मार्च 2, 2026

ट्रंप का “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी”: ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान

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प्रस्तावना

1 मार्च 2026 को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ने ईरान के विरुद्ध व्यापक सैन्य कार्रवाई की घोषणा की, जिसे “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया गया। प्रशासन के अनुसार इस अभियान का लक्ष्य ईरान की परमाणु गतिविधियों को निष्क्रिय करना, बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को कमजोर करना और क्षेत्र में सक्रिय उग्रवादी नेटवर्क पर प्रहार करना है। लंबे समय से जारी कूटनीतिक प्रयासों को निष्फल मानते हुए यह कदम उठाया गया।


अभियान की प्रमुख बातें

  • अमेरिकी सेना ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई और मिसाइल हमले किए।
  • ईरान के सर्वोच्च नेता के मारे जाने की खबर सामने आई, जिसकी आधिकारिक पुष्टि व्हाइट हाउस ने की बताई जा रही है।
  • ट्रंप ने इस कार्रवाई को “शांति के लिए शक्ति” की नीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि अभियान योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है।

पृष्ठभूमि

अमेरिका और ईरान के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से दोनों देशों के बीच अविश्वास और टकराव की स्थिति बनी रही। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और प्रतिबंधों को लेकर मतभेद लगातार गहराते रहे हैं।

हाल के महीनों में वाशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु मुद्दे पर वार्ता चल रही थी, किंतु अमेरिकी प्रशासन ने इसे धीमी प्रगति वाला और अप्रभावी बताते हुए कड़ा रुख अपनाया। ट्रंप ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि यदि ईरान की ओर से आक्रामक गतिविधियां जारी रहीं, तो जवाब असाधारण होगा।


अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

इस सैन्य कार्रवाई पर वैश्विक स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

  • कुछ ईरानी-अमेरिकी समूहों ने इसे क्षेत्रीय संतुलन के लिए आवश्यक कदम बताया।
  • कई यूरोपीय और एशियाई देशों ने चिंता व्यक्त करते हुए संभावित अस्थिरता और तेल आपूर्ति पर असर को लेकर चेतावनी दी।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इससे व्यापक भू-राजनीतिक परिणाम भी सामने आ सकते हैं।

संभावित प्रभाव

“ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” मध्य-पूर्व की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। इससे क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदलने की संभावना है और वैश्विक बाजारों पर भी असर पड़ सकता है। साथ ही, यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह कदम दीर्घकालिक शांति की दिशा में जाएगा या फिर संघर्ष को और बढ़ाएगा।


निष्कर्ष

ईरान के खिलाफ यह अमेरिकी सैन्य अभियान वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। आने वाले समय में ईरान की प्रतिक्रिया, सहयोगी देशों का रुख और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका तय करेगी कि यह घटनाक्रम किस दिशा में आगे बढ़ेगा। दुनिया की निगाहें अब मध्य-पूर्व पर टिकी हुई हैं, जहां की हर हलचल वैश्विक परिदृश्य को प्रभावित कर सकती है।

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