लखनऊ में ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (NSOs) के प्रमुखों की बैठक 2026: गुणवत्ता आधारित आँकड़ों से परिवर्तन की दिशा में भारत की पहल
भारत वर्ष 2026 में ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में…

भारत वर्ष 2026 में ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में 3 से 4 अगस्त 2026 के दौरान उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (National Statistical Offices – NSOs) के प्रमुखों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। यह बैठक केवल सांख्यिकीय आंकड़ों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय, पारदर्शी और गुणवत्ता आधारित डेटा प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान “Building BRICS for Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability” अर्थात “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए ब्रिक्स का निर्माण” को केंद्रीय विषय बनाया है। वहीं ब्रिक्स सांख्यिकी ट्रैक के अंतर्गत भारत ने “Quality Statistics as a Driver of Transformation” यानी “परिवर्तन के प्रेरक के रूप में गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकी” को अपना मुख्य विषय चुना है।
ब्रिक्स क्या है?
ब्रिक्स विश्व की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक बहुपक्षीय समूह है। प्रारंभ में इसमें केवल पाँच सदस्य देश थे—ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका। समय के साथ संगठन का विस्तार हुआ और अब इसमें निम्नलिखित 11 सदस्य देश शामिल हैं—
- ब्राज़ील
- रूस
- भारत
- चीन
- दक्षिण अफ्रीका
- मिस्र
- इथियोपिया
- इंडोनेशिया
- ईरान
- सऊदी अरब
- संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)
विश्व की बड़ी आबादी, विशाल बाजार और तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने वाला यह समूह वैश्विक आर्थिक और विकास संबंधी मुद्दों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
लखनऊ में बैठक का महत्व
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय किसी भी देश की आधिकारिक सांख्यिकीय प्रणाली की रीढ़ होते हैं। जनगणना, रोजगार, महंगाई, कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी, पर्यावरण और आर्थिक विकास जैसे क्षेत्रों से जुड़े विश्वसनीय आंकड़े तैयार करना इन्हीं संस्थाओं की जिम्मेदारी होती है।
लखनऊ में आयोजित होने वाली बैठक में विभिन्न सदस्य देशों के सांख्यिकी प्रमुख निम्नलिखित विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे—
- आधिकारिक सांख्यिकी की गुणवत्ता में सुधार
- डिजिटल डेटा संग्रहण प्रणाली
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आधुनिक तकनीक का उपयोग
- डेटा सुरक्षा और गोपनीयता
- सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के लिए सांख्यिकीय सहयोग
- अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप डेटा तैयार करना
- सदस्य देशों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान
यह बैठक भविष्य की साझा सांख्यिकीय रणनीतियों के निर्माण में भी सहायक होगी।
गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकी क्यों आवश्यक है?
आज के समय में डेटा को नई अर्थव्यवस्था का आधार माना जाता है। सरकारें, उद्योग, निवेशक, शोधकर्ता और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ सभी विश्वसनीय आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेते हैं।
यदि सांख्यिकीय आंकड़े सही, समय पर और पारदर्शी हों तो—
- नीतियाँ अधिक प्रभावी बनती हैं।
- सरकारी योजनाओं का बेहतर मूल्यांकन संभव होता है।
- निवेशकों का विश्वास बढ़ता है।
- आर्थिक विकास की वास्तविक तस्वीर सामने आती है।
- सामाजिक असमानताओं की पहचान आसान होती है।
- संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है।
इसी कारण भारत ने इस वर्ष “Quality Statistics as a Driver of Transformation” विषय को प्राथमिकता दी है।
भारत की सांख्यिकी प्रणाली में हो रहे बदलाव
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने आधिकारिक सांख्यिकी व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में अनेक कदम उठाए हैं। इनमें प्रमुख हैं—
- डिजिटल डेटा संग्रहण
- मोबाइल आधारित सर्वेक्षण
- ऑनलाइन सांख्यिकीय प्लेटफॉर्म
- भू-स्थानिक (Geospatial) तकनीक का उपयोग
- डेटा सत्यापन की आधुनिक प्रणाली
- प्रशासनिक आंकड़ों का बेहतर उपयोग
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण
इन प्रयासों का उद्देश्य आंकड़ों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
ब्रिक्स देशों के लिए सहयोग का अवसर
ब्रिक्स देशों की आर्थिक, सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियाँ अलग-अलग हैं, लेकिन सभी देशों के सामने कुछ समान चुनौतियाँ भी हैं—
- तेजी से शहरीकरण
- जलवायु परिवर्तन
- रोजगार सृजन
- स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
- डिजिटल परिवर्तन
- खाद्य सुरक्षा
- ऊर्जा संक्रमण
इन चुनौतियों से निपटने के लिए विश्वसनीय सांख्यिकीय आंकड़ों का साझा उपयोग और अनुभवों का आदान-प्रदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बैठक के माध्यम से सदस्य देश नई तकनीकों, बेहतर सर्वेक्षण पद्धतियों तथा डेटा गुणवत्ता सुधार के सफल मॉडलों को साझा करेंगे।
सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में सांख्यिकी की भूमिका
संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों की प्रगति का आकलन भी गुणवत्तापूर्ण आंकड़ों पर निर्भर करता है।
गरीबी उन्मूलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवाएँ, स्वच्छ जल और जलवायु कार्रवाई जैसे लक्ष्यों की वास्तविक स्थिति तभी ज्ञात हो सकती है जब संबंधित आंकड़े विश्वसनीय हों।
इसलिए ब्रिक्स देशों के बीच सांख्यिकीय सहयोग वैश्विक विकास एजेंडा को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
डिजिटल युग में सांख्यिकी की नई चुनौतियाँ
आज डेटा की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। सोशल मीडिया, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे नए स्रोत विशाल मात्रा में जानकारी उत्पन्न कर रहे हैं।
ऐसे में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों के सामने कई नई चुनौतियाँ हैं—
- बिग डेटा का प्रभावी उपयोग
- डेटा की गुणवत्ता बनाए रखना
- साइबर सुरक्षा
- व्यक्तिगत गोपनीयता की रक्षा
- फर्जी या भ्रामक आंकड़ों की पहचान
- विभिन्न स्रोतों से प्राप्त डेटा का समन्वय
बैठक में इन विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर
लखनऊ में इस अंतरराष्ट्रीय बैठक का आयोजन उत्तर प्रदेश के लिए भी विशेष महत्व रखता है। इससे राज्य को वैश्विक स्तर पर अपनी प्रशासनिक क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। साथ ही विभिन्न देशों के विशेषज्ञों के बीच संवाद से स्थानीय संस्थानों, विश्वविद्यालयों और नीति शोध से जुड़े संगठनों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की संभावना है।
वैश्विक नीति निर्माण में डेटा की बढ़ती भूमिका
विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य वैश्विक संस्थाएँ आर्थिक और सामाजिक नीतियों के निर्माण में आधिकारिक आंकड़ों पर भरोसा करती हैं। इसलिए सांख्यिकी केवल संख्याओं का संग्रह नहीं, बल्कि विकास की दिशा तय करने का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।
ब्रिक्स देशों द्वारा गुणवत्ता आधारित सांख्यिकी पर दिया जा रहा जोर इस बात का संकेत है कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में विश्वसनीय डेटा की भूमिका और अधिक बढ़ने वाली है।
भारत की अध्यक्षता से नई उम्मीदें
भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान सहयोग, नवाचार, समावेशी विकास और सतत प्रगति को प्राथमिकता दी है। सांख्यिकी ट्रैक के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण डेटा पर केंद्रित यह पहल सदस्य देशों के बीच विश्वास बढ़ाने, नीतिगत सहयोग को मजबूत करने और साझा विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
यदि इस बैठक से डेटा संग्रह, विश्लेषण और साझाकरण के क्षेत्र में ठोस सहयोग विकसित होता है, तो इससे न केवल ब्रिक्स देशों बल्कि वैश्विक विकास प्रक्रिया को भी दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।
निष्कर्ष
लखनऊ में आयोजित होने वाली ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों के प्रमुखों की बैठक केवल एक औपचारिक सम्मेलन नहीं है, बल्कि डेटा आधारित सुशासन, वैज्ञानिक नीति निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। भारत द्वारा “Quality Statistics as a Driver of Transformation” विषय को अपनाना यह दर्शाता है कि भविष्य के विकास मॉडल में विश्वसनीय, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण आंकड़ों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। यह बैठक ब्रिक्स देशों के बीच ज्ञान, तकनीक और अनुभव साझा करने के साथ-साथ एक अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और सतत वैश्विक विकास व्यवस्था की दिशा में सार्थक कदम साबित हो सकती है।