मार्च 12, 2026

लोकसभा में स्पीकर ओम बिड़ला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज, अमित शाह ने कहा– यह दुर्भाग्यपूर्ण कदम

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सांकेतिक तस्वीर

भारतीय संसद के निचले सदन के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव 11 मार्च 2026 को ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया। यह प्रस्ताव विपक्षी दलों की ओर से पेश किया गया था, लेकिन सदन में इसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया। इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्रीय गृह मंत्री ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे संसदीय परंपराओं के लिए “दुर्भाग्यपूर्ण और असामान्य” बताया।

प्रस्ताव का पृष्ठभूमि और परिणाम

11 मार्च को में विपक्षी दलों की ओर से कांग्रेस सांसद ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष का आरोप था कि सदन की कार्यवाही के दौरान अध्यक्ष की ओर से निष्पक्षता नहीं बरती जा रही है और विपक्ष को पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता।

हालांकि, जब प्रस्ताव पर सदन में चर्चा हुई तो इसे ध्वनि मत के जरिए खारिज कर दिया गया। इसके साथ ही यह प्रयास सफल नहीं हो पाया और स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव समाप्त हो गया। उल्लेखनीय है कि लगभग चार दशक बाद ऐसा मौका आया जब लोकसभा स्पीकर के खिलाफ इस प्रकार का प्रस्ताव लाया गया।

अमित शाह की प्रतिक्रिया

घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि स्पीकर की कुर्सी पूरे सदन की गरिमा और निष्पक्षता का प्रतीक होती है। उन्होंने कहा कि इस पद को दलगत राजनीति में खींचना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं है।

शाह ने यह भी कहा कि संसद की कार्यवाही गंभीरता और अनुशासन की मांग करती है। उनके अनुसार, इस तरह के कदम से लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अनावश्यक सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में थी, तब उसने कभी स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इस प्रकार का प्रस्ताव नहीं लाया।

विपक्ष का पक्ष

विपक्षी दलों ने स्पीकर पर पक्षपात के आरोप लगाए और सदन में विरोध भी दर्ज कराया। उनका कहना था कि कई मौकों पर विपक्षी सांसदों को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया।

साथ ही विपक्षी नेताओं ने अमित शाह के बयान पर आपत्ति जताते हुए उनसे माफी की मांग की। उनका तर्क था कि लोकतंत्र में स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठाना भी संसदीय अधिकारों के दायरे में आता है।

राजनीतिक और संसदीय महत्व

भारतीय संसदीय इतिहास में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव बहुत कम देखने को मिलता है। इसलिए यह घटना अपने आप में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि मौजूदा समय में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद काफी तीखे हो गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्पीकर का पद लोकतांत्रिक व्यवस्था में निष्पक्षता और संतुलन का प्रतीक होता है। इसलिए इस संस्था की गरिमा बनाए रखना सभी दलों की साझा जिम्मेदारी है।

निष्कर्ष

लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज हो गया, जिससे सदन की मौजूदा स्थिति स्पष्ट हो गई। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और संसदीय परंपराओं को बनाए रखने के लिए सभी राजनीतिक दलों को जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना होगा।

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