हैदराबाद में राज्य मुख्य सूचना आयुक्तों का राष्ट्रीय सम्मेलन, RTI के प्रभावी क्रियान्वयन और लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण पर जोर
सुदाम चरण साहू
राज्य ब्यूरो चीफ ओडिशा
हैदराबाद/भुवनेश्वर, 17 सितंबर 2026।
देश में सूचना के अधिकार कानून यानी RTI Act को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से हैदराबाद में राज्य मुख्य सूचना आयुक्तों का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों की सूचना आयोगों के कामकाज, लंबित अपीलों एवं शिकायतों के निस्तारण, पारदर्शिता बढ़ाने और आम नागरिकों के लिए सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
सम्मेलन का उद्घाटन तेलंगाना के राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ल ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय सूचना आयुक्त ने की। ओडिशा की ओर से राज्य मुख्य सूचना आयुक्त श्री मनोज परिदा ने सम्मेलन में हिस्सा लिया और राज्य में सूचना के अधिकार से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए अपनाए जा रहे उपायों की जानकारी साझा की।

लंबित मामलों को कम करने पर विशेष चर्चा
सम्मेलन में सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक विभिन्न राज्य सूचना आयोगों में लंबित मामलों की संख्या को कम करना रहा। प्रतिभागियों ने अलग-अलग राज्यों में अपनाई जा रही प्रक्रियाओं और सफल प्रयोगों को साझा किया। उद्देश्य यह था कि अपील और शिकायतों के निपटारे में अनावश्यक देरी को कम किया जाए तथा सूचना मांगने वाले नागरिकों को समयबद्ध तरीके से राहत मिल सके।
प्रतिभागियों ने माना कि सूचना आयोगों में मामलों का लंबा लंबित रहना RTI व्यवस्था की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सुनवाई की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने, अनावश्यक स्थगन से बचने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
ओडिशा मॉडल में संक्षिप्त सुनवाई और कम स्थगन पर जोर
ओडिशा के राज्य मुख्य सूचना आयुक्त श्री मनोज परिदा ने राज्य में लंबित मामलों को कम करने के लिए अपनाए गए विभिन्न उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मामलों की सुनवाई में संक्षिप्त प्रक्रिया (Summary Trial) को अपनाना और अनावश्यक स्थगन से बचना मामलों के तेजी से निस्तारण में सहायक रहा है।
उनके अनुसार, यदि सुनवाई को जरूरत के मुताबिक सीमित और केंद्रित रखा जाए तथा बार-बार तारीख बढ़ाने की प्रवृत्ति को कम किया जाए तो आयोग के सामने आने वाले मामलों का निपटारा अपेक्षाकृत कम समय में किया जा सकता है। ओडिशा के अनुभव को सम्मेलन में सूचना आयोगों के बीच अनुभव साझा करने के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
महाराष्ट्र में RTI नियमों में बदलाव का उल्लेख
सम्मेलन में महाराष्ट्र के मुख्य सूचना आयुक्त ने राज्य सरकार की ओर से RTI नियमों में किए गए संशोधनों के बारे में जानकारी दी। संशोधित प्रावधानों के तहत RTI आवेदन को एक विषय तक सीमित रखने तथा आवेदन की शब्द सीमा अधिकतम 150 शब्द निर्धारित किए जाने की जानकारी साझा की गई।
इस व्यवस्था को लेकर सम्मेलन में सूचना आवेदन की संरचना और प्रशासनिक प्रक्रिया पर चर्चा हुई। एक ही विषय पर केंद्रित आवेदन होने से संबंधित विभाग के लिए मांगी गई सूचना की पहचान और उस पर कार्रवाई करना अधिक व्यवस्थित हो सकता है। हालांकि, ऐसे नियमों के व्यावहारिक प्रभाव और नागरिकों की सूचना तक पहुंच के संदर्भ में विभिन्न पहलुओं पर विचार करना भी आवश्यक बताया गया।

RTI के दुरुपयोग और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन
सम्मेलन में RTI कानून के इस्तेमाल को लेकर एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा भी सामने आया। प्रतिभागियों ने कहा कि सूचना का अधिकार आम नागरिकों को शासन और प्रशासन से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम प्रदान करता है। इसलिए इसके उपयोग को आसान बनाने और नागरिकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने की जरूरत है।
साथ ही, सम्मेलन में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कुछ मामलों में कानून के दुरुपयोग की आशंका को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है। प्रतिभागियों ने इस विषय पर संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि एक ओर सूचना मांगने वाले सामान्य नागरिकों को परेशानी न हो और दूसरी ओर व्यवस्था के अनुचित इस्तेमाल से उत्पन्न होने वाली प्रशासनिक कठिनाइयों को भी कम किया जा सके।
सरकारी वेबसाइटों पर स्वतः सूचना उपलब्ध कराने की अपील
केंद्रीय सूचना आयुक्तों ने राज्य सरकारों और विभिन्न सरकारी विभागों से स्वप्रेरित सूचना प्रकटीकरण (Suo Motu Disclosure) को बढ़ाने का आग्रह किया। उनका कहना था कि जिन जानकारियों को सार्वजनिक किया जा सकता है, उन्हें विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों पर नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
यदि सरकारी विभाग महत्वपूर्ण सूचनाएं पहले से ही ऑनलाइन उपलब्ध कराते हैं तो नागरिकों को उन जानकारियों के लिए अलग से RTI आवेदन करने की आवश्यकता कम हो सकती है। इससे एक तरफ आम लोगों को आसानी से सूचना मिल सकती है और दूसरी तरफ सूचना आयोगों पर आने वाले मामलों का दबाव भी घटाया जा सकता है।
इस संदर्भ में विभागीय वेबसाइटों को नियमित रूप से अपडेट रखने और नागरिकों के लिए जरूरी सूचनाओं को स्पष्ट एवं आसानी से उपलब्ध प्रारूप में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
सूचना आयोगों में पर्याप्त संसाधनों की जरूरत
सम्मेलन के दौरान राज्य सूचना आयोगों के कामकाज के लिए पर्याप्त कर्मचारियों और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता का मुद्दा भी उठाया गया। प्रतिभागियों ने कहा कि मामलों के प्रभावी निस्तारण के लिए केवल कानूनी और प्रक्रियात्मक सुधार पर्याप्त नहीं हैं। आयोगों को पर्याप्त मानव संसाधन, तकनीकी सुविधाएं और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराना जरूरी है।
सूचना आयोगों में कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या होने से मामलों की फाइलिंग, दस्तावेजों की जांच, सुनवाई की तैयारी और आदेशों से संबंधित कार्यों को अधिक व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा सकता है।
व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून और RTI पर चर्चा
सम्मेलन में नए व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून के RTI Act पर संभावित प्रभावों को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। सूचना के अधिकार और व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता से जुड़े प्रावधानों के बीच संतुलन बनाए रखना मौजूदा समय की महत्वपूर्ण प्रशासनिक और कानूनी चुनौती के रूप में सामने आया।
प्रतिभागियों ने इस बात की आवश्यकता जताई कि RTI से संबंधित मामलों को देखने वाले अधिकारियों को नए कानूनी प्रावधानों की पर्याप्त जानकारी हो। विशेष रूप से निचले स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण आयोजित करने पर जोर दिया गया, ताकि वे सूचना मांगों का परीक्षण करते समय संबंधित कानूनों और नियमों को सही तरीके से लागू कर सकें।
जमीनी स्तर के अधिकारियों का प्रशिक्षण जरूरी
सम्मेलन में यह भी रेखांकित किया गया कि RTI व्यवस्था की सफलता काफी हद तक उन अधिकारियों पर निर्भर करती है जो सीधे नागरिकों के आवेदन और सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया से जुड़े होते हैं। इसलिए अधिकारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण देने, नए नियमों से परिचित कराने और सूचना अधिकार से संबंधित प्रक्रियाओं की व्यावहारिक समझ विकसित करने की आवश्यकता बताई गई।
नियमित प्रशिक्षण से अधिकारियों को सूचना उपलब्ध कराने, अपवादों की पहचान करने और संबंधित कानूनी प्रावधानों को समझने में मदद मिल सकती है।
पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल व्यवस्था बनाने का प्रयास
हैदराबाद में आयोजित यह सम्मेलन राज्य सूचना आयोगों के बीच अनुभव और कार्यप्रणाली साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बना। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने लंबित मामलों को कम करने, सुनवाई प्रक्रिया को तेज करने, सरकारी सूचनाओं को अधिक पारदर्शी बनाने और RTI व्यवस्था को नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने से जुड़े उपायों पर विचार-विमर्श किया।
सम्मेलन में सामने आए सुझावों का व्यापक उद्देश्य सूचना के अधिकार कानून के मूल भाव—पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों की सूचना तक पहुंच—को मजबूत करना रहा। साथ ही, बदलते कानूनी और तकनीकी वातावरण में सूचना आयोगों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
राज्य सूचना आयोगों के बीच इस प्रकार का संवाद भविष्य में अलग-अलग राज्यों के सफल प्रयोगों को साझा करने और उन्हें स्थानीय जरूरतों के अनुरूप अपनाने का अवसर प्रदान कर सकता है। सम्मेलन में हुई चर्चाओं से यह संदेश सामने आया कि RTI व्यवस्था को मजबूत करने के लिए त्वरित निस्तारण के साथ-साथ स्वप्रेरित सूचना प्रकटीकरण, पर्याप्त संसाधन, अधिकारियों का प्रशिक्षण और नागरिकों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा—इन सभी पहलुओं पर एक साथ काम करना आवश्यक है।