चित्रकूट के मऊ ब्लॉक स्थित टीएचआर सेंटर को लेकर शिकायत, महिलाओं को काम से वंचित करने और खाद्य सामग्री की बिक्री के आरोप
रिपोर्ट: पंकज त्रिपाठी, तहसील संवाददाता
प्रकाशन: हिट एंड हॉट न्यूज़
स्थान: मऊ, जनपद चित्रकूट, उत्तर प्रदेश
दिनांक: 18 सितंबर 2026
चित्रकूट। जिले के मऊ ब्लॉक अंतर्गत संचालित टीएचआर (टेक होम राशन) सेंटर को लेकर एक लिखित शिकायत सामने आई है। शिकायत में सेंटर के संचालन, खाद्य सामग्री के वितरण, स्थानीय महिला समूहों की भागीदारी और कुछ लोगों की नियुक्ति को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आवेदन में संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों पर मनमाने तरीके से कार्य करने तथा सरकारी व्यवस्था के विपरीत गतिविधियां संचालित किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
शिकायतकर्ता की ओर से अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है। आवेदन में विशेष रूप से स्थानीय महिलाओं को कार्य से जोड़ने के बजाय बाहरी लोगों के माध्यम से व्यवस्था संचालित किए जाने पर आपत्ति जताई गई है।

स्थानीय महिलाओं को अवसर नहीं देने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि क्षेत्र के कई गांवों में महिलाओं के समूह सरकारी योजनाओं और सामुदायिक गतिविधियों से जुड़कर काम करने के इच्छुक हैं। इनमें बम्हौरी, बरसड़ा, नावस्ता, छिवलहा, छिवली, बालापुर सहित अन्य गांवों का उल्लेख किया गया है।
आवेदन के अनुसार, इन गांवों की महिलाओं को उनके क्षेत्र में उपलब्ध कार्यों में भागीदारी का अवसर मिलना चाहिए, लेकिन आरोप है कि कुछ मामलों में स्थानीय महिलाओं की जगह बाहरी लोगों को जिम्मेदारी दी जा रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे स्थानीय समूहों को रोजगार और आजीविका से जुड़ने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया है कि जिस ग्राम सभा की जमीन पर सेंटर संचालित होने की बात कही गई है, वहां स्थानीय लोगों और विशेष रूप से महिलाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी। आवेदनकर्ता ने अधिकारियों से इस पहलू की भी जांच करने का आग्रह किया है।
खाद्य सामग्री की बिक्री को लेकर लगाए गए आरोप
शिकायत में मऊ ब्लॉक के टीएचआर सेंटर में आने वाली पोषण सामग्री के कथित दुरुपयोग का भी उल्लेख किया गया है। आवेदन में दावा किया गया है कि केंद्र पर आने वाली सामग्री में चना दाल, मूंग दाल, चीनी, रिफाइंड, बेसन, दूध पाउडर, मूंगफली, नमक, पिसा मसाला, गेहूं, सूजी, दलिया और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं।
आवेदनकर्ता का आरोप है कि इन सामग्रियों के वितरण की निर्धारित व्यवस्था के बजाय कथित रूप से कुछ सामग्री की बिक्री की जाती है। शिकायत में कहा गया है कि यदि सरकारी आपूर्ति में आने वाली सामग्री का वास्तविक लाभार्थियों तक वितरण नहीं हो रहा है तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये बातें शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। इनके सही या गलत होने का निर्धारण संबंधित विभाग की जांच, अभिलेखों की पड़ताल और मौके पर सत्यापन के बाद ही किया जा सकता है।
अजय सिंह और जुम्मन मियां को लेकर भी शिकायत
आवेदन में सेंटर के प्रभारी के रूप में अजय सिंह का नाम और चौकीदार के रूप में जुम्मन मियां का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने दोनों की भूमिका को लेकर सवाल उठाते हुए मामले की जांच की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जुम्मन मियां के माध्यम से खाद्य सामग्री के विक्रय की बात सामने आती है और इस पूरी व्यवस्था में प्रभारी स्तर पर भी कथित सहभागिता की आशंका जताई गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि पूर्व में जुम्मन मियां वहां चौकीदार के रूप में कार्य कर चुके हैं।
आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि पहले वहां तैनात चौकीदार को हटाए जाने के बाद नई नियुक्ति की गई और इसके बाद सेंटर से संबंधित गतिविधियों में बदलाव देखने को मिला। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री से नहीं होती है, इसलिए संबंधित विभाग द्वारा दस्तावेजों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण होगी।
