सुजौली में हरखापुर–सुजौली–कारिकोट मार्ग: विकास की राह कब होगी आसान?

कमलेश कुमार बहराइच
रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़
उत्तर प्रदेश के बहराइच जनपद में स्थित हरखापुर–सुजौली–कारिकोट मार्ग आज भी बदहाल हालत में है। यह सड़क जनपद मुख्यालय से लगभग 110 किलोमीटर दूर बसे गांवों को जोड़ती है, लेकिन इसकी जर्जर स्थिति ने ग्रामीणों का जीवन कठिन बना दिया है। वर्षों से उपेक्षित इस मार्ग को लेकर अब स्थानीय लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है।
दुर्घटनाओं और परेशानियों का सिलसिला
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे, जलभराव और उखड़ी हुई सतह के कारण आए दिन हादसे होते हैं। बारिश के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब कीचड़ और पानी से मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है। स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए आवागमन जोखिम भरा बन चुका है।
किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में अत्यधिक समय और लागत का सामना करना पड़ता है। एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं का समय पर न पहुंच पाना लोगों की चिंता बढ़ा देता है। ग्रामीणों का दर्द केवल सड़क तक सीमित नहीं, बल्कि उनके दैनिक जीवन और भविष्य की संभावनाओं से जुड़ा है।
एक दशक से अधूरी मांग
स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले दस वर्षों से अधिक समय से इस सड़क के पुनर्निर्माण की मांग की जा रही है। कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन दिए गए, आश्वासन भी मिला, परंतु जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हुआ।
अब ग्रामीणों ने 7 मार्च को तहसील मोतीपुर मिहिपुरवा में सामूहिक रूप से ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ तो वे आंदोलन और धरना-प्रदर्शन का सहारा लेंगे। कुछ ग्रामीणों ने आगामी चुनावों के बहिष्कार तक की चेतावनी दी है, जो उनकी नाराज़गी की गंभीरता को दर्शाती है।
प्रशासन और सरकार से उम्मीदें
ग्रामीणों का मानना है कि यदि राज्य सरकार और जिला प्रशासन ठोस पहल करें, तो यह समस्या शीघ्र हल हो सकती है। वे मुख्यमंत्री कार्यालय उत्तर प्रदेश, प्रधानमंत्री कार्यालय और जिलाधिकारी बहराइच से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं, ताकि संबंधित विभागों को निर्देश देकर सड़क निर्माण को प्राथमिकता दी जाए।
यह केवल एक सड़क का मामला नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक उन्नति का प्रश्न है। अच्छी सड़कें शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार को नई गति देती हैं। यदि हरखापुर–सुजौली–कारिकोट मार्ग का शीघ्र निर्माण हो जाए, तो क्षेत्र के हजारों लोगों का जीवन स्तर सुधर सकता है और यह वास्तव में एक नए युग की शुरुआत साबित होगा।
जनभागीदारी से बनेगी विकास की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासन और नागरिक मिलकर यदि ठोस कार्ययोजना बनाएं, तो सड़क निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सकता है। पारदर्शिता, समयसीमा और नियमित निगरानी से परियोजना को सफल बनाया जा सकता है।
अब सबकी निगाहें 7 मार्च के ज्ञापन कार्यक्रम और उसके बाद प्रशासन की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। ग्रामीणों की उम्मीद है कि इस बार उनकी आवाज़ अनसुनी नहीं होगी और बहुप्रतीक्षित सड़क निर्माण का सपना जल्द साकार होगा।
