आईएनएस सुनयना (आईओएस सागर) की मालदीव यात्रा: भारत की समुद्री कूटनीति का सशक्त उदाहरण
के अंतर्गत ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अवसर पर भारतीय नौसेना की सक्रिय भूमिका एक बार फिर वैश्विक मंच पर देखने को मिली। हिंद महासागर पोत आईओएस सागर (आईएनएस सुनयना) का 8 अप्रैल 2026 को , से प्रस्थान भारत और मालदीव के बीच मजबूत समुद्री संबंधों का प्रतीक है।

🤝 भारत-मालदीव समुद्री साझेदारी को नई मजबूती
इस यात्रा के दौरान और (MNDF) के बीच कई महत्वपूर्ण पेशेवर बैठकों का आयोजन किया गया। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, संयुक्त प्रशिक्षण और रणनीतिक सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाना था।
⚓ पासेक्स अभ्यास: बढ़ता परिचालन समन्वय
प्रस्थान के समय आईएनएस सुनयना ने MNDF के तटरक्षक जहाज गाजी के साथ एक संयुक्त पैसेज एक्सरसाइज (PASSEX) में भाग लिया। यह अभ्यास दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, समन्वय और अंतरसंचालनीयता को दर्शाता है, जो भविष्य में किसी भी समुद्री चुनौती का सामना करने में सहायक होगा।
👨✈️ उच्चस्तरीय मुलाकातें और रणनीतिक संवाद
आईओएस सागर के कमांडिंग ऑफिसर ने MNDF के प्रमुख तथा तटरक्षक बल के कमांडेंट से मुलाकात की। इन चर्चाओं में संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने और दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
🌍 बहुराष्ट्रीय सहभागिता और वैश्विक सहयोग
इस मिशन की एक विशेषता यह भी रही कि आईओएस सागर पर 16 मित्र देशों के सैन्य कर्मियों की उपस्थिति थी। इस बहुराष्ट्रीय सहभागिता ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग की भावना को और अधिक प्रबल किया तथा साझा सुरक्षा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान किया।
🎭 सांस्कृतिक और सामाजिक मेलजोल
पेशेवर गतिविधियों के अलावा, इस यात्रा में सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेल प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं, जिनमें भारतीय नौसेना और MNDF के जवानों ने भाग लिया। इससे दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास, सौहार्द और समझ को बढ़ावा मिला।
🌊 निष्कर्ष: क्षेत्रीय सुरक्षा की दिशा में मजबूत कदम
आईएनएस सुनयना (आईओएस सागर) की यह यात्रा भारत और मालदीव के बीच मजबूत होते समुद्री संबंधों, सहयोग की गहराई और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। यह पहल न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
👉 भारत की यह समुद्री कूटनीति “सुरक्षा और विकास के लिए सहयोग” की नीति को साकार रूप देती है, जो वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका को भी प्रदर्शित करती है।
