लीपज़िग हवाईअड्डे पर कथित रूसी हाइब्रिड हमले के बाद जर्मनी के साथ खड़ा हुआ EU, वॉन डेर लेयेन ने कहा- स्पष्ट जवाब जरूरी
यूरोप में रूस और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच जर्मनी के लीपज़िग हवाईअड्डे से जुड़ी घटना ने सुरक्षा और कूटनीति के स्तर पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। जर्मन सरकार ने अगस्त में हुए ड्रोन हमले के प्रयास के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है। इसके बाद यूरोपीय संघ ने जर्मनी के प्रति पूर्ण एकजुटता व्यक्त की है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ से बातचीत कर स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ ऐसे कथित हाइब्रिड हमलों के खिलाफ एकजुट रहेगा।

मर्ज़ से वॉन डेर लेयेन की बातचीत
वॉन डेर लेयेन ने बताया कि उन्होंने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ से लीपज़िग हवाईअड्डे की घटना को लेकर बातचीत की। उन्होंने जर्मनी को भरोसा दिलाया कि इस मामले में यूरोपीय संघ उसके साथ पूरी तरह खड़ा है। उनके अनुसार, यूरोप के सामने आने वाले सुरक्षा खतरों का सामना किसी एक देश को अकेले नहीं करना चाहिए, बल्कि सदस्य देशों को मिलकर प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
वॉन डेर लेयेन का संदेश ऐसे समय आया है जब जर्मनी ने आधिकारिक तौर पर इस घटना को रूस से जोड़ते हुए कड़े कदम उठाने की घोषणा की है। जर्मन अधिकारियों के अनुसार, लीपज़िग/हाले हवाईअड्डे के पास एक विस्फोटक ले जाने वाला ड्रोन मिला था। जांच के बाद बर्लिन ने इसे रूस की व्यापक हाइब्रिड गतिविधियों का हिस्सा बताया है।
क्या है हाइब्रिड हमला?
‘हाइब्रिड हमला’ केवल पारंपरिक सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं होता। इसमें साइबर गतिविधियां, तोड़फोड़, दुष्प्रचार, जासूसी, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के प्रयास और अन्य गैर-पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल शामिल हो सकता है।
यूरोपीय देशों का आरोप है कि रूस परंपरागत युद्ध के साथ-साथ यूरोपीय समाजों में असुरक्षा, अविश्वास और भय पैदा करने वाली गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रहा है। जर्मनी ने लीपज़िग की घटना को इसी व्यापक संदर्भ में देखा है। हालांकि, रूस ने जर्मनी के आरोपों को खारिज किया है और इन्हें अनुचित बताया है।
जर्मनी ने उठाए कड़े कदम
लीपज़िग घटना के बाद जर्मन सरकार ने रूस के खिलाफ कई कदमों की घोषणा की है। इनमें बॉन स्थित रूस के अंतिम वाणिज्य दूतावास को बंद करना और बर्लिन में रूसी हाउस ऑफ साइंस एंड कल्चर से जुड़े कदम शामिल हैं। इसके अलावा जर्मनी ने यूरोपीय स्तर पर अतिरिक्त प्रतिबंधों के समर्थन की बात कही है।
बर्लिन का मानना है कि यूरोप को ऐसे मामलों में केवल प्रतिक्रिया देने के बजाय भविष्य में इस तरह की गतिविधियों को रोकने की क्षमता भी मजबूत करनी होगी। जर्मन अधिकारियों ने इस घटना को यूरोप में सामने आ रही कथित रूसी हाइब्रिड गतिविधियों के व्यापक पैटर्न से जोड़कर देखा है
वॉन डेर लेयेन का स्पष्ट संदेश
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि यूरोपीय संघ अपनी एकता को कमजोर नहीं होने देगा। उनका कहना है कि हाइब्रिड हमलों का जवाब स्पष्ट रूप से दिया जाएगा और यूरोप अपनी स्वतंत्रता तथा सुरक्षा को कमजोर करने की कोशिशों के सामने पीछे नहीं हटेगा।
वॉन डेर लेयेन ने यह भी कहा कि रूस यूरोपीय समाजों में अविश्वास और भय पैदा करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ऐसी कोशिशें सफल नहीं होंगी। उन्होंने यूक्रेन के प्रति यूरोपीय समर्थन को भी दोहराते हुए कहा कि यूरोपीय संघ यूक्रेन के साथ आवश्यक अवधि तक खड़ा रहेगा।
NATO भी जर्मनी के समर्थन में
लीपज़िग मामले पर NATO ने भी जर्मनी के प्रति एकजुटता दिखाई है। NATO महासचिव मार्क रूटे ने कहा कि गठबंधन जर्मनी के साथ पूरी तरह खड़ा है और लीपज़िग की घटना को लेकर उपलब्ध साक्ष्यों को गंभीरता से लिया जा रहा है।
