अप्रैल 13, 2026

पाठा क्षेत्र की समस्याओं को लेकर बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा का प्रदर्शन, जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

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📍 चित्रकूट/पाठा क्षेत्र — बुन्देलखण्ड के पाठा क्षेत्र में शिक्षा, पेयजल और किसानों से जुड़ी गंभीर समस्याओं को लेकर एक बार फिर स्थानीय लोगों की आवाज बुलंद हुई है। बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में ग्रामीणों और किसानों ने एकजुट होकर जिलाधिकारी चित्रकूट को ज्ञापन सौंपते हुए त्वरित समाधान की मांग की।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

ज्ञापन में सबसे प्रमुख मुद्दा शिक्षा का रहा। ग्रामीणों ने बताया कि पाठा क्षेत्र आज भी शैक्षिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ है। यहां के मेधावी छात्र संसाधनों और उचित मार्गदर्शन के अभाव में प्रतियोगी परीक्षाओं में पिछड़ जाते हैं। आर्थिक तंगी के चलते अधिकांश छात्र निजी कोचिंग संस्थानों का खर्च नहीं उठा पाते।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए न्याय पंचायत रुखमा खुर्द में मुख्यमंत्री अभ्युदय निःशुल्क कोचिंग सेंटर की स्थापना की मांग की गई, ताकि क्षेत्र के युवाओं को समान अवसर मिल सके और वे अपने भविष्य को बेहतर दिशा दे सकें।

गेहूं खरीद न होने से किसान परेशान

किसानों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। बहिलपुरवा सहकारी समिति में अभी तक गेहूं खरीद शुरू न होने से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। फसल तैयार होने के बावजूद सरकारी खरीद केंद्र बंद होने के कारण किसानों को मजबूरन अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल खरीद प्रक्रिया शुरू कराने की मांग की, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीण

पेयजल की समस्या भी क्षेत्र में गंभीर रूप ले चुकी है। ग्राम पंचायत रुकमा बुजुर्ग के मजरा बरहुनीतीर में पिछले छह महीनों से हैंडपंप खराब पड़ा है, जिससे ग्रामीणों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
हालांकि इस समस्या की शिकायत ऑनलाइन माध्यम से जिलाधिकारी कार्यालय में भी की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने हैंडपंप की शीघ्र मरम्मत कराने की मांग उठाई।

प्रशासन को दी चेतावनी

इस मौके पर एडवोकेट प्रखर पटेल ने कहा कि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए शिक्षा और कृषि दोनों क्षेत्रों में सुधार बेहद जरूरी है। वहीं समाजसेवी मुकेश कुमार ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की अपील की।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो क्षेत्रवासी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद

इस दौरान एडवोकेट प्रखर पटेल, मुकेश कुमार, मीरा भारती, संजय सिंह, विपिन, सागर पटेल, विक्रम पटेल, अजय पटेल, अतुल पटेल, संदीप, अंकित, अभय, सद्दाम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान उपस्थित रहे।


निष्कर्ष:
पाठा क्षेत्र की यह पहल न केवल स्थानीय समस्याओं को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि जब जनता संगठित होती है, तो वह अपने अधिकारों के लिए प्रभावी आवाज उठा सकती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन मांगों पर कितनी जल्दी और कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है।

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