मार्च 22, 2026

सुजौली-हरखापुर मार्ग की बदहाल स्थिति पर जनाक्रोश: ग्रामीणों ने एकजुट होकर आंदोलन का किया ऐलान

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उत्तर प्रदेश के बहराइच जनपद के अंतर्गत आने वाले सुजौली से हरखापुर को जोड़ने वाला मार्ग पिछले 15-20 वर्षों से बदहाल स्थिति में पड़ा हुआ है। यह सड़क न केवल क्षेत्र के लोगों के दैनिक आवागमन का प्रमुख साधन है, बल्कि यह कई गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली जीवनरेखा भी है। बावजूद इसके, वर्षों से इसकी अनदेखी की जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

इसी गंभीर समस्या को लेकर आज सुजौली क्षेत्र के हरखापुर में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में लगभग 100 से अधिक ग्रामीणों ने भाग लिया और सड़क की जर्जर स्थिति पर खुलकर अपनी चिंता और नाराजगी व्यक्त की। बैठक में शामिल लोगों ने बताया कि बारिश के मौसम में यह मार्ग पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाता है, जिससे आवागमन लगभग असंभव हो जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और किसानों को विशेष रूप से भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से इस सड़क के निर्माण और मरम्मत की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस लापरवाही के कारण लोगों का विश्वास प्रशासन से उठता जा रहा है।

बैठक के दौरान उपस्थित लोगों ने एकजुटता का परिचय देते हुए आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि जल्द ही इस मार्ग का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों ने यह भी संकल्प लिया कि इस आंदोलन में वे हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहेंगे और अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे।

इस अवसर पर कई स्थानीय वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए और सड़क की समस्या को लेकर प्रशासन की उदासीनता पर सवाल उठाए। लोगों ने कहा कि यह केवल एक सड़क का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह उनके अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा हुआ विषय है।

अंत में, बैठक में यह मांग रखी गई कि संबंधित विभाग जल्द से जल्द इस सड़क की मरम्मत या पुनर्निर्माण का कार्य शुरू करे, ताकि क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके। साथ ही, ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

निष्कर्षतः, सुजौली-हरकापुर मार्ग की खराब स्थिति अब केवल एक स्थानीय समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह जनआंदोलन का रूप लेती जा रही है। यदि प्रशासन ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन और व्यापक हो सकता है।

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