रूटे ने NATO की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उनका कहना है कि गठबंधन अपने सभी सदस्य देशों को किसी भी तरह के खतरे से बचाने और संभावित खतरों को रोकने की क्षमता मजबूत करता रहेगा।
NATO प्रमुख ने यह भी संकेत दिया कि रूस की ओर से सहयोगी देशों में डर पैदा करने और यूक्रेन के समर्थन को कमजोर करने के प्रयास सफल नहीं होंगे। उन्होंने यूक्रेन के लिए पश्चिमी देशों के समर्थन को जारी रखने की बात कही है।
अतिरिक्त प्रतिबंधों पर चर्चा
लीपज़िग की घटना अब यूरोपीय संघ की विदेश नीति के एजेंडे में भी शामिल हो गई है। वॉन डेर लेयेन के अनुसार, अतिरिक्त प्रतिबंधों की संभावना पर यूरोपीय संघ के विदेश मंत्री चर्चा करेंगे।
आयरिश अध्यक्षता के तहत होने वाली विदेश मंत्रियों की बैठक में इस विषय को आगे बढ़ाया जाना है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच संभावित संयुक्त प्रतिक्रिया पर सहमति बनाना हो सकता है। यूरोपीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाइब्रिड गतिविधियों का प्रभाव किसी एक देश की सीमा तक सीमित नहीं रहता।
यूरोपीय एकता की परीक्षा
लीपज़िग की घटना ने एक बार फिर यूरोपीय संघ के सामने अपनी सामूहिक सुरक्षा नीति को मजबूत करने की चुनौती खड़ी कर दी है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोपीय देशों ने पहले ही साइबर सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, सीमा सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर कई कदम उठाए हैं।
अब कथित हाइब्रिड गतिविधियों को लेकर यूरोपीय देशों के बीच बेहतर खुफिया सहयोग और तेज प्रतिक्रिया की जरूरत पर चर्चा बढ़ रही है। यूरोपीय नेताओं का मानना है कि यदि किसी सदस्य देश को निशाना बनाया जाता है, तो उसका प्रभाव पूरे यूरोपीय संघ की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
यूक्रेन को समर्थन जारी रखने पर जोर
वॉन डेर लेयेन के बयान में यूक्रेन का मुद्दा भी प्रमुख रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरोप रूस की आक्रामकता के खिलाफ यूक्रेन का समर्थन जारी रखेगा। लीपज़िग घटना को लेकर यूरोपीय प्रतिक्रिया को यूक्रेन के लिए पश्चिमी समर्थन के व्यापक संदर्भ से भी जोड़ा जा रहा है।
यूरोपीय नेताओं के अनुसार, रूस द्वारा यूरोपीय देशों पर कथित दबाव या डर पैदा करने की कोशिशों का उद्देश्य यूक्रेन के लिए जारी राजनीतिक और आर्थिक समर्थन को कमजोर करना भी हो सकता है। इसी कारण यूरोपीय संघ अपनी एकता बनाए रखने पर विशेष जोर दे रहा है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की आगामी बैठक और NATO स्तर पर होने वाली चर्चाओं पर है। संभावित अतिरिक्त प्रतिबंधों, सुरक्षा सहयोग और हाइब्रिड खतरों से निपटने की रणनीति पर आगे फैसला हो सकता है।
लीपज़िग की घटना ने यह संकेत दिया है कि यूरोप और रूस के बीच तनाव केवल यूक्रेन के युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है। यूरोपीय देशों के लिए साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और कथित गुप्त या हाइब्रिड गतिविधियों से निपटना भी बड़ी प्राथमिकता बनता जा रहा है।
फिलहाल जर्मनी को यूरोपीय संघ और NATO दोनों से मजबूत राजनीतिक समर्थन मिला है। वॉन डेर लेयेन और रूटे के बयानों से स्पष्ट है कि यूरोपीय और NATO नेतृत्व इस मामले में सामूहिक प्रतिक्रिया को प्राथमिकता दे रहा है। जर्मनी की ओर से उठाए गए कदमों और संभावित नए यूरोपीय प्रतिबंधों के जरिए रूस को यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि यूरोप अपनी सुरक्षा और राजनीतिक एकता से समझौता नहीं करेगा।
निष्कर्ष: लीपज़िग हवाईअड्डे की घटना ने यूरोप में हाइब्रिड सुरक्षा खतरों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जर्मनी के रूस पर लगाए गए आरोपों के बाद EU और NATO का समर्थन बर्लिन के साथ दिखाई दे रहा है। अब संभावित अतिरिक्त प्रतिबंधों और सामूहिक सुरक्षा उपायों पर होने वाली चर्चाएं आगे की दिशा तय करेंगी। साथ ही, यूरोपीय नेतृत्व यूक्रेन के प्रति अपने समर्थन और रूस के खिलाफ संयुक्त रुख को बनाए रखने पर जोर दे रहा है।