DUSU चुनाव 2026 पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, 140 उम्मीदवारों को नोटिस और जुलूस पर रोक

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नई दिल्ली, 18 सितंबर 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनावी गतिविधियों में नियमों के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत के सामने चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर लिंगदोह समिति की सिफारिशों और निर्धारित चुनावी नियमों के उल्लंघन से जुड़ी चिंताएं रखी गईं। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि छात्र चुनाव में भाग लेना किसी उम्मीदवार को निर्धारित नियमों से छूट नहीं देता।

मामले की सुनवाई के दौरान करीब 140 छात्र उम्मीदवारों को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई। अदालत ने संकेत दिया कि यदि चुनावी नियमों का बार-बार उल्लंघन किया जाता है तो संबंधित लोगों पर आर्थिक दंड यानी लागत लगाए जाने की कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट के इस रुख को छात्र संघ चुनाव में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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लिंगदोह समिति के नियमों पर जोर

विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव को लेकर लिंगदोह समिति की सिफारिशों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को अपेक्षाकृत सरल, पारदर्शी और अनुशासित बनाए रखना है। इन सिफारिशों में चुनाव प्रचार, खर्च, उम्मीदवारों के आचरण और चुनावी गतिविधियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं को लेकर दिशानिर्देश दिए गए हैं।

DUSU चुनाव को लेकर हुई सुनवाई में इन्हीं नियमों के पालन का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। अदालत ने चुनाव में शामिल छात्र संगठनों और उम्मीदवारों को नियमों की सीमाओं के भीतर रहने का संदेश दिया। कोर्ट की चिंता खास तौर पर उन गतिविधियों को लेकर दिखाई दी, जिनसे चुनावी प्रक्रिया का स्वरूप प्रभावित हो सकता है या विश्वविद्यालय परिसर में कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है।

जीत के बाद जुलूस निकालने पर भी सख्ती

अदालत ने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद विजय जुलूस निकालने या किसी तरह की अशांति पैदा करने से रोकने पर भी जोर दिया है। उम्मीदवारों और उनके समर्थकों को निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है।

कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन होने पर संबंधित उम्मीदवार के खिलाफ गंभीर कार्रवाई की स्थिति बन सकती है। सुनवाई में यह बात सामने आई कि नियम तोड़ने की स्थिति में नामांकन रद्द करने या अदालत की अवमानना से जुड़ी कार्रवाई जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

इस निर्देश का उद्देश्य चुनाव परिणाम आने के बाद संभावित भीड़, नारेबाजी, जुलूस या अन्य ऐसी गतिविधियों को नियंत्रित करना है, जिनसे विश्वविद्यालय परिसर अथवा आसपास के क्षेत्र में कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

प्रचार में महंगी गाड़ियों और बाहुबल पर सवाल

सुनवाई के दौरान पीठ ने चुनाव प्रचार के तौर-तरीकों को लेकर भी चिंता जताई। अदालत की ओर से बाहुबल और लग्जरी कारों के इस्तेमाल से जुड़े सवाल उठाए गए। कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि क्या चुनाव में दिखाई देने वाले सभी लोग वास्तव में विश्वविद्यालय के छात्र हैं।

यह सवाल छात्र राजनीति में बाहरी प्रभाव और संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़े व्यापक मुद्दे की ओर इशारा करता है। छात्र संघ चुनावों का उद्देश्य विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं और विचारों को प्रतिनिधित्व देने का अवसर उपलब्ध कराना है। ऐसे में चुनावी गतिविधियों में अत्यधिक धनबल, बाहरी लोगों की मौजूदगी या प्रभावशाली साधनों के इस्तेमाल को लेकर उठने वाली शिकायतें चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकती हैं।

हालांकि, किसी व्यक्ति के छात्र होने या चुनावी नियमों के उल्लंघन का अंतिम निर्धारण संबंधित दस्तावेजों, जांच और अदालत के समक्ष रखे गए तथ्यों के आधार पर ही किया जाएगा।