सरकारी नियमों के अनुरूप काम कराने की मांग
शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से मांग की है कि सेंटर के संचालन की पूरी प्रक्रिया को सरकारी नियमों के आधार पर जांचा जाए। इसमें खाद्य सामग्री की प्राप्ति, स्टॉक रजिस्टर, वितरण का रिकॉर्ड, लाभार्थियों की सूची, परिवहन व्यवस्था और संबंधित कर्मचारियों की नियुक्ति जैसे बिंदुओं की जांच शामिल की जा सकती है।
इसके साथ ही यह भी पता लगाए जाने की मांग की गई है कि सेंटर पर काम करने वाले लोगों की नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत हुई और क्या उसमें निर्धारित नियमों का पालन किया गया।
महिला समूहों की भागीदारी का मुद्दा
शिकायत का एक प्रमुख विषय स्थानीय महिला समूहों को कार्य का अवसर दिए जाने से जुड़ा है। आवेदन में कहा गया है कि गांवों की महिलाएं सरकारी योजनाओं से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहती हैं। ऐसे में यदि उन्हें ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कार्य से बाहर रखा जाता है तो इसका असर उनके रोजगार के अवसरों पर पड़ सकता है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ स्थानों पर बाहरी लोगों को काम से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जबकि स्थानीय महिलाओं के समूह मौजूद हैं। इसलिए प्रशासन से मांग की गई है कि ग्राम सभा स्तर पर उपलब्ध महिला समूहों की स्थिति और उनकी पात्रता की जांच की जाए तथा नियमों के अनुसार पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
रिकॉर्ड की जांच से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू सरकारी दस्तावेज और मौके पर उपलब्ध रिकॉर्ड हो सकते हैं। सेंटर को प्राप्त खाद्य सामग्री की मात्रा, वितरण का विवरण, स्टॉक रजिस्टर, लाभार्थियों के हस्ताक्षर अथवा अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि सामग्री वास्तव में निर्धारित लाभार्थियों तक पहुंची या नहीं।
इसी तरह नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि संबंधित लोगों को किस प्रक्रिया के तहत जिम्मेदारी दी गई। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रमाणित होते हैं तो विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई की स्थिति बन सकती है। वहीं, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
निष्पक्ष जांच की उठी मांग
शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोष पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचाने और स्थानीय महिला समूहों को नियमानुसार अवसर उपलब्ध कराने की अपील की गई है।
टीएचआर सेंटर जैसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य निर्धारित लाभार्थियों तक पोषण संबंधी सामग्री पहुंचाना है। इसलिए ऐसी शिकायतों के सामने आने पर पारदर्शिता बनाए रखना और रिकॉर्ड का सत्यापन करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
फिलहाल सामने आए आवेदन में लगाए गए आरोपों पर संबंधित विभाग या नामित व्यक्तियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। इसलिए मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जाना उचित होगा। यदि प्रशासन शिकायत के आधार पर जांच करता है तो सेंटर के संचालन, खाद्य सामग्री के वितरण और नियुक्तियों से जुड़े कई तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
निष्कर्ष: चित्रकूट के मऊ ब्लॉक स्थित टीएचआर सेंटर को लेकर सामने आई शिकायत ने सरकारी खाद्य सामग्री के वितरण, स्थानीय महिलाओं की भागीदारी और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सवाल खड़े किए हैं। अब निगाहें संबंधित विभाग की जांच पर रहेंगी, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आवेदन में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और नियमों के अनुसार सेंटर का संचालन किस प्रकार किया जा रहा है।