भारत की दमदार वापसी: ज़िम्बाब्वे पर 72 रनों की प्रचंड जीत

चेन्नई के ऐतिहासिक में खेले गए सुपर-8 चरण के मुकाबले में भारतीय टीम ने ज़िम्बाब्वे को 72 रनों से हराकर टूर्नामेंट में अपने अभियान को नई ऊर्जा दी। यह जीत सिर्फ अंकतालिका के लिहाज़ से अहम नहीं रही, बल्कि पिछले मुकाबले में मिली निराशा के बाद टीम के मनोबल को भी ऊंचा उठाने वाली साबित हुई।
मुकाबले की झलक
- भारत: 256/4 (20 ओवर)
- ज़िम्बाब्वे: 184/6 (20 ओवर)
- नतीजा: भारत 72 रन से विजयी
- प्लेयर ऑफ द मैच:
बल्लेबाज़ी में भारतीय तूफ़ान
भारतीय बल्लेबाज़ों ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। पावरप्ले में तेज़ रन बटोरने के बाद मध्य ओवरों में भी रनगति पर कोई ब्रेक नहीं लगा।
- ने 30 गेंदों में 55 रन की विस्फोटक पारी खेली।
- ने मात्र 23 गेंदों पर नाबाद 50 रन बनाकर अंत तक दबदबा बनाए रखा।
- ने 16 गेंदों में 44 रन जोड़कर विपक्षी गेंदबाज़ों की योजना बिगाड़ दी।
तीनों पारियों के संयुक्त प्रभाव से भारत ने 256 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया, जो विश्व कप इतिहास के सबसे ऊंचे स्कोरों में से एक माना जा रहा है।
ज़िम्बाब्वे की ओर से संघर्ष
लक्ष्य बड़ा था, लेकिन ज़िम्बाब्वे ने शुरुआत में सकारात्मक इरादा दिखाया। ने अकेले दम पर 97* रन बनाकर टीम को उम्मीद दी, पर दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरते रहे।
भारतीय गेंदबाज़ों ने संयम बनाए रखा। शुरुआती ओवरों में ने अहम झटके देकर विपक्ष को दबाव में डाल दिया। परिणामस्वरूप ज़िम्बाब्वे 184/6 तक ही पहुंच सका।
दिग्गज की नजर में
महान क्रिकेटर ने इस जीत को टीम के “सही मानसिक दृष्टिकोण” का उदाहरण बताया। उनके अनुसार, ऐसे अहम मुकाबलों में संयम और आक्रामकता का संतुलन ही जीत की असली कुंजी होता है, जिसे भारतीय टीम ने बखूबी प्रदर्शित किया।
क्यों खास रही यह जीत?
- सेमीफाइनल की संभावनाएं फिर से मजबूत हुईं।
- पिछली हार के बाद टीम ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
- बल्लेबाज़ी की गहराई और गेंदबाज़ी का अनुशासन दोनों का शानदार तालमेल दिखा।
अंतिम विचार
इस मुकाबले ने दिखा दिया कि भारतीय टीम दबाव में भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकाल सकती है। चेन्नई के दर्शकों के सामने खेला गया यह मैच आत्मविश्वास की पुनर्स्थापना का प्रतीक बन गया। अब चुनौती होगी इस लय को बनाए रखते हुए अंतिम चार में जगह पक्की करने की।
