मार्च 30, 2026

निज्जर हत्या मामले में भारतीय राजनयिकों को “व्यक्तियों की सूची” में शामिल करने पर भारत करेगा कनाडा के खिलाफ कड़ा विरोध

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सांकेतिक तस्वीर

भारत और कनाडा के बीच राजनयिक तनाव और बढ़ने की संभावना है, क्योंकि भारत ने कनाडा सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज करने की योजना बनाई है। यह कदम तब उठाया जा रहा है जब कनाडा ने खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की जांच में भारत के उच्चायुक्त और अन्य वरिष्ठ राजनयिकों को “संदिग्ध व्यक्तियों” की सूची में शामिल किया है।

यह घटना उस समय सामने आई है जब दोनों देशों के बीच पहले से ही रिश्तों में खटास आ चुकी है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने निज्जर की हत्या में भारत की कथित संलिप्तता को लेकर सार्वजनिक रूप से बयान दिए थे, जिसे भारत ने “बेतुका और प्रेरित” बताते हुए खारिज कर दिया है।

बढ़ते राजनयिक तनाव

सूत्रों के अनुसार, कनाडा के चार्ज डी’अफेयर्स को नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय (MEA) में तलब किया गया है, जहां इस नवीनतम घटनाक्रम को लेकर औपचारिक और कड़ा विरोध दर्ज किया जाएगा। भारत कनाडा के इस कदम से बेहद नाराज है और इसे पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति में और वृद्धि के रूप में देख रहा है।

कनाडा के राजनयिक प्रतिनिधि को तलब करने का यह निर्णय भारत की इस स्थिति को दर्शाता है कि वह कनाडा के इस मामले को लेकर बढ़ते कदमों से असंतुष्ट है। भारतीय अधिकारियों को चिंता है कि यह कदम कनाडा में एक बड़े नैरेटिव का हिस्सा है, जिसके जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

हरदीप सिंह निज्जर की हत्या: पृष्ठभूमि

हरदीप सिंह निज्जर, जो खालिस्तानी अलगाववादी आंदोलन का प्रमुख चेहरा थे, कनाडा में जून 2023 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। निज्जर, जो एक स्वतंत्र सिख राज्य के लिए मुखर रूप से अभियान चला रहे थे, को भारत सरकार द्वारा आतंकवादी घोषित किया गया था, क्योंकि उनका भारत की अखंडता को कमजोर करने वाली गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था। उनकी हत्या के बाद भारत और कनाडा के बीच संबंधों में तनाव उत्पन्न हो गया है, जिसमें कनाडा ने विदेशी तत्वों की भूमिका की ओर इशारा किया है।

हालांकि, कनाडाई अधिकारियों ने भारत को हत्या से जोड़ने का कोई ठोस सबूत नहीं दिया है, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए एक अंतरराष्ट्रीय राजनयिक संकट खड़ा कर दिया है।

भारत का रुख

भारत ने लगातार इन आरोपों को खारिज किया है कि उसका निज्जर की हत्या में कोई हाथ था। भारत का कहना है कि इस घटना में उसकी कोई भूमिका नहीं है और यह दावे “राजनीतिक एजेंडे” का हिस्सा हैं। कनाडा की इस जांच में भारतीय राजनयिकों को शामिल किए जाने से भारत और भी ज्यादा नाराज है, जो इसे अपने राजनयिक स्टाफ और वैश्विक प्रतिष्ठा पर चोट के रूप में देख रहा है।

भारत ने यह भी कहा है कि खालिस्तानी आंदोलन मुख्य रूप से कनाडा का एक आंतरिक मामला है, जहां इस अलगाववादी विचारधारा के कई समर्थक रहते हैं। भारतीय सरकार ने कनाडा से कई बार आग्रह किया है कि वह उन समूहों के खिलाफ कार्रवाई करे जो कनाडा की धरती से भारत के खिलाफ हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।

राजनयिक संबंधों पर असर

इस विवाद का राजनयिक संबंधों पर गहरा असर पड़ा है। हाल के महीनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे के साथ अपने संबंध सीमित कर दिए हैं, जिसमें यात्रा चेतावनियाँ जारी की गई हैं, व्यापार वार्ताएं स्थगित हो गई हैं, और कुछ मामलों में वीज़ा सेवाओं को भी निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा, कनाडा में भारतीय कांसुलर गतिविधियों पर भी कई प्रकार की पाबंदियां लगाई गई हैं।

हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ इस स्थिति को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह तनाव अभी भी कम होने के आसार नहीं दिखा रहा है। कनाडा का इस मामले की जांच जारी रखना और भारत का इस जांच से किसी भी तरह के संबंध से इनकार करना दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को और बढ़ा रहा है।

आगे की राह

कनाडा के चार्ज डी’अफेयर्स को तलब करना और भारत का प्रस्तावित विरोध इस राजनयिक विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। हालांकि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक रूप से मजबूत संबंध रहे हैं, लेकिन निज्जर मामले ने उनके बीच एक गहरा दरार पैदा कर दी है।

विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा राजनयिक संकट का दीर्घकालिक असर भारत-कनाडा संबंधों पर पड़ सकता है, जिसमें व्यापार, शिक्षा, और सुरक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी बाधा आ सकती है। दोनों पक्षों के अपने-अपने रुख पर अड़े रहने से यह साफ है कि निकट भविष्य में इस मामले का समाधान आसान नहीं होगा।

भारत का यह विरोध कनाडा को यह स्पष्ट संदेश देगा कि वह अपने राजनयिकों को इस तरह की जांच में शामिल करने को स्वीकार नहीं करेगा और इसे राजनयिक मानदंडों का उल्लंघन मानता है। अब देखना यह होगा कि इस विरोध के बाद कनाडा अपनी नीति में कोई बदलाव करता है या नहीं, लेकिन इतना तय है कि यह मुद्दा आने वाले समय में दोनों देशों के बीच भू-राजनीतिक संबंधों को आकार देता रहेगा।

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