सूडान में युद्ध अपराधों को लेकर UN की गंभीर चिंता, ड्रोन हमलों ने बढ़ाया नागरिकों का संकट
खार्तूम/जिनेवा। सूडान में जारी गृहयुद्ध अब केवल जमीन पर होने वाली लड़ाई तक सीमित नहीं रह गया है। आधुनिक ड्रोन तकनीक और बाहरी सैन्य सहायता ने संघर्ष को और अधिक खतरनाक बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र की जांच और मानवाधिकार संबंधी रिपोर्टों ने चेतावनी दी है कि युद्ध में शामिल पक्षों द्वारा ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल से आम नागरिकों की सुरक्षा गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार जनवरी से जून 2026 के बीच लगभग 1,100 नागरिक ड्रोन हमलों में मारे गए। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि हवाई हमलों का असर अब सीधे नागरिक आबादी पर पड़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र जांच में यह भी चिंता जताई गई है कि विदेशी हथियार, सैन्य तकनीक, लड़ाके और लॉजिस्टिक नेटवर्क सूडान के संघर्ष को लंबे समय तक जारी रखने में मदद कर रहे हैं। जांचकर्ताओं के मुताबिक, बाहरी सहायता ने युद्धरत पक्षों की दूर तक हमला करने की क्षमता को बढ़ाया है और ड्रोन युद्ध ने संघर्ष की प्रकृति को और जटिल बना दिया है।

2023 से जारी है सत्ता संघर्ष
सूडान में मौजूदा युद्ध अप्रैल 2023 में शुरू हुआ था। एक तरफ सूडानी सशस्त्र बल यानी Sudanese Armed Forces (SAF) हैं, जबकि दूसरी तरफ Rapid Support Forces (RSF) नामक अर्धसैनिक संगठन है। दोनों के बीच सत्ता और देश के भविष्य को लेकर संघर्ष लगातार जारी है।
समय बीतने के साथ यह लड़ाई राजधानी और प्रमुख शहरों से निकलकर दारफुर, कोर्डोफान तथा अन्य क्षेत्रों तक फैल गई। संघर्ष के कारण लाखों लोग अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार लगभग 13 से 14 मिलियन लोग विस्थापन का सामना कर चुके हैं।
इस युद्ध का सबसे गंभीर पहलू यह है कि नागरिकों के लिए सुरक्षित स्थान लगातार कम होते जा रहे हैं। लोग घरों, बाजारों, अस्पतालों और दूसरे इलाकों में भी हमलों की आशंका से जूझ रहे हैं।
ड्रोन हमले बने बड़ी चुनौती
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने 2026 के शुरुआती महीनों में ड्रोन हमलों में तेजी दर्ज की। जनवरी से मई के बीच 1,000 से अधिक नागरिकों की मौत ड्रोन हमलों से दर्ज की गई थी। जून तक यह आंकड़ा करीब 1,100 तक पहुंच गया। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, इस अवधि में दर्ज संघर्ष-संबंधी नागरिक मौतों का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा ड्रोन हमलों से जुड़ा था।
ड्रोन हमलों की चिंता इसलिए भी अधिक है क्योंकि इनका इस्तेमाल केवल सक्रिय युद्ध क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा। संयुक्त राष्ट्र ने बाजारों, स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों, ईंधन स्टेशनों और पानी तथा ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं पर हमलों का उल्लेख किया है। ऐसी परिस्थितियों में नागरिकों के लिए भोजन, स्वास्थ्य सेवा और साफ पानी तक पहुंच मुश्किल हो जाती है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार जनवरी से मई 2026 के दौरान कम से कम 16 ड्रोन हमले स्वास्थ्य सुविधाओं और 33 हमले बाजारों पर दर्ज किए गए। मार्च में पूर्वी दारफुर के एक शिक्षण अस्पताल पर हुए हमले में 60 से अधिक लोगों की मौत की जानकारी भी दी गई है।
युद्ध अपराधों की आशंका क्यों?
अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत युद्ध के दौरान भी नागरिकों और नागरिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के नियम लागू होते हैं। सैन्य और नागरिक लक्ष्यों के बीच अंतर करना तथा नागरिकों को अनावश्यक नुकसान से बचाना युद्धरत पक्षों की जिम्मेदारी होती है।
जब बाजार, अस्पताल, पानी की व्यवस्था या नागरिकों को ले जाने वाले वाहनों को जानबूझकर या लापरवाही से निशाना बनाया जाता है, तो ऐसे मामलों की स्वतंत्र जांच जरूरी हो जाती है। संयुक्त राष्ट्र की जांच में युद्ध अपराधों और मानवाधिकार उल्लंघनों की गंभीर आशंका जताई गई है। जांचकर्ताओं ने कहा है कि सूडान में दोनों प्रमुख युद्धरत पक्षों से जुड़े गंभीर उल्लंघनों की जांच जारी है।
हालांकि किसी विशेष हमले को कानूनी रूप से युद्ध अपराध घोषित करने के लिए तथ्य, परिस्थितियां और जिम्मेदारी की विस्तृत जांच आवश्यक होती है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट इसलिए जवाबदेही और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर जोर देती है।
विदेशी सहायता ने बढ़ाई चिंता
संयुक्त राष्ट्र की हालिया जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू विदेशी सैन्य सहायता से जुड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हथियारों, सैन्य तकनीक, प्रशिक्षण और अन्य संसाधनों की बाहरी आपूर्ति ने युद्धरत पक्षों की क्षमता को मजबूत किया है। जांचकर्ताओं ने विभिन्न देशों और नेटवर्कों से जुड़े संभावित सहयोग की जानकारी जुटाई है। संबंधित देशों में से कुछ ने इन आरोपों से इनकार किया है।
विदेशी सहायता का सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि संघर्षरत पक्षों को लगातार नई सैन्य क्षमता और संसाधन मिलते रहें, तो युद्ध समाप्त करने की कोशिशें कमजोर पड़ सकती हैं। संयुक्त राष्ट्र ने सूडान पर लागू हथियार प्रतिबंधों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।
मानवीय संकट भी गहराया
सूडान का संकट केवल सुरक्षा और युद्ध का मामला नहीं है। लाखों लोगों को भोजन, पानी, स्वास्थ्य सेवा और आश्रय की आवश्यकता है। विस्थापित परिवारों के सामने जीवन बचाने की बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन गया है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार लगभग 34 मिलियन लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है। युद्ध के कारण विस्थापित लोगों को रास्ते में भी अनेक जोखिमों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय स्वयंसेवी संगठन और सामुदायिक रसोई जैसे प्रयास जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
इसके अलावा पत्रकारों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार कई पत्रकार देश छोड़ चुके हैं, जिससे स्वतंत्र जानकारी का प्रवाह प्रभावित हुआ है और गलत सूचनाओं के फैलने का खतरा बढ़ा है।
क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा
सूडान का संघर्ष पड़ोसी देशों के लिए भी चिंता का विषय बन रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में हिंसा और विस्थापन बढ़ने से पड़ोसी देशों पर शरणार्थियों और मानवीय सहायता का दबाव बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि सीमा क्षेत्रों में बढ़ती हिंसा संघर्ष के क्षेत्रीय स्तर पर फैलने का जोखिम बढ़ा सकती है।
ऐसे में सूडान की समस्या केवल उसके भीतर का राजनीतिक संघर्ष नहीं रह गई है। इसका प्रभाव मानवीय, आर्थिक और सुरक्षा स्तर पर पूरे क्षेत्र में महसूस किया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल कार्रवाई की मांग
संयुक्त राष्ट्र लगातार युद्धरत पक्षों से नागरिकों की रक्षा करने, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने और हिंसा रोकने की अपील कर रहा है। साथ ही बाहरी सैन्य सहायता पर प्रभावी नियंत्रण और संदिग्ध युद्ध अपराधों की स्वतंत्र जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार केवल सैन्य समाधान से सूडान की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा। राजनीतिक वार्ता, मानवीय सहायता और जवाबदेही—इन तीनों मोर्चों पर एक साथ काम करना जरूरी है।
सूडान में बढ़ता ड्रोन युद्ध इस बात का गंभीर संकेत है कि आधुनिक सैन्य तकनीक किस तरह नागरिकों के लिए खतरा बढ़ा सकती है। यदि हमले जारी रहे और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो मानवीय संकट और गहरा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी का मूल संदेश स्पष्ट है—सूडान में नागरिकों को युद्ध का सबसे बड़ा बोझ उठाना पड़ रहा है। इसलिए तत्काल हिंसा में कमी, मानवीय सहायता की सुरक्षित पहुंच और संभावित युद्ध अपराधों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता होनी चाहिए।