

यही कारण है कि प्रशासन नदी के जलस्तर और प्रवाह पर लगातार नजर रख रहा है। स्थानीय लोगों को नदी के बिल्कुल नजदीक जाने से बचने और आधिकारिक चेतावनियों को गंभीरता से लेने की सलाह दी गई है।

त्रिशूली नदी पर भी नजर

भोटेकोशी में बढ़ता पानी केवल रासुवा तक सीमित चिंता नहीं है। इसका प्रभाव नीचे की ओर त्रिशूली नदी पर भी पड़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार धादिंग में त्रिशूली नदी का जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर पहुंच गया था। इसके अलावा नारायणी नदी और उसकी कुछ सहायक नदियों में भी भारी बारिश के कारण जलस्तर बढ़ने की चेतावनी दी गई।

इसका मतलब है कि प्रशासन को केवल एक नदी पर ही नहीं, बल्कि पूरे नदी तंत्र पर नजर रखनी पड़ रही है। भोटेकोशी से आने वाला अतिरिक्त पानी जब त्रिशूली और आगे नारायणी नदी तंत्र में पहुंचता है, तो निचले इलाकों में भी जोखिम बढ़ सकता है।

राहत और बचाव कार्यों के सामने बड़ी मुश्किल

नेपाल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य पहले से जारी हैं। सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के जवान प्रभावित इलाकों में खोज अभियान चला रहे हैं। कई स्थानों पर मलबा हटाने, फंसे लोगों को निकालने और आवश्यक सामग्री पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

लेकिन दोबारा बाढ़ का खतरा इन अभियानों को प्रभावित कर सकता है। नदी किनारे काम कर रहे बचावकर्मियों के लिए अचानक पानी बढ़ना विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है। इसी वजह से NDRRMA ने राहत और बचाव दलों को भी अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने को कहा है।

प्रशासन की चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि जिन इलाकों में कुछ लोग अपने घरों और संपत्तियों को देखने के लिए वापस लौट रहे हैं, वहां अचानक नदी का प्रवाह बढ़ने पर उन्हें दोबारा सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों में बढ़ी चिंता

लगातार मिल रही बाढ़ चेतावनियों ने प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जिन परिवारों ने हालिया बाढ़ में अपने घर, सामान या आजीविका गंवाई है, उनके लिए दोबारा नदी का जलस्तर बढ़ना बेहद परेशान करने वाली स्थिति है।

कई स्थानों पर सड़क और पुलों को नुकसान पहुंचने के कारण आवाजाही पहले ही प्रभावित है। बिजली और संचार व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में अगर नई बाढ़ आती है तो राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित लोगों तक बचाव दलों को भेजने में और कठिनाई हो सकती है।

मौसम और हिमालयी जोखिम ने बढ़ाई चुनौती

नेपाल में अगस्त का समय मानसून का हिस्सा होता है। इस दौरान भारी बारिश के कारण पहाड़ी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर, बर्फ, चट्टानों और अस्थिर पहाड़ी ढलानों से जुड़े जोखिम भी मौजूद रहते हैं।

हालिया आपदा ने यह सवाल भी गंभीर बना दिया है कि हिमालयी क्षेत्र में अचानक आने वाली बाढ़ के लिए शुरुआती चेतावनी व्यवस्था को और मजबूत कैसे किया जाए। वैज्ञानिकों और अधिकारियों के सामने चुनौती यह है कि पहाड़ी क्षेत्रों में किसी संभावित खतरे की जानकारी समय रहते निचले इलाकों तक पहुंचाई जाए।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल और चीन के अधिकारियों के बीच आपदा जोखिम और ग्लेशियर से जुड़ी जानकारी साझा करने को लेकर पहले भी चर्चा हुई थी। हालिया आपदा ने सीमा पार शुरुआती चेतावनी और डेटा साझा करने की जरूरत को और महत्वपूर्ण बना दिया है।

चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत

भोटेकोशी की मौजूदा स्थिति नेपाल के लिए एक महत्वपूर्ण सबक भी है। पहाड़ी नदियों के आसपास रहने वाली आबादी के लिए आधुनिक जलस्तर निगरानी, बेहतर संचार नेटवर्क और तेज चेतावनी प्रणाली बेहद जरूरी है।

26 अगस्त की बाढ़ के दौरान नदी के जलस्तर की निगरानी करने वाले कुछ उपकरणों के काम करना बंद करने की जानकारी भी सामने आई थी। ऐसे क्षेत्रों में निगरानी तंत्र को अधिक मजबूत और आपदा-रोधी बनाने की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नदी का जलस्तर मापना पर्याप्त नहीं है। ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर, झीलों, भूस्खलन और नदी अवरोधों की निगरानी भी जरूरी है। यदि किसी संभावित खतरे की सूचना पहले मिल जाए तो नदी किनारे रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकता है।

सरकार के सामने दोहरी जिम्मेदारी

नेपाल सरकार के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक ओर उसे हालिया आपदा से प्रभावित लोगों को राहत और पुनर्वास उपलब्ध कराना है, वहीं दूसरी ओर संभावित नई बाढ़ से लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी है।

प्रशासन को नदी किनारे बसे क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए रखने, चेतावनी संदेश तेजी से प्रसारित करने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखनी होगी। राहत शिविरों और स्वास्थ्य सेवाओं को भी किसी नए संकट के लिए तैयार रखना महत्वपूर्ण होगा।

लोगों से सावधानी बरतने की अपील

अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों और राहत कार्यों में शामिल कर्मियों से अपील की है कि वे जलप्रवाह में होने वाले किसी भी बदलाव को गंभीरता से लें। भोटेकोशी और त्रिशूली जैसी नदियों के किनारे अनावश्यक रूप से जाने से बचने तथा प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने को कहा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात समय पर सुरक्षित स्थान पर पहुंचना है। नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि, तेज आवाज, मलबे का बहाव या पानी के रंग और गति में असामान्य बदलाव दिखाई देने पर स्थानीय प्रशासन की चेतावनी को प्राथमिकता देना जरूरी है।

निष्कर्ष

नेपाल में भोटेकोशी नदी का बढ़ता जलप्रवाह उस देश के लिए एक और गंभीर चेतावनी है, जो अभी हालिया विनाशकारी बाढ़ के सदमे से बाहर नहीं निकल पाया है। राहत और बचाव अभियान के बीच नई बाढ़ की आशंका ने प्रशासन के सामने चुनौती और बढ़ा दी है।

फिलहाल अधिकारियों की प्राथमिकता नदी के जलस्तर की निगरानी, संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता और बचावकर्मियों की सुरक्षा है। भोटेकोशी के साथ-साथ त्रिशूली और नारायणी नदी तंत्र पर भी नजर रखी जा रही है।

हाल की घटनाएं यह स्पष्ट करती हैं कि हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए केवल आपदा के बाद राहत पहुंचाना पर्याप्त नहीं है। मजबूत शुरुआती चेतावनी व्यवस्था, सीमा-पार सूचना साझाकरण, आधुनिक निगरानी तकनीक और स्थानीय स्तर पर बेहतर तैयारी भविष्य में जान-माल के नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

नेपाल के लिए इस समय सबसे जरूरी संदेश यही है कि खतरा पूरी तरह टलने तक सतर्कता में कोई कमी न आने दी जाए। नदी का बढ़ता पानी केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन हजारों लोगों के लिए चेतावनी है जो पहले ही एक बड़ी प्राकृतिक आपदा का सामना कर चुके हैं।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें