मूसलाधार बारिश का कहर: बिछिया–मिहींपुरवा मार्ग पर तीन स्थानों पर गिरे पेड़, घंटों तक थमा आवागमन

अमृतपाल बहराइच
संवाददाता हिट एंड हॉट न्यूज़
मिहींपुरवा। लगातार हो रही तेज बारिश ने क्षेत्र में जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। सोमवार को बिछिया–मिहींपुरवा मुख्य मार्ग पर अलग-अलग तीन स्थानों पर बड़े पेड़ गिर जाने से सड़क पूरी तरह बंद हो गई। इसके चलते दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और जंगल के बीच सैकड़ों यात्री घंटों तक फंसे रहे। इस मार्ग के बंद होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ आवश्यक सेवाओं पर भी असर पड़ा।
वन विभाग की टीम राहत कार्य में जुटी
जानकारी के अनुसार, निशंघाड़ा और मुर्तिहा के बीच स्थित वन क्षेत्र में भारी बारिश के कारण विशाल पेड़ सड़क पर गिर पड़े। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और पेड़ों को हटाने का अभियान शुरू किया। रेंजर ने बताया कि कटर मशीनों की सहायता से पेड़ों को काटकर हटाया जा रहा है, लेकिन पेड़ों का आकार बड़ा होने के कारण कार्य में समय लग रहा है। अधिकारियों का अनुमान है कि मार्ग को पूरी तरह खोलने में कुछ घंटे और लग सकते हैं।
वैकल्पिक रास्ता न होने से बढ़ी मुश्किलें
बिछिया–मिहींपुरवा मार्ग इस क्षेत्र की प्रमुख संपर्क सड़क है। इसके बंद होने के बाद लोगों के पास किसी अन्य रास्ते का विकल्प नहीं बचा। परिणामस्वरूप निजी वाहन, बसें, मालवाहक वाहन और एम्बुलेंस तक सड़क पर फंस गईं। यात्रियों को बारिश के बीच लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा, जिससे काफी असुविधा का सामना करना पड़ा।
कैलाशपुरी–गिरजापुरी मार्ग भी हुआ प्रभावित
लगातार बारिश का असर केवल एक मार्ग तक सीमित नहीं रहा। कैलाशपुरी–गिरजापुरी सड़क पर भी एक विशाल हल्दु का पेड़ गिरने से आवागमन बाधित हो गया। यह घटना कैलाशपुरी बाजार के निकट हुई। सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर पेड़ की शाखाओं को हटाने का प्रयास शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों की सक्रियता से रास्ता जल्द खोलने की कोशिश की गई।
प्रशासन ने लोगों से की सहयोग की अपील
प्रशासन ने यात्रियों से संयम बनाए रखने और राहत कार्य में लगी वन विभाग की टीमों का सहयोग करने का अनुरोध किया है। अधिकारियों ने कहा कि लगातार बारिश के कारण पेड़ों के गिरने का खतरा अभी भी बना हुआ है, इसलिए अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम सामान्य होने तक सतर्क रहें।
आपदा प्रबंधन पर उठे सवाल
बारिश के दौरान बार-बार मार्ग अवरुद्ध होने की घटनाओं ने क्षेत्र की आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर भी प्रश्न खड़े किए हैं। जंगल से गुजरने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर वैकल्पिक सड़क की अनुपस्थिति लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए मजबूत आपदा प्रबंधन प्रणाली, त्वरित राहत दल और वैकल्पिक संपर्क मार्ग विकसित किए जाने चाहिए।
लगातार हो रही वर्षा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में केवल राहत कार्य पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पूर्व तैयारी, मजबूत बुनियादी ढांचा और समय पर कार्रवाई ही लोगों की सुरक्षा और सुचारु आवागमन सुनिश्चित कर सकती है।