पाठा क्षेत्र की जनसमस्याओं को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन का दसवां दिन: प्रशासन से वार्ता, समाधान का आश्वासन

चित्रकूट जनपद के पाठा क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। 16 मार्च 2026 से शुरू हुए इस आंदोलन ने स्थानीय जनता की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को एकजुट स्वर में प्रशासन के सामने रखने का काम किया है। 25 मार्च 2026 को अनशन के दसवें दिन जिला प्रशासन की ओर से सकारात्मक पहल देखने को मिली, जब अपर जिलाधिकारी स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से सीधा संवाद स्थापित किया।

शहीद स्मारक पार्क, एलआईसी तिराहा कर्वी में चल रहे इस अनशन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। यहां पहुंचकर अपर जिलाधिकारी ने बिंदुवार सभी समस्याओं का अवलोकन किया। आंदोलनकारियों ने पानी, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी जरूरतों की कमी को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि इन समस्याओं के कारण क्षेत्र के हजारों लोग वर्षों से परेशान हैं और शासन-प्रशासन की उपेक्षा का सामना कर रहे हैं।
प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि जिला स्तर की समस्याओं का समाधान सात कार्यदिवस के भीतर करने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, जो मुद्दे शासन स्तर से जुड़े हैं, उनके लिए उच्च स्तर पर पत्राचार कर शीघ्र निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि पूरा प्रशासनिक अमला जनता के साथ खड़ा है और समस्याओं के समाधान के लिए गंभीरता से कार्य करेगा।

आंदोलनकारियों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यह सिर्फ एक धरना नहीं, बल्कि पाठा क्षेत्र के लोगों की पीड़ा और संघर्ष की आवाज है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि तय समयसीमा में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे “पाठा सत्याग्रह” जैसे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से शासन-प्रशासन की होगी।
इस आंदोलन में युवाओं और स्थानीय लोगों का उत्साह देखने लायक है। सभी ने मिलकर एकजुटता का परिचय दिया है और अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष कर रहे हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अधिवक्ता प्रखर पटेल ने सभी सहयोगियों और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह जनसमर्थन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह संघर्ष केवल वर्तमान समस्याओं के समाधान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए भी है। लोगों का प्रेम, सहयोग और समर्पण ही इस आंदोलन की असली पूंजी है।
पाठा क्षेत्र का यह आंदोलन अब प्रशासनिक आश्वासनों और जनदबाव के बीच एक निर्णायक दिशा में बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन अपने वादों पर कितना खरा उतरता है और क्या वास्तव में क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं का समाधान हो पाता है।
✊ इंकलाब जिंदाबाद ✊
