बौध में जिला स्तरीय बैंकिंग समीक्षा बैठक, कलेक्टर ने आर्थिक विकास में बैंकों की भूमिका पर दिया जोर

0

सुदाम बाबू राज्य ब्यूरो ओडिशा

हिट एंड हॉट न्यूज़

बौध, ओडिशा, 18 सितंबर 2026। जिले में बैंकिंग गतिविधियों को गति देने और आर्थिक विकास की योजनाओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से जिला परामर्शदात्री समिति (DCC) तथा जिला स्तरीय समीक्षा समिति (DLRC) की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बौध जिला कलेक्टर विभूति भूषण नायक ने की। इस दौरान जिले में बैंकों के कामकाज, ऋण वितरण, जमा राशि, अग्रिम ऋण तथा विभिन्न प्राथमिक और गैर-प्राथमिक क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। चर्चा का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग व्यवस्था को जिले की विकास आवश्यकताओं से जोड़ना और पात्र लोगों तथा उद्यमों तक वित्तीय सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना रहा।

लीड बैंक मैनेजर ने प्रस्तुत की बैंकिंग व्यवस्था की स्थिति

बैठक की शुरुआत लीड बैंक मैनेजर डॉन बॉस्को द्वारा उपस्थित अधिकारियों और बैंक प्रतिनिधियों के स्वागत के साथ हुई। उन्होंने बैठक के उद्देश्य और जिले में संचालित बैंकिंग गतिविधियों की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी दी। इसके बाद जिले में बैंकों की शाखाओं, एटीएम, जमा राशि और ऋण वितरण से संबंधित आंकड़े समिति के सामने रखे गए।

प्रस्तुत जानकारी के अनुसार बौध जिले में इस समय 23 बैंकों की कुल 57 शाखाएं संचालित हो रही हैं। इनमें राष्ट्रीयकृत बैंकों की 30 शाखाएं शामिल हैं, जबकि 5 शाखाएं सहकारी बैंकों की हैं। इसके अतिरिक्त जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में 51 एटीएम भी कार्यरत हैं। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।

4,600 करोड़ रुपये तक पहुंचा बैंकिंग कारोबार

बैठक में जिले की बैंकिंग अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 30 जून तक बौध जिले के बैंकों में कुल जमा राशि 2,425 करोड़ रुपये दर्ज की गई। इसी अवधि में बैंकों द्वारा दिया गया कुल अग्रिम ऋण 2,175 करोड़ रुपये रहा।

जमा और अग्रिम को मिलाकर जिले का कुल बैंकिंग कारोबार लगभग 4,600 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। बैठक में इन आंकड़ों को जिले की वित्तीय गतिविधियों के महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में देखा गया। साथ ही इस बात पर जोर दिया गया कि बैंकिंग क्षेत्र की वित्तीय क्षमता का इस्तेमाल जिले के विभिन्न आर्थिक और रोजगारपरक क्षेत्रों को आगे बढ़ाने में किया जाना चाहिए।

बैंक प्रबंधकों को निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के निर्देश

जिला कलेक्टर विभूति भूषण नायक ने बैठक में बैंक प्रबंधकों से कहा कि निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए प्रयासों में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बैंकिंग संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

कलेक्टर ने नए उद्यमों, उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों को आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उनके अनुसार, जब योग्य उद्यमियों और व्यवसायों को समय पर ऋण एवं अन्य बैंकिंग सुविधाएं मिलती हैं, तो स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है और रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।

उन्होंने बैंक अधिकारियों से योजनाओं के पात्र लाभार्थियों तक ऋण सुविधाएं पहुंचाने और ऋण वितरण की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

गैर-प्राथमिक क्षेत्र और MSME की होगी नियमित समीक्षा

बैठक में बैंकिंग क्षेत्र के प्रदर्शन की निगरानी से जुड़े एक महत्वपूर्ण बिंदु पर भी चर्चा हुई। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि भविष्य में होने वाली प्रत्येक DCC बैठक में गैर-प्राथमिक क्षेत्र (Non-Priority Sector) के प्रदर्शन की नियमित और विस्तृत समीक्षा की जाएगी।

