किसानों का बायोमेट्रिक नियम के खिलाफ आंदोलन, 14 अप्रैल को मनाया ‘ब्लैक डे’

देश के विभिन्न हिस्सों में किसानों ने सरकारी बायोमेट्रिक खरीद प्रणाली के खिलाफ अपना विरोध तेज कर दिया है। 14 अप्रैल को किसानों ने “ब्लैक डे” के रूप में मनाते हुए इस नई व्यवस्था के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन किए। किसानों का कहना है कि यह नियम उनके लिए सुविधाजनक नहीं है और इससे उन्हें अपनी उपज बेचने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार द्वारा लागू की गई बायोमेट्रिक प्रणाली का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और फर्जीवाड़े को रोकना बताया जा रहा है। इसके तहत किसानों को अपनी पहचान प्रमाणित करने के लिए फिंगरप्रिंट या अन्य बायोमेट्रिक माध्यमों का उपयोग करना पड़ता है। हालांकि, किसानों का आरोप है कि तकनीकी खामियों और नेटवर्क समस्याओं के कारण यह प्रक्रिया बार-बार बाधित होती है।
कई किसानों ने बताया कि बायोमेट्रिक मशीनें सही तरीके से काम नहीं करतीं, जिससे उन्हें घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। बुजुर्ग किसानों और मजदूरों के लिए यह प्रणाली और भी मुश्किल साबित हो रही है, क्योंकि उनके फिंगरप्रिंट अक्सर मशीन में सही से दर्ज नहीं हो पाते। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी भी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है।
किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि इस नियम को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए या इसमें आवश्यक सुधार किए जाएं। उनका कहना है कि जब तक व्यवस्था पूरी तरह सुचारु और किसान-हितैषी नहीं बनती, तब तक इसे लागू करना उचित नहीं है।
14 अप्रैल को मनाए गए “ब्लैक डे” के दौरान किसानों ने काले झंडे दिखाकर और शांतिपूर्ण रैलियां निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। कई स्थानों पर धरना-प्रदर्शन भी हुए, जहां किसानों ने अपनी समस्याओं को खुलकर सामने रखा। आंदोलन में बड़ी संख्या में किसानों की भागीदारी देखने को मिली, जिससे यह मुद्दा और गंभीर होता जा रहा है।
सरकार की ओर से अभी तक इस विरोध पर कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन संबंधित अधिकारियों का कहना है कि किसानों की समस्याओं को समझने और समाधान निकालने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और किसान संगठनों के बीच जल्द संवाद स्थापित नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
कुल मिलाकर, बायोमेट्रिक खरीद प्रणाली को लेकर किसानों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनती जा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे का समाधान किस दिशा में जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
