अयोध्या में ‘ग्रंथराज ज्ञानेश्वरी’ कथा का भव्य समापन, महाराष्ट्र–अवध की भक्ति धारा का अद्भुत संगम

अयोध्या। तीर्थ नगरी अयोध्या में आयोजित ‘ग्रंथराज श्री ज्ञानेश्वरी’ कथा का आज भक्तिभाव और आध्यात्मिक उल्लास के बीच भव्य समापन हुआ। कई दिनों से चल रहे इस धार्मिक महोत्सव ने अज्ञान से ज्ञान की ओर अग्रसर होने का संदेश देते हुए श्रद्धा, सेवा और सांस्कृतिक एकता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
महाराष्ट्र से आए संत ने बांधा भक्ति का समां
महाराष्ट्र के तुंगेश्वर पर्वत से पधारे बाल योगी संत श्री सदानंद महाराज ने कथा के माध्यम से ‘ज्ञानेश्वरी’ के गूढ़ तत्वों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया। उनके सान्निध्य में अखंड पारायण और हरिनाम संकीर्तन की गूंज से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। हजारों श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए प्रतिदिन उपस्थित रहे और भक्ति रस में डूबे नजर आए।
गणमान्य हस्तियों की उपस्थिति
कार्यक्रम का शुभारंभ श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने किया। इस अवसर पर योगी आदित्यनाथ और देवेंद्र फडणवीस सहित कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने कथा एवं संकीर्तन में सहभागिता कर श्रद्धा व्यक्त की।

छत्रपति शिवाजी महाराज और रामायण पर विशेष प्रवचन
महोत्सव के दौरान गोविंद देव गिरी महाराज ने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और आदर्शों पर प्रेरक प्रवचन दिया। वहीं शांति ब्रह्म संत एकनाथ महाराज कृत ‘भावार्थ रामायण’ पर विस्तृत व्याख्यान श्री योगी महाराज गोसिवी ने प्रस्तुत किया, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
सुव्यवस्थित आयोजन और सेवा भावना
आयोजन समिति की ओर से डॉ. ज्योति दीपक ठाकरे ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए भोजन, विश्राम और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यापक व्यवस्था की गई थी। समाजसेवी डॉ. सी. एच. दुबे ने पूरे कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई, जिससे किसी भी आकस्मिक स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सका।
बाल योगी श्री सदानंद महाराज ज्ञानेश्वरी पारायण समिति, अखिल वारकरी समाज महाराष्ट्र और परशुराम कुंड तुंगेश्वर पर्वत के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस आयोजन में संपर्क प्रमुख महेंद्र तिवारी ने व्यवस्थाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संतों और वेदपाठी छात्राओं का सम्मान
समापन समारोह में महंत बालक राम दास जी, महामंडलेश्वर श्री गिरीश दास जी, महंत श्री भगवान दास जी, मणिराम दास छावनी के संतों तथा वेदपाठी छात्राओं को महाराष्ट्र से आए भक्तों और आयोजकों द्वारा पट एवं भेंट प्रदान कर सम्मानित किया गया।
अयोध्या की इस आध्यात्मिक भूमि पर आयोजित यह महोत्सव केवल कथा-प्रवचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह श्रद्धा, सेवा और सामाजिक एकता का जीवंत उत्सव बन गया। महाराष्ट्र और अवध के श्रद्धालुओं का यह संगम भारतीय संस्कृति की अखंड आध्यात्मिक परंपरा का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।
