मार्च 17, 2026

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का सख्त रुख: NDPS मामले में जमानत याचिका खारिज

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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक अहम निर्णय देते हुए मादक पदार्थों से जुड़े एक मामले में आरोपी की जमानत याचिका को अस्वीकार कर दिया। यह फैसला NDPS (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में न्यायपालिका की सख्ती को दर्शाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जमानत कोई सामान्य अधिकार नहीं, बल्कि विशेष परिस्थितियों में ही दी जाने वाली राहत है।

मामला क्या था?

यह प्रकरण वर्ष 2022 से संबंधित है, जब जांच एजेंसी को सूचना मिली कि एक वाहन के माध्यम से प्रतिबंधित मादक पदार्थों की तस्करी की जा रही है। सूचना के आधार पर वाहन को रोका गया और तलाशी ली गई। जांच के दौरान उसमें से लगभग 2 किलोग्राम के करीब चरस बरामद की गई। वाहन में मौजूद तीन व्यक्तियों को तुरंत हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्यवाही शुरू की गई।

आरोपी की ओर से दलीलें

जमानत के लिए दायर याचिका में आरोपी की तरफ से कई आधार प्रस्तुत किए गए। उनका कहना था कि बरामदगी सीधे तौर पर उससे नहीं हुई है और उसे गलत तरीके से फंसाया गया है। इसके अलावा, उसने अपनी गंभीर शारीरिक स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि वह लंबे समय से बीमारी से जूझ रहा है। साथ ही यह भी कहा गया कि जांच पूरी हो चुकी है और वह अदालत द्वारा निर्धारित किसी भी शर्त का पालन करने के लिए तैयार है।

अभियोजन पक्ष का रुख

सरकारी पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि बरामद मादक पदार्थ की मात्रा व्यावसायिक श्रेणी में आती है, जो NDPS कानून के तहत बेहद गंभीर अपराध माना जाता है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि आरोपी को रिहा किए जाने पर वह साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है या न्याय प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर सकता है।

न्यायालय का निर्णय

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सभी तथ्यों और प्रस्तुत साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया। अदालत ने पाया कि जब्त की गई चरस की मात्रा “commercial quantity” के अंतर्गत आती है, जिसके कारण NDPS अधिनियम की धारा 37 लागू होती है।

इस धारा के तहत जमानत देने के लिए दो महत्वपूर्ण शर्तें होती हैं:

  • यह विश्वास होना चाहिए कि आरोपी प्रथम दृष्टया दोषी नहीं है
  • आरोपी भविष्य में अपराध नहीं करेगा

न्यायालय ने माना कि आरोपी इन दोनों शर्तों को संतोषजनक रूप से साबित नहीं कर पाया। इसी आधार पर जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया।

स्वास्थ्य आधार पर राहत क्यों नहीं मिली?

आरोपी ने अपनी खराब स्वास्थ्य स्थिति को आधार बनाकर जमानत की मांग की थी। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल बीमारी के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती, खासकर तब जब कानून की कठोर शर्तें पूरी न हो रही हों। अदालत ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में चिकित्सा आपात स्थिति उत्पन्न होती है, तो संबंधित अदालत से अस्थायी राहत मांगी जा सकती है।

कानूनी दृष्टिकोण

इस निर्णय में न्यायालय ने यह भी दोहराया कि NDPS मामलों में जमानत देने का दृष्टिकोण सामान्य आपराधिक मामलों से अलग होता है। यहां कानून अधिक सख्त है और आरोपी को राहत पाने के लिए विशेष परिस्थितियों को साबित करना पड़ता है। “conscious possession” यानी आरोपी को मादक पदार्थ के बारे में जानकारी होना भी एक महत्वपूर्ण पहलू माना जाता है।

निष्कर्ष

यह फैसला एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में न्यायालय किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतता। विशेष रूप से जब मामला व्यावसायिक मात्रा से जुड़ा हो, तब जमानत मिलना बेहद कठिन हो जाता है। यह निर्णय न केवल कानून की सख्ती को दर्शाता है, बल्कि समाज में नशे के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए न्यायपालिका की गंभीरता को भी उजागर करता है।


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