ओडिशा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का 43वां स्थापना दिवस, पर्यावरण संरक्षण के लिए नई तकनीकों पर जोर
सुदाम बाबू राज्य ब्यूरो ओडिशा
हिट एंड हॉट न्यूज़
भुवनेश्वर, 18 सितंबर 2026। ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शुक्रवार को अपना 43वां स्थापना दिवस भुवनेश्वर स्थित ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी (OUAT) के कृषि शिक्षा सदन में मनाया। कार्यक्रम में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन तथा श्रम एवं कर्मचारी राज्य बीमा मंत्री गणेश राम सिंखुंटिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह के दौरान पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को लेकर बोर्ड की आगामी प्राथमिकताओं को सामने रखा गया।
स्थापना दिवस समारोह में पर्यावरणीय निगरानी से जुड़े विभिन्न कार्यों, नई तकनीकी पहलों और जागरूकता कार्यक्रमों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में काम करने वाले संस्थानों और संगठनों को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।

43 वर्षों की पर्यावरणीय यात्रा पर मंत्री ने जताया संतोष
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री गणेश राम सिंखुंटिया ने कहा कि पिछले 43 वर्षों में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों को लगातार निभाया है। उन्होंने बोर्ड के इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, प्रशासनिक अधिकारियों और मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यावरण की स्थिति पर नजर रखने के लिए बोर्ड कई महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित कर रहा है। प्रमुख शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता की निगरानी, नदियों और अन्य जलस्रोतों के पानी की जांच, औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट की निगरानी तथा विभिन्न प्रकार के कचरे के उचित प्रबंधन से जुड़े कार्य इसमें शामिल हैं।
मंत्री के अनुसार, पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है। समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी से ही प्रदूषण को नियंत्रित करने और स्वस्थ वातावरण तैयार करने के प्रयासों को व्यापक बनाया जा सकता है।
युवाओं और जेनरेशन Z की भागीदारी पर जोर
समारोह में पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने में युवाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया। मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पर्यावरण संरक्षण तथा प्रदूषण नियंत्रण को दिए जा रहे महत्व का उल्लेख किया।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और जेनरेशन Z से पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने और रोजमर्रा की जिंदगी में पर्यावरण अनुकूल व्यवहार अपनाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि प्रदूषण कम करने के लिए लोगों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े छोटे-छोटे कदम भी सामूहिक रूप से बड़ा प्रभाव पैदा कर सकते हैं। कचरे का उचित निपटान, संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को कम करना इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।

चार जिलों में क्षेत्रीय कार्यालयों की नींव
स्थापना दिवस के अवसर पर ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कटक, कोरापुट, झारसुगुड़ा और संबलपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय भवनों के लिए आधारशिला रखे जाने का कार्यक्रम भी हुआ। यह प्रक्रिया वर्चुअल माध्यम से संपन्न की गई।
क्षेत्रीय कार्यालयों का विस्तार राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पर्यावरणीय निगरानी और प्रशासनिक गतिविधियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया। औद्योगिक गतिविधियों वाले क्षेत्रों में प्रदूषण की निगरानी तथा स्थानीय स्तर पर पर्यावरणीय मामलों से संबंधित कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में क्षेत्रीय संरचना की भूमिका अहम होती है।
ड्रोन और एआई तकनीक का शुभारंभ
समारोह में पर्यावरणीय निगरानी को तकनीकी रूप से मजबूत करने के लिए दो नई पहलों की शुरुआत भी की गई। इनमें ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और एआई चैटबॉट शामिल हैं।
ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल से ऐसे क्षेत्रों की निगरानी में मदद मिल सकती है, जहां पारंपरिक निरीक्षण के लिए अधिक समय और संसाधनों की जरूरत पड़ती है। दूसरी ओर, एआई आधारित चैटबॉट के जरिए पर्यावरण से संबंधित जानकारी और सेवाओं तक लोगों की पहुंच को आसान बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है।
इन तकनीकी पहलों से बोर्ड की निगरानी व्यवस्था में डिजिटल साधनों का उपयोग बढ़ने की संभावना है। इससे पर्यावरणीय गतिविधियों से संबंधित जानकारी के संकलन और प्रबंधन में भी सहायता मिल सकती है।

पर्यावरण जागरूकता से जुड़ी चार पुस्तकें जारी
कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चार प्रकाशनों का विमोचन किया गया। इनमें माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक पर आधारित जर्नल, बेहतर पर्यावरणीय प्रथाओं का संकलन, जल प्रदूषण पर कॉमिक बुक तथा विभिन्न हितधारकों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन हैंडबुक शामिल हैं।
इन प्रकाशनों के माध्यम से पर्यावरण से जुड़े जटिल विषयों को अलग-अलग वर्गों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक जैसे उभरते पर्यावरणीय मुद्दों पर जानकारी उपलब्ध कराना शोध और जागरूकता दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
वहीं, जल प्रदूषण पर तैयार कॉमिक बुक के माध्यम से पर्यावरणीय संदेश को सरल और रोचक तरीके से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है। ठोस कचरा प्रबंधन से संबंधित हैंडबुक हितधारकों को बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जारी की गई।
एनएएलसीओ के साथ फ्लाई ऐश प्रबंधन पर समझौता
समारोह के दौरान ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और NALCO Research and Technology Centre (NRTC), Gothapatna के बीच फ्लाई ऐश प्रबंधन को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान भी किया गया।
फ्लाई ऐश मुख्य रूप से ताप विद्युत उत्पादन से संबंधित गतिविधियों से निकलने वाला अवशेष है। इसके सुरक्षित और उपयोगी प्रबंधन को पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है। समझौते के माध्यम से फ्लाई ऐश प्रबंधन से जुड़े प्रयासों को संस्थागत सहयोग देने की दिशा में कदम उठाया गया है।
विभिन्न क्षेत्रों के संस्थानों को सम्मान
स्थापना दिवस कार्यक्रम में प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने वाले विभिन्न संगठनों को भी सम्मानित किया गया। उद्योग, खनन और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में काम करने वाली संस्थाओं को Environment Appreciation Certificates प्रदान किए गए।
इसके अलावा औद्योगिक टाउनशिप श्रेणी में बेहतर पर्यावरणीय प्रदर्शन करने वाली संस्था को Environment Excellence Award दिया गया। इन पुरस्कारों का उद्देश्य पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के निर्वहन और प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को प्रोत्साहित करना रहा।
अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ आयोजन
समारोह में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव भास्कर ज्योति शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स डॉ. के. मुरुगेसन, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. मनोज वी. नायर और OUAT के कुलपति प्रोफेसर प्रभात कुमार राउल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
43वें स्थापना दिवस का आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब औद्योगिक विकास, शहरीकरण और बढ़ती आबादी के बीच पर्यावरणीय निगरानी की आवश्यकता लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। कार्यक्रम में पारंपरिक निगरानी व्यवस्था के साथ ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों को जोड़ने पर विशेष जोर दिखाई दिया।
कुल मिलाकर, स्थापना दिवस समारोह में ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पिछले 43 वर्षों की भूमिका को रेखांकित करने के साथ भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को अधिक तकनीकी, व्यवस्थित और सहभागी बनाने की दिशा भी सामने रखी गई। सरकार, संस्थानों, उद्योगों और आम नागरिकों की संयुक्त भागीदारी को प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छ पर्यावरण के लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
