अप्रैल 22, 2026

जिंदा होते हुए भी ‘मृत’ घोषित: 80 वर्षीय माता बदल की पेंशन रुकी, प्रशासन हरकत में

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दिनेश कुमार द्विवेदी कौशाम्बी

रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़

चित्रकूट जिले के विकासखंड मऊ से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग व्यक्ति को कागजों में मृत घोषित कर दिए जाने के कारण उसकी वृद्धा पेंशन बंद हो गई।

क्या है पूरा मामला?

ग्राम पंचायत बियावल निवासी करीब 80 वर्षीय माता बदल ने बताया कि वे शारीरिक रूप से कमजोर हैं और चलने-फिरने में असमर्थ हैं। उन्हें सरकार की ओर से वृद्धावस्था पेंशन मिलती थी, जिससे उनका जीवन-यापन किसी तरह चल रहा था।

लेकिन फरवरी 2025 से अप्रैल 2026 तक अचानक उनकी पेंशन आनी बंद हो गई। जांच करने पर पता चला कि ग्राम पंचायत स्तर पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया, जिसके चलते उनकी पेंशन रोक दी गई।

अधिकारी से शिकायत और कार्रवाईअपनी समस्या को लेकर माता बदल ने खंड विकास अधिकारी (BDO) मऊ को लिखित आवेदन दिया। उन्होंने मांग की कि उन्हें मृत घोषित करने वाले जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य के साथ ऐसा न हो।

जब इस मामले में ग्राम पंचायत अधिकारी अनूप मिश्रा से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना तक उचित नहीं समझा, जिससे मामले पर और सवाल खड़े हो गए।

प्रशासन ने लिया संज्ञान

मामले की गंभीरता को देखते हुए खंड विकास अधिकारी मऊ ने तुरंत हस्तक्षेप किया और संबंधित एडीओ (समाज कल्याण) से संपर्क कराया।

अधिकारियों ने बताया कि:

माता बदल का जीवित प्रमाण पत्र तैयार कराया गया है

उनकी फाइल को जिला समाज कल्याण अधिकारी के माध्यम से लखनऊ भेज दिया गया है

जल्द ही पेंशन की राशि उनके खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र के लोगों में आक्रोश भी दिखा, वहीं समय पर कार्रवाई करने के लिए खंड विकास अधिकारी की सराहना भी की गई। लोगों का कहना है कि ऐसी लापरवाही गरीब और असहाय लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है, इसलिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।

प्रशासन के लिए सवाल

यह घटना कई अहम सवाल खड़े करती है—

आखिर बिना सत्यापन के किसी जीवित व्यक्ति को मृत कैसे घोषित कर दिया गया?

क्या ग्राम स्तर पर जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं?

निष्कर्ष

माता बदल का मामला केवल एक व्यक्ति की परेशानी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की एक बड़ी मिसाल है। हालांकि समय रहते कार्रवाई शुरू हो गई है, लेकिन जरूरी है कि दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में किसी भी जरूरतमंद को इस तरह की स्थिति का सामना न करना पड़े।

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