जून 28, 2026

12 दिन तक डिजिटल अरेस्ट का डर, फिर 2.20 करोड़ की ठगी! रिटायर्ड बैंक मैनेजर बने साइबर अपराधियों का शिकार

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सांकेतिक तस्वीर

नई दिल्ली/गाजियाबाद: देश में साइबर अपराध का जाल लगातार फैलता जा रहा है और अपराधी लोगों को नई-नई तरकीबों से निशाना बना रहे हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद का है, जहां 84 वर्षीय रिटायर्ड बैंक मैनेजर को कथित तौर पर 12 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर मानसिक दबाव में रखकर 2.20 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई। इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और साइबर जागरूकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, पीड़ित को साइबर ठगों ने खुद को सरकारी जांच एजेंसी और पुलिस अधिकारी बताकर संपर्क किया। उन्हें विश्वास दिलाया गया कि उनका नाम एक गंभीर आपराधिक मामले और मनी लॉन्ड्रिंग जांच में सामने आया है। ठगों ने गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उन्हें लगातार वीडियो कॉल और फोन पर निगरानी में रखा।

बताया जा रहा है कि लगभग 12 दिनों तक पीड़ित मानसिक दबाव में रहे और ठगों के निर्देशों का पालन करते हुए कई बार अलग-अलग बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। आखिरकार जब उन्हें अपने साथ हुई धोखाधड़ी का एहसास हुआ, तब उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।

क्या होता है ‘डिजिटल अरेस्ट’?

‘डिजिटल अरेस्ट’ कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। यह साइबर अपराधियों द्वारा अपनाया गया एक मनोवैज्ञानिक हथकंडा है, जिसमें पीड़ित को यह विश्वास दिलाया जाता है कि वह किसी बड़े अपराध में फंस चुका है। फिर उसे वीडियो कॉल पर बने रहने, किसी से बात न करने और जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है।

पुलिस ने शुरू की जांच

मामले की शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन की जांच की जा रही है ताकि ठगी करने वाले गिरोह तक पहुंचा जा सके। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या सरकारी अधिकारी बनकर पैसे मांगने वाले व्यक्ति पर बिना सत्यापन भरोसा न करें।

ऐसे रहें सुरक्षित

  • किसी भी सरकारी एजेंसी के नाम पर आए कॉल से घबराएं नहीं।
  • वीडियो कॉल पर किसी के दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें।
  • बैंक खाते, OTP, PIN और व्यक्तिगत जानकारी किसी से साझा न करें।
  • किसी भी संदिग्ध कॉल की तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर पोर्टल पर शिकायत करें।
  • परिवार के बुजुर्गों को साइबर ठगी के नए तरीकों के बारे में नियमित रूप से जागरूक करें।

निष्कर्ष

गाजियाबाद की यह घटना दिखाती है कि साइबर अपराधी अब केवल तकनीक नहीं, बल्कि मानसिक दबाव और डर का इस्तेमाल करके लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट जैसी फर्जी चालों से बचने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता, सतर्कता और समय पर शिकायत करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, CBI, ED या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन पर पैसे मांगता है या गिरफ्तारी का डर दिखाता है, तो उसकी तुरंत पुष्टि करें और बिना जांच के किसी भी तरह का भुगतान बिल्कुल न करें।

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