पुलिस को कार्रवाई में नरमी नहीं बरतने का निर्देश

मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर भी अदालत ने स्पष्ट रुख अपनाया। पुलिस को यह निर्देश दिया गया कि केवल इस आधार पर किसी व्यक्ति के साथ नरमी न बरती जाए कि वह छात्र है। यदि कोई व्यक्ति कानून या अदालत के निर्देशों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

हाल के दिनों में लॉ फैकल्टी से जुड़े कुछ घटनाक्रमों का भी सुनवाई के दौरान संदर्भ सामने आया। अदालत ने पुलिस से ऐसे मामलों में सतर्क रहने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा।

अदालत के रुख से यह संदेश गया कि विश्वविद्यालय परिसर में होने वाली गतिविधियों पर भी सामान्य कानूनी प्रावधान लागू होते हैं। छात्र होना अपने आप में किसी व्यक्ति को कानून या न्यायालय के आदेशों से अलग नहीं करता।

चुनाव प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी

इन न्यायिक निर्देशों के बीच DUSU चुनाव 2026 के लिए मतदान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहने की जानकारी है। चुनाव में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपने प्रतिनिधियों का चयन करने के लिए मतदान प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं।

चुनावी प्रक्रिया में उम्मीदवारों और छात्र संगठनों की गतिविधियों पर अब अदालत के निर्देशों की भी निगरानी रहेगी। खास तौर पर मतदान और परिणामों के बीच तथा परिणाम घोषित होने के बाद किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि से बचने की जरूरत होगी, जो न्यायालय के आदेशों के विपरीत हो।

परिणाम घोषित होने के बाद जीतने वाले उम्मीदवारों और उनके समर्थकों के लिए भी अदालत के निर्देश महत्वपूर्ण रहेंगे। विजय समारोह या जुलूस के नाम पर ऐसी गतिविधि नहीं की जा सकती जिससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो या अदालत के आदेश की अवहेलना हो।

अगली सुनवाई 6 नवंबर को

मामले में अदालत ने संबंधित छात्र संगठनों और उम्मीदवारों से जवाब मांगा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अगली सुनवाई 6 नवंबर को निर्धारित की गई है। उस दौरान संबंधित पक्षों की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाबों और अदालत के निर्देशों के अनुपालन की स्थिति पर विचार किया जाएगा।

करीब 140 उम्मीदवारों को नोटिस जारी होने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित छात्र संगठन और उम्मीदवार अदालत के सामने क्या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करते हैं। न्यायालय इन जवाबों के आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय ले सकता है।

छात्र राजनीति में नियमों के पालन पर बढ़ा ध्यान

DUSU चुनाव देश के प्रमुख विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनावों में शामिल है और इसका राजनीतिक तथा सामाजिक महत्व भी देखा जाता है। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया के दौरान नियमों का पालन केवल विश्वविद्यालय प्रशासन का विषय नहीं रह जाता, बल्कि यह कानून-व्यवस्था और न्यायिक निगरानी से भी जुड़ सकता है।

दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई से यह स्पष्ट हुआ कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और उनके समर्थकों को प्रचार तथा परिणाम के बाद की गतिविधियों में निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। अदालत ने बाहरी प्रभाव, संसाधनों के असामान्य इस्तेमाल, अनुशासनहीनता और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया है।

फिलहाल मतदान प्रक्रिया जारी है और आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के जवाब तथा अदालत की अगली सुनवाई पर निर्भर करेगी। 6 नवंबर की सुनवाई में मामले से जुड़े जवाबों और चुनावी नियमों के पालन को लेकर आगे की दिशा स्पष्ट होने की संभावना है।

इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य केंद्र छात्र चुनाव को रोकना नहीं, बल्कि निर्धारित नियमों और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप चुनावी गतिविधियों को संचालित करना है। उम्मीदवारों, छात्र संगठनों, समर्थकों और प्रशासन—सभी के लिए अदालत के निर्देश आने वाले चरण में महत्वपूर्ण रहेंगे।

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