इसके साथ ही MSME यानी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र की बैंकिंग गतिविधियों और प्रगति को भी समीक्षा के दायरे में रखा जाएगा। MSME क्षेत्र स्थानीय स्तर पर उद्यमिता, उत्पादन और रोजगार से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में इस क्षेत्र के लिए वित्तीय सहायता की उपलब्धता और बैंक ऋण की प्रगति पर नियमित निगरानी करने का निर्णय लिया गया।

CD Ratio को 75 प्रतिशत तक पहुंचाने पर जोर

कलेक्टर ने सभी बैंकों को न्यूनतम 75 प्रतिशत CD Ratio हासिल करने की दिशा में काम करने का निर्देश दिया। CD Ratio का उपयोग बैंक में जमा राशि की तुलना में दिए गए ऋण के स्तर को समझने के लिए किया जाता है। जिले में बैंकिंग संसाधनों का स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस अनुपात को महत्वपूर्ण माना गया।

उन्होंने बैंक अधिकारियों से कहा कि वे अपने निर्धारित लक्ष्यों की लगातार समीक्षा करें और जहां प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, वहां आवश्यक कदम उठाएं।

कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को वित्तीय सहयोग की आवश्यकता

बैठक में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों पर भी विशेष चर्चा हुई। कलेक्टर ने बैंकों से जिला प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन, पशुपालन तथा अन्य संबद्ध गतिविधियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग करने का आह्वान किया।

बौध जैसे जिले में कृषि और उससे जुड़े व्यवसाय बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका से जुड़े हैं। ऐसे में किसानों, छोटे व्यवसायियों और संबंधित गतिविधियों से जुड़े लोगों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने को विकास की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।

कलेक्टर ने कहा कि जिला प्रशासन और बैंकिंग संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल से सरकारी योजनाओं तथा वित्तीय सहायता कार्यक्रमों को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

विभिन्न विभागों और बैंकों के अधिकारियों ने रखे विचार

बैठक में जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा अलग-अलग बैंकों के अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान बैंकिंग क्षेत्र की प्रगति, ऋण वितरण, विकास योजनाओं और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

अधिकारियों ने जिले में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार और निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने से संबंधित विषयों पर भी चर्चा की। बैठक में यह संदेश प्रमुख रूप से सामने आया कि जिले के आर्थिक विकास के लिए प्रशासन और बैंकिंग संस्थानों के बीच निरंतर समन्वय आवश्यक है।

आर्थिक विकास में बैंकिंग क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका

बौध में आयोजित यह समीक्षा बैठक केवल बैंकिंग आंकड़ों की समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि जिले के व्यापक आर्थिक विकास से बैंकिंग व्यवस्था को जोड़ने पर भी केंद्रित रही। जमा राशि और ऋण वितरण के आंकड़ों के साथ-साथ MSME, कृषि और अन्य संबद्ध क्षेत्रों को वित्तीय सहायता देने पर जोर दिया गया।

प्रशासन की ओर से बैंकों से अपेक्षा की गई कि वे अपने निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के साथ-साथ जिले में नई आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में सहयोग करें। विशेष रूप से नए उद्यमों, छोटे व्यवसायों, कृषि आधारित गतिविधियों और स्थानीय उद्योगों को वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने पर ध्यान देने की बात कही गई।

बैठक के माध्यम से जिला प्रशासन ने बैंकिंग संस्थानों से विकास कार्यों में सक्रिय भागीदारी और बेहतर समन्वय की अपेक्षा जताई। आने वाले समय में DCC बैठकों में गैर-प्राथमिक क्षेत्र, MSME और CD Ratio जैसे संकेतकों की नियमित समीक्षा से बैंकिंग गतिविधियों की प्रगति पर निगरानी रखने की व्यवस्था को और मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

इस बैठक में हुई चर्चाओं से यह स्पष्ट हुआ कि बौध जिले में बैंकिंग क्षेत्र को आर्थिक विकास, उद्यमिता, कृषि और रोजगार से जोड़ने की दिशा में समन्वित प्रयासों पर जोर दिया जा रहा है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें