मार्च 13, 2026

दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश: जाबिद उर्फ शाकल को एक माह की अंतरिम जमानत

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नई दिल्ली, 11 मार्च 2026:
दिल्ली उच्च न्यायालय ने जाबिद उर्फ शाकल को एक महीने की अंतरिम जमानत प्रदान की है। यह आदेश न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ द्वारा पारित किया गया। आरोपी ने स्वास्थ्य कारणों के आधार पर अंतरिम जमानत की मांग करते हुए आवेदन दायर किया था।

मामला क्या है

यह मामला दिल्ली के आईपी एस्टेट पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर संख्या 155/2022 से संबंधित है। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है, जिनमें अपहरण, मानव तस्करी, यौन अपराध तथा अन्य संबंधित आरोप शामिल हैं। इसके साथ ही उस पर बाल यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) और अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 के तहत भी आरोप लगाए गए हैं।

जमानत की मांग का आधार

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उसे चिकित्सकीय उपचार और सर्जरी की आवश्यकता है। जांच अधिकारी को प्रस्तुत किए गए मेडिकल दस्तावेजों की सत्यापन रिपोर्ट अदालत में दाखिल की गई, जिसमें पुष्टि हुई कि आरोपी को वास्तव में ऑपरेशन की जरूरत है। हालांकि पहले तय की गई सर्जरी की तारीख निकल चुकी थी, इसलिए नई तारीख निर्धारित की जानी थी।

राज्य की ओर से पेश अतिरिक्त लोक अभियोजक (APP) ने भी इस अंतरिम जमानत आवेदन का विशेष विरोध नहीं किया।

अदालत का निर्णय

मामले की परिस्थितियों, आरोपी की स्वास्थ्य स्थिति और हिरासत में बिताए गए समय को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उसे रिहाई की तारीख से एक महीने की अंतरिम जमानत देने का निर्णय लिया।

जमानत की शर्तें

अदालत ने जमानत देते समय कुछ अनिवार्य शर्तें भी लगाई हैं—

  1. आरोपी को 25,000 रुपये का निजी मुचलका और उतनी ही राशि का एक जमानतदार प्रस्तुत करना होगा।
  2. उसे अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और जमानत अवधि में देश से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी।
  3. आरोपी को अपना मोबाइल नंबर जेल अधीक्षक और जांच अधिकारी को देना होगा और वह नंबर हमेशा सक्रिय रखना होगा।
  4. जमानत अवधि के दौरान उसे सप्ताह में एक बार संबंधित जांच अधिकारी या एसएचओ के सामने उपस्थित होना होगा
  5. अंतरिम जमानत के दौरान आरोपी किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा
  6. जमानत अवधि समाप्त होने पर उसे चिकित्सा उपचार से संबंधित दस्तावेज जेल अधीक्षक को प्रस्तुत करने होंगे।

निष्कर्ष

इन शर्तों के साथ अदालत ने अंतरिम जमानत याचिका का निपटारा कर दिया और आदेश को तत्काल आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए।


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