दांत निकलवाने के बाद करीब 22 दिन तक नहीं रुका रक्तस्राव, कानपुर में युवक की मौत; क्लीनिक पर शव रखकर परिजनों का हंगामा
अमरेश त्रिपाठी
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात
कानपुर देहात। रनिया क्षेत्र में दांत का इलाज कराने के बाद एक 22 वर्षीय युवक की मौत का मामला सामने आया है। मृतक के परिजनों का आरोप है कि रनिया स्थित एक डेंटल क्लीनिक में दांत निकालने के बाद उसका रक्तस्राव लगातार जारी रहा। करीब तीन सप्ताह तक समस्या बनी रहने के बाद युवक की हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे कानपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने युवक का शव संबंधित क्लीनिक पर रखकर हंगामा किया और मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की।

दांत में दर्द के बाद क्लीनिक पहुंचा था युवक
मिली जानकारी के अनुसार, मुबारकपुर लाटा गांव निवासी करन का 22 वर्षीय बेटा प्रभात दांत में दर्द की शिकायत से परेशान था। परिजनों के मुताबिक, इसी समस्या के इलाज के लिए वह 6 अगस्त को रनिया क्षेत्र स्थित एक डेंटल क्लीनिक पहुंचा था।
परिजनों का कहना है कि जांच के दौरान युवक के दांत में कीड़ा लगा होने की बात बताई गई। इसके बाद इलाज के दौरान संबंधित दांत को निकालने की प्रक्रिया की गई। परिवार के अनुसार, दांत निकाले जाने के बाद ही युवक के मुंह से रक्तस्राव शुरू हुआ, जो सामान्य तरीके से बंद नहीं हुआ।
कई दिनों तक जारी रहा रक्तस्राव
परिजनों के मुताबिक, दांत निकलवाने के बाद प्रभात को लगातार रक्तस्राव की समस्या बनी रही। परिवार का दावा है कि कई दिनों तक समस्या दूर नहीं हुई। शुरुआत में उन्हें उम्मीद थी कि उपचार के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी, लेकिन रक्तस्राव लंबे समय तक जारी रहने से उनकी चिंता बढ़ती गई।
परिजनों का कहना है कि लगभग 22 दिनों तक रक्तस्राव नहीं रुकने के बाद युवक की तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद परिवार उसे बेहतर उपचार के लिए कानपुर ले गया।
कानपुर में उपचार के दौरान मौत
परिजनों के अनुसार, प्रभात को गंभीर स्थिति में कानपुर के हैलेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज किया गया। परिवार का कहना है कि उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
युवक की मौत की सूचना गांव और परिजनों तक पहुंचते ही शोक का माहौल बन गया। परिवार ने दांत के उपचार के बाद उत्पन्न हुई परेशानी और उसके बाद हुई मौत को लेकर संबंधित क्लीनिक की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, युवक की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था, यह जांच और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। केवल परिजनों के आरोपों के आधार पर चिकित्सकीय लापरवाही का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
शव लेकर क्लीनिक पहुंचे परिजन
युवक की मौत के बाद आक्रोशित परिजन उसका शव लेकर रनिया स्थित संबंधित क्लीनिक पहुंच गए। वहां शव रखकर उन्होंने हंगामा किया और पूरे मामले की जांच की मांग उठाई।
परिजनों का कहना था कि दांत निकलवाने के बाद जिस तरह लंबे समय तक रक्तस्राव की समस्या बनी रही, उसकी गंभीरता को समझना जरूरी है। उन्होंने इलाज की प्रक्रिया, दांत निकालने के बाद दी गई चिकित्सकीय सलाह तथा बाद में युवक की बिगड़ती हालत को लेकर सवाल उठाए।
हंगामे की सूचना मिलने पर स्थानीय स्तर पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भी मामले की जानकारी दी गई। परिवार की ओर से मामले में कार्रवाई की मांग किए जाने की बात सामने आई है।
स्वास्थ्य व्यवस्था और निगरानी पर भी सवाल
इस घटना ने ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में संचालित होने वाले छोटे निजी क्लीनिकों तथा स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को लेकर भी चर्चा पैदा कर दी है। खासकर दंत चिकित्सा जैसी प्रक्रियाओं में प्रशिक्षित और अधिकृत चिकित्सक द्वारा उपचार, उचित जांच तथा उपचार के बाद मरीज की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
हालांकि, इस मामले में संबंधित व्यक्ति की योग्यता, क्लीनिक का पंजीकरण, उपचार के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया और युवक की मौत के चिकित्सकीय कारण से जुड़े तथ्यों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी चिकित्सक को झोलाछाप या दोषी बताना उचित नहीं होगा।
परिवार ने की जांच और कार्रवाई की मांग
मृतक के परिजनों ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
परिवार यह भी जानना चाहता है कि दांत निकालने के बाद लगातार रक्तस्राव क्यों होता रहा और समय रहते समस्या का उचित उपचार क्यों नहीं हो सका। युवक की मौत के बाद परिवार के सामने अब इन सवालों के जवाब पाने की मांग प्रमुख रूप से सामने आई है।
मेडिकल रिकॉर्ड से सामने आएंगे महत्वपूर्ण तथ्य
ऐसे मामलों में दांत निकालने के बाद रक्तस्राव के कई संभावित चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं। वास्तविक कारण निर्धारित करने के लिए मरीज के पुराने मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार से संबंधित दस्तावेज, इस्तेमाल की गई दवाओं, दांत निकालने की प्रक्रिया, बाद में किए गए उपचार और अस्पताल की रिपोर्ट की जांच आवश्यक होती है।
यदि प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच करता है तो संबंधित क्लीनिक के दस्तावेज और चिकित्सकीय योग्यता की भी जांच की जा सकती है। इसके साथ ही कानपुर में हुए उपचार के रिकॉर्ड से युवक की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
जांच के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर
रनिया क्षेत्र में सामने आया यह मामला फिलहाल परिजनों के आरोपों और युवक की मौत के घटनाक्रम पर आधारित है। युवक की मौत के पीछे दांत के उपचार की क्या भूमिका थी और क्या किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही हुई, इसका स्पष्ट निर्धारण जांच के बाद ही संभव होगा।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी चर्चा है कि छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को इलाज कराने से पहले चिकित्सक की योग्यता तथा क्लीनिक की वैधता के बारे में जानकारी रखनी चाहिए। वहीं स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी भी बनती है कि चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने वाले संस्थानों और चिकित्सकों की नियमानुसार निगरानी की जाए।
प्रभात की मौत से उसके परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजन घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग कर रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि स्वास्थ्य विभाग और संबंधित प्रशासन मामले में क्या कदम उठाते हैं और जांच में युवक की मौत का वास्तविक कारण क्या सामने आता है।