दिल्ली में DTC बस चालकों की हड़ताल से सार्वजनिक परिवहन प्रभावित, हजारों यात्री परेशान
नई दिल्ली, 18 सितंबर 2026: दिल्ली में दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के बस चालकों और परिचालकों की हड़ताल का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को यह आंदोलन चौथे दिन में प्रवेश कर गया। हड़ताल के कारण राजधानी के कई इलाकों में बस सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं और बड़ी संख्या में यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 3,000 से अधिक बसें सड़कों से बाहर रहने की वजह से कई प्रमुख बस स्टॉप पर यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।

बस सेवाएं प्रभावित, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें
DTC बसें दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। रोजाना बड़ी संख्या में विद्यार्थी, कर्मचारी, मजदूर और अन्य यात्री बसों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में लगातार चल रही हड़ताल का असर सामान्य जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है।
कई स्थानों पर यात्रियों को बस के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। बसों की संख्या कम होने के कारण लोगों ने मेट्रो, ऑटो, ई-रिक्शा और कैब जैसे विकल्पों का सहारा लिया। कुछ यात्रियों के लिए इससे यात्रा का खर्च भी बढ़ गया है। रिपोर्टों में वैकल्पिक परिवहन साधनों के लिए अधिक किराया मांगे जाने की शिकायतों का उल्लेख किया गया है।
हड़ताल का असर बाहरी दिल्ली से लेकर मध्य दिल्ली तक कई इलाकों में दिखाई दिया। रानी खेड़ा, राजघाट, नेहरू प्लेस, बुराड़ी, वजीरपुर, घुम्मनहेड़ा और सरिता विहार सहित विभिन्न डिपो से कर्मचारियों के प्रदर्शन में शामिल होने की खबर सामने आई है।
छात्रों और कामकाजी लोगों पर भी असर
सार्वजनिक बसों की उपलब्धता कम होने से सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जो रोजाना बस से अपने स्कूल, कॉलेज या कार्यस्थल तक पहुंचते हैं। कम आय वाले यात्रियों के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वैकल्पिक साधनों का लगातार इस्तेमाल यात्रा के खर्च को बढ़ा सकता है।
दैनिक मजदूरी पर काम करने वाले लोगों के लिए समय पर काम की जगह पहुंचना महत्वपूर्ण होता है। बसों की कमी के कारण उन्हें अतिरिक्त समय यात्रा में लगाना पड़ रहा है। इसी तरह कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों को भी अपनी यात्रा की योजना बदलनी पड़ रही है।
चिकित्सा संबंधी जरूरतों वाले यात्रियों के लिए भी सार्वजनिक परिवहन की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। रिपोर्टों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए यात्रा करने वाले लोगों को अतिरिक्त परेशानी होने की बात सामने आई है। दिल्ली एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी पर भी हड़ताल का प्रभाव पड़ने की सूचना दी गई है।
क्या हैं DTC कर्मचारियों की प्रमुख मांगें?
हड़ताल कर रहे कर्मचारियों का मुख्य मुद्दा वेतन और सेवा सुविधाओं से जुड़ा हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक वर्तमान दैनिक भुगतान करीब 862 रुपये बताया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा आय में घर के खर्च, आने-जाने की लागत और अन्य जरूरी जिम्मेदारियां पूरी करना कठिन हो रहा है।
कर्मचारी संगठन की प्रमुख मांगों में दैनिक पारिश्रमिक बढ़ाकर 2,000 रुपये करना शामिल है। इसके अलावा वार्षिक बोनस, सरकारी छुट्टियों में काम करने का भुगतान, चिकित्सा सुविधा, बीमा, अवकाश और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित सुविधाओं की भी मांग की जा रही है।
यूनियन की ओर से यह भी कहा गया है कि महंगाई भत्ते में लंबे समय से अपेक्षित संशोधन नहीं हुआ है और वेतन वृद्धि से संबंधित कुछ मुद्दे भी लंबित हैं। कर्मचारियों का कहना है कि बस संचालन जैसी जिम्मेदारी वाले काम में वर्तमान भुगतान और सेवा शर्तों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
सरकार ने बातचीत से समाधान निकालने की बात कही
दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने की अपील की है। सरकार का कहना है कि कर्मचारियों की कई मांगों पर सहमति बनी है, जबकि वेतन वृद्धि का मुद्दा अभी पूरी तरह हल नहीं हुआ है।
सरकार के अनुसार चिकित्सा बीमा सहित कुछ सुविधाओं को लेकर रियायतों पर सहमति बनी है। परिवार के सदस्यों के लिए कवरेज और अन्य सेवा सुविधाओं पर भी चर्चा की गई है। वेतन वृद्धि के प्रस्ताव को श्रम विभाग के साथ विचार-विमर्श के लिए आगे बढ़ाने की बात कही गई है।
हालांकि, कर्मचारी संगठन और सरकार के दावों में अंतर दिखाई दे रहा है। यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा है कि बातचीत के बावजूद उनकी मुख्य मांगों का ठोस समाधान नहीं हुआ है। इसी कारण कर्मचारियों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है।
यात्रियों के लिए मेट्रो बनी वैकल्पिक व्यवस्था
DTC बसों की कमी के बीच दिल्ली मेट्रो पर यात्रियों का दबाव बढ़ा है। हड़ताल के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए मेट्रो सेवाओं में अतिरिक्त फेरे चलाए जाने की जानकारी सामने आई है। दूसरे दिन दिल्ली मेट्रो ने व्यस्त समय में अतिरिक्त ट्रेन यात्राओं की व्यवस्था की थी।
हालांकि, दिल्ली जैसे बड़े शहर में बस और मेट्रो की सेवाएं हर इलाके में समान रूप से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में जिन क्षेत्रों में मेट्रो स्टेशन दूर हैं, वहां रहने वाले लोगों के लिए ऑटो और ई-रिक्शा जैसे साधन महत्वपूर्ण विकल्प बन गए हैं।
किराया बढ़ने की शिकायतों से बढ़ी परेशानी
बस सेवा बाधित होने के कारण वैकल्पिक परिवहन की मांग बढ़ने से यात्रियों को अधिक किराया देने की शिकायतें भी सामने आई हैं। जिन लोगों की रोजाना आय सीमित है, उनके लिए अतिरिक्त परिवहन खर्च आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है।
खास तौर पर रोजाना कार्यालय या शिक्षण संस्थान जाने वाले यात्रियों को कई दिनों तक अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। इस कारण यात्री चाहते हैं कि बस सेवाएं जल्द सामान्य हों और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पहले की तरह संचालित हो।
विवाद का केंद्र बना वेतन का सवाल
मौजूदा स्थिति में सरकार और कर्मचारी संगठन के बीच सबसे बड़ा मतभेद दैनिक वेतन बढ़ाने को लेकर दिखाई दे रहा है। सरकार का कहना है कि अधिकांश मांगों पर काम आगे बढ़ाया गया है और वेतन के मुद्दे पर संबंधित विभाग से विचार-विमर्श किया जा रहा है। वहीं कर्मचारी तत्काल और स्पष्ट समाधान की मांग कर रहे हैं।
इस अंतर के कारण बातचीत के बावजूद हड़ताल समाप्त नहीं हुई है। शुक्रवार को भी कई डिपो में बसों के खड़े रहने और कर्मचारियों के प्रदर्शन जारी रहने की रिपोर्ट सामने आई।
समाधान पर टिकी दिल्ली की नजर
DTC हड़ताल अब केवल कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच वेतन विवाद तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर लाखों यात्रियों की दैनिक आवाजाही पर पड़ रहा है। बस सेवाओं के लंबे समय तक बाधित रहने से सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता, यात्रियों के खर्च और यात्रा समय—तीनों पर प्रभाव पड़ रहा है।
फिलहाल सभी की नजर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर है। यदि वेतन और अन्य लंबित मांगों पर सहमति बनती है तो बस सेवाओं के सामान्य होने का रास्ता साफ हो सकता है। दूसरी ओर, समाधान में देरी होने पर यात्रियों की परेशानी और सार्वजनिक परिवहन पर दबाव आगे भी बना रह सकता है।
नोट: वेतन और अन्य मांगों को लेकर सरकार तथा यूनियन के बयानों में अंतर है; इसलिए दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग रूप में प्रस्तुत किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 18 सितंबर 2026 को हड़ताल चौथे दिन भी जारी थी।