मार्च 20, 2026

चित्रकूट के जरिहा ग्राम पंचायत में केंचुआ पालन योजना पर उठते सवाल

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उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास को गति देने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं। इन्हीं में से एक है केंचुआ पालन (वर्मीकम्पोस्ट) योजना, जिसे जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आगे बढ़ाया गया है। यह योजना कागज़ों पर जितनी प्रभावशाली दिखाई देती है, ज़मीनी हकीकत उतनी ही अलग नजर आ रही है। चित्रकूट जिले के ग्राम पंचायत जरिहा से सामने आई स्थिति ने इस योजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

ज़मीनी हकीकत क्या कहती है?

ग्राम पंचायत जरिहा में केंचुआ पालन के लिए आवश्यक ढांचा—जैसे चारदीवारी और टैंक—तो बना दिए गए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार इन संरचनाओं में वास्तविक कार्य नहीं हो रहा। जिन स्थानों पर जैविक खाद तैयार होनी चाहिए, वहां या तो खालीपन है या उनका उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया जा रहा है। इससे यह संदेह पैदा होता है कि योजना का लाभ केवल कागज़ों तक सीमित रह गया है।

योजना का मूल उद्देश्य

केंचुआ पालन योजना का मुख्य लक्ष्य किसानों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद उपलब्ध कराना है। इससे न केवल खेती की लागत कम होती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है। साथ ही, यह पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देने का एक प्रभावी माध्यम माना जाता है। यदि इसे सही ढंग से लागू किया जाए, तो यह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकती है।

खर्च और पारदर्शिता पर सवाल

जब किसी योजना के तहत ढांचा तो तैयार हो जाए लेकिन उसका उपयोग ही न हो, तो खर्च की गई राशि पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण और सामाजिक लेखा-जोखा (सोशल ऑडिट) किया जाए, तो ऐसी स्थितियों को रोका जा सकता है। पारदर्शिता की कमी से न केवल योजना की साख प्रभावित होती है, बल्कि आम जनता का भरोसा भी कमजोर पड़ता है।

जिम्मेदारी तय करना जरूरी

किसी भी सरकारी योजना की सफलता उसके सही क्रियान्वयन और निगरानी पर निर्भर करती है। पंचायत प्रतिनिधियों, संबंधित विभागों और स्थानीय प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि योजना का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे। यदि कहीं अनियमितता या लापरवाही हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करना बेहद आवश्यक है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

ग्राम पंचायत जरिहा के लोग चाहते हैं कि:

  • केंचुआ पालन केंद्र पर वास्तविक उत्पादन शुरू किया जाए
  • खर्च की गई राशि का पूरा विवरण ग्राम सभा में सार्वजनिक किया जाए
  • संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करें
  • दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए

निष्कर्ष

चित्रकूट के जरिहा ग्राम पंचायत की स्थिति यह स्पष्ट करती है कि केवल योजनाएं शुरू कर देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उनका ईमानदारी से क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है। यदि केंचुआ पालन योजना को सही तरीके से लागू किया जाए, तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है। अब जरूरत है पारदर्शिता, जवाबदेही और सक्रिय निगरानी की, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ जनता तक पहुंच सके।

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