म्यूल बैंक अकाउंट रैकेट मामले में पांच दोषी, अदालत ने सुनाई तीन साल की सजा
ब्रह्मपुर, 19 सितंबर 2026। ओडिशा के गंजाम जिले में बैंक खातों के कथित दुरुपयोग और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला ऐसे बैंक खातों के इस्तेमाल से जुड़ा है, जिन्हें कथित तौर पर दूसरे लोगों के नाम पर खुलवाकर वित्तीय लेन-देन के लिए इस्तेमाल किया गया था। ऐसे खातों को आम तौर पर ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ कहा जाता है।
मामले की सुनवाई गंजाम जिले की खल्लिकोट जेएमएफसी अदालत में हुई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयान पर विचार करने के बाद पांचों आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 318(2)/3(5) के तहत दोषी माना। इसके बाद सभी को तीन-तीन वर्ष की जेल की सजा सुनाई गई।

पांच आरोपियों को अदालत ने ठहराया दोषी
पुलिस के अनुसार, इस मामले में दोषी ठहराए गए लोगों की पहचान सुशांत साहू, सुदाम पात्र, पवित्र साहू, बिमल कुमार साहू और प्रदीप दास के रूप में हुई है। अदालत के फैसले के बाद पांचों को तीन वर्ष के कारावास की सजा भुगतनी होगी।
पुलिस जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, इस पूरे मामले में युवाओं को आकर्षक लाभ का भरोसा देकर बैंक खाते खुलवाने के लिए तैयार किया जाता था। उन्हें कथित तौर पर मुफ्त यात्रा और आर्थिक फायदे जैसे प्रलोभन दिए जाते थे। इसके बाद उनके नाम पर खोले गए बैंक खातों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज और बैंकिंग साधन दूसरे लोगों के कब्जे में ले लिए जाते थे।
मुफ्त यात्रा और आर्थिक लाभ का दिया गया कथित लालच
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने युवाओं को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि बैंक खाता उपलब्ध कराने के बदले उन्हें यात्रा की सुविधा या आर्थिक लाभ मिल सकता है। इस तरह कुछ लोगों को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए राजी किया गया।
खाता खुलने के बाद कथित तौर पर खाताधारकों से एटीएम कार्ड, पासबुक और अन्य व्यक्तिगत दस्तावेज ले लिए जाते थे। इसके बाद संबंधित बैंक खातों का उपयोग वित्तीय लेन-देन के लिए किया जाता था।
पुलिस ने जांच में इन खातों को कथित ‘म्यूल अकाउंट’ के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की बात सामने रखी। ऐसे बैंक खाते अक्सर किसी अन्य व्यक्ति या समूह द्वारा वित्तीय लेन-देन करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, जबकि खाते का वास्तविक नाम किसी दूसरे व्यक्ति का होता है।
बेगुनियापाड़ा थाने में दर्ज हुआ था मामला
इस प्रकरण की शुरुआत बेगुनियापाड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले से हुई। शिकायत और जांच के आधार पर पुलिस ने बैंक खातों के जरिए किए गए कथित संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की पड़ताल शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने अलग-अलग बैंकों से संबंधित बैंक खातों और उनमें हुए लेन-देन का विवरण हासिल किया। इसके माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि किन खातों का इस्तेमाल हुआ और उनसे किस प्रकार की वित्तीय गतिविधियां की गईं।
पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती उन खातों और दस्तावेजों के बीच संबंध स्थापित करना था, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर वित्तीय गतिविधियों के लिए किया गया था। जांच अधिकारियों ने बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को एकत्र किया।
मोबाइल और बैंकिंग दस्तावेज भी किए गए जब्त
जांच के दौरान पुलिस ने कई महत्वपूर्ण वस्तुओं को अपने कब्जे में लिया। इनमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, चेक बुक और होटल बिल शामिल बताए गए हैं।
इन वस्तुओं को जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर देखा गया। डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग दस्तावेजों की मदद से कथित वित्तीय गतिविधियों तथा आरोपियों के बीच संबंधों की जांच की गई।
पुलिस ने विभिन्न बैंकों से प्राप्त जानकारी को भी जांच का हिस्सा बनाया। बैंक खातों में हुए लेन-देन की पड़ताल के जरिए मामले की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया गया।
नौ गवाहों के बयान पर अदालत ने किया विचार
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों पर विचार किया। सुनवाई के क्रम में नौ गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
गवाहों के बयान के साथ पुलिस द्वारा जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजी और अन्य साक्ष्यों को भी अदालत के सामने रखा गया। इन सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने पांचों आरोपियों को संबंधित धाराओं के तहत दोषी माना।
अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने इसे म्यूल बैंक खातों के दुरुपयोग और वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई के रूप में बताया।
पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने की दी सलाह
इस मामले के बाद ओडिशा पुलिस ने बैंक खातों के दुरुपयोग को लेकर लोगों से सावधानी बरतने की अपील दोहराई है। पुलिस का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को आर्थिक लाभ, नौकरी, मुफ्त यात्रा या किसी अन्य लालच के आधार पर अपना बैंक खाता दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए नहीं देना चाहिए।
बैंक खाता व्यक्तिगत वित्तीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यदि किसी व्यक्ति के खाते का इस्तेमाल किसी संदिग्ध लेन-देन में किया जाता है, तो खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है। इसलिए बैंक खाते से जुड़े एटीएम कार्ड, पासबुक, चेक बुक, पिन, ओटीपी या अन्य संवेदनशील जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को देना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
म्यूल अकाउंट के जरिए कैसे बढ़ता है वित्तीय अपराध
म्यूल बैंक अकाउंट का इस्तेमाल वित्तीय अपराधों में इसलिए किया जाता है क्योंकि इसमें लेन-देन किसी ऐसे व्यक्ति के बैंक खाते से होता है, जिसके नाम पर खाता पंजीकृत है। अपराध में शामिल लोग कथित तौर पर ऐसे खातों का उपयोग धन के हस्तांतरण और अन्य वित्तीय गतिविधियों के लिए कर सकते हैं।
युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को छोटे आर्थिक लाभ का लालच देकर बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए तैयार किए जाने की शिकायतें विभिन्न मामलों में सामने आती रही हैं। कई बार खाताधारक यह समझ नहीं पाते कि उनके बैंक खाते का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है।
इसलिए बैंक खाते को किसी दूसरे व्यक्ति के कहने पर इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
पुलिस ने कार्रवाई जारी रखने की बात कही
मामले की जांच बेगुनियापाड़ा पुलिस ने पुरुषोत्तमपुर एसडीपीओ एस.के. नायक की निगरानी में की। जांच के दौरान बैंकिंग रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन और जब्त की गई सामग्री को साक्ष्यों के रूप में शामिल किया गया।
ओडिशा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बैंक खातों के कथित दुरुपयोग, म्यूल अकाउंट के जरिए होने वाले वित्तीय लेन-देन और धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल प्रत्यक्ष रूप से धोखाधड़ी करने वाले लोगों पर ही नहीं, बल्कि बैंक खातों को अपराध के लिए उपलब्ध कराने या नेटवर्क का हिस्सा बनने वाले लोगों के खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
खल्लिकोट अदालत का यह फैसला बैंक खातों के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया के महत्व को सामने लाता है। साथ ही यह उन लोगों के लिए भी चेतावनी है जो किसी लालच या आर्थिक लाभ के बदले अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या बैंकिंग दस्तावेज किसी अन्य व्यक्ति को सौंप देते हैं। बैंकिंग जानकारी को सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत संबंधित बैंक तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सूचित करना वित्तीय सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।