वंदे मातरम् पर विवाद: संसद में पीएम मोदी का कांग्रेस पर बड़ा हमला

नई दिल्ली में शीतकालीन सत्र के छठे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पार्टी को वंदे मातरम् के प्रति “अनादर” दिखाने के आरोपों को लेकर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत का सम्मान हर भारतीय का कर्तव्य है, लेकिन कांग्रेस लगातार इससे समझौता करती रही है — चाहे वह इतिहास में हो या आज के दौर में।
राहुल गांधी की अनुपस्थिति पर तंज
प्रधानमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संसद में अनुपस्थित रहने को मुद्दा बनाते हुए कहा कि जब महत्वपूर्ण बहसें चल रही हैं, तब विपक्ष का शीर्ष नेतृत्व सदन में दिखना चाहिए। उन्होंने टिप्पणी की कि “पहले नेहरू जी ने, अब राहुल गांधी ने वंदे मातरम् के महत्व को नजरअंदाज़ किया है।”
ऐतिहासिक संदर्भ का जिक्र
सत्र के दौरान पीएम मोदी ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में भी कांग्रेस ने वंदे मातरम् को लेकर कई बार समझौते किए। उन्होंने दावा किया कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लिखे एक पत्र में कहा था कि यह गीत मुसलमानों को उत्तेजित कर सकता है। प्रधानमंत्री ने इसे “राष्ट्रीय भावना के साथ विश्वासघात” बताया।
कांग्रेस पर तीखे आरोप
पीएम मोदी ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत का अपमान करने और इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से कमजोर करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम् को ‘टुकड़े-टुकड़े’ किया और इसे पूरे उत्साह के साथ स्वीकार नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि आज भी कांग्रेस उसी मानसिकता को आगे बढ़ा रही है।
वंदे मातरम् का स्वतंत्रता संग्राम में महत्व
प्रधानमंत्री ने वंदे मातरम् को केवल एक गीत नहीं बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा बताया। उन्होंने कहा:
- यह गीत लोगों को एकजुट करता था
- स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की प्रेरणा देता था
- देशभक्ति को मजबूती प्रदान करता था
उनके अनुसार, अंग्रेजी शासन के दौरान भारत को कमजोर और अयोग्य बताने की कोशिशें की गईं, लेकिन बैंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् ने देश की चेतना को जगाया।
150 वर्ष पूरा होने पर विशेष संदेश
वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री ने इसे भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि यह गीत सिर्फ आज़ादी का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय समाज की आत्मगौरव की ध्वनि है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक संरक्षित और सम्मानित किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
संसद में प्रधानमंत्री का भाषण न केवल राजनीति पर तीखी टिप्पणी था, बल्कि वंदे मातरम् के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की याद दिलाने वाला संदेश भी था। यह मुद्दा आने वाले दिनों में फिर से राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन सकता है, क्योंकि कांग्रेस और भाजपा—दोनों के लिए यह उनकी वैचारिक पहचान से जुड़ा विषय है।
