मई 1, 2026

हीरागंज नगर पंचायत में आवास वितरण पर उठे सवाल, भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा प्रशासन

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प्रतापगढ़। जिले के नगर पंचायत हीरागंज बाजार में आवास वितरण को लेकर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। मामले के उजागर होने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है, जबकि प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

पात्रता मानकों की अनदेखी के आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि आवास योजना के तहत पात्रता मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। जिन लोगों के पास पहले से दो मंजिला पक्के मकान हैं, उन्हें भी आवास का लाभ दे दिया गया, जबकि वास्तविक जरूरतमंदों को अपात्र घोषित कर सूची से बाहर कर दिया गया। इससे योजना की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गए हैं।

हर वार्ड में वसूली के आरोप

पड़ताल में यह भी सामने आया है कि नगर पंचायत के लगभग सभी वार्डों में आवास दिलाने के नाम पर कथित रूप से धन वसूली की गई। कई स्थानीय लोगों का दावा है कि बिना पैसे दिए सूची में नाम शामिल कराना संभव नहीं था। इस कथित वसूली के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिससे मामला और तूल पकड़ता जा रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो

वायरल वीडियो और तस्वीरों में ऐसे कई लाभार्थियों के पक्के मकान दिखाए जा रहे हैं, जिन्हें योजना का लाभ दिया गया है। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में एक ही परिवार को एक से अधिक आवास दिए जाने के भी आरोप हैं। सरकारी नौकरी से जुड़े परिवारों और आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को भी लाभार्थी बनाए जाने की बात सामने आई है।

अजीबोगरीब पात्रता के उदाहरण

सूत्रों के अनुसार, अविवाहित व्यक्तियों और पहले से पक्के मकान रखने वालों को भी आवास आवंटित कर दिया गया। वहीं, ऐसे परिवार जो वास्तव में बेघर हैं या कच्चे मकानों में रह रहे हैं, उन्हें योजना से वंचित कर दिया गया। यह स्थिति योजना के मूल उद्देश्य के विपरीत मानी जा रही है।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर उठे सवाल

मामले में जब संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया, तो डूडा की जिम्मेदार अधिकारी सीमा भारती ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों को संज्ञान में लिया जा रहा है और आवासों की पुनः जांच कराई जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि औपचारिक शिकायतकर्ता के अभाव में जांच प्रक्रिया शुरू करने में कठिनाई हो रही है। इस बयान के बाद प्रशासन की गंभीरता पर और सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच में देरी से बढ़ा असंतोष

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब सोशल मीडिया पर इतने प्रमाण सामने आ चुके हैं, तो प्रशासन को स्वतः संज्ञान लेकर तत्काल जांच करनी चाहिए थी। लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई न होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई लोग इसे मामले को दबाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

बड़ा सवाल: कैसे हुआ चयन?

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर पात्रता सूची तैयार करते समय इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। यदि मानक सही थे, तो अपात्र लोगों को लाभ क्यों मिला और पात्र लोग वंचित कैसे रह गए। यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या इस पूरे मामले में किसी स्तर पर मिलीभगत हुई है।

जनता में आक्रोश, कार्रवाई की मांग

मामले के सामने आने के बाद नगर पंचायत हीरागंज के निवासियों में भारी आक्रोश है। लोग निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं।

हीरागंज नगर पंचायत में आवास वितरण से जुड़ा यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि संभावित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी पारदर्शिता और तत्परता दिखाता है, और क्या वास्तव में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होती है या मामला समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाता है।

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