रायबरेली की साईं नदी पर बढ़ा प्रदूषण का संकट, बछरावां में लोगों ने उठाई आवाज
रविकांत पाण्डेय
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ रायबरेली
रायबरेली/बछरावां, 20 सितंबर 2026।
रायबरेली जिले की महत्वपूर्ण साईं नदी इन दिनों प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है। नदी में लगातार गंदे पानी की निकासी किए जाने को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी समस्या के विरोध में बछरावां क्षेत्र के नागरिकों और युवाओं ने एकजुट

होकर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रशासन से नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने और दूषित पानी के प्रवाह को तत्काल रोकने की मांग उठाई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि साईं नदी केवल पानी का प्राकृतिक स्रोत नहीं है, बल्कि क्षेत्र के लोगों के लिए इसका ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी है। लंबे समय से नदी में गंदे पानी के पहुंचने के कारण इसकी स्थिति लगातार प्रभावित हो रही है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से इस दिशा में स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
गंदे पानी की निकासी को लेकर लोगों में आक्रोश
धरने में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि पीजीआई नाले का दूषित पानी लगातार साईं नदी में पहुंच रहा है। उनका कहना है कि यदि इस तरह नदी में सीवेज और गंदा पानी गिरता रहा तो आने वाले समय में नदी की प्राकृतिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि नाले के पानी को बिना शोधन के नदी में जाने से रोकना जरूरी है। लोगों के मुताबिक केवल अस्थायी इंतजाम करने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे भविष्य में भी नदी में किसी प्रकार का अनुपचारित दूषित पानी न पहुंच सके।
धरने के दौरान स्थानीय लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। उनका कहना था कि नदी के संरक्षण का विषय केवल किसी एक गांव या क्षेत्र का मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे आसपास रहने वाले लोगों और पर्यावरण का सीधा संबंध है।
STP को प्रभावी तरीके से संचालित करने की मांग
स्थानीय नागरिकों ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि संबंधित STP को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए और सीवेज के पानी का उचित उपचार सुनिश्चित किया जाए।
लोगों का कहना है कि यदि नाले के पानी को उपचारित करने के बाद ही आगे भेजा जाए तो नदी में प्रदूषण का स्तर कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही प्रशासन को नियमित निगरानी की व्यवस्था भी करनी चाहिए, ताकि नदी में दोबारा अनुपचारित पानी पहुंचने की स्थिति पैदा न हो।
प्रदर्शनकारियों ने मांग रखी कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करें और नाले तथा नदी के बीच दूषित पानी के प्रवाह को रोकने के लिए आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक कदम उठाएं।
नदी के पुराने स्वरूप को वापस लाने की मांग
धरने में शामिल लोगों ने साईं नदी के पुनरुद्धार की मांग भी प्रमुखता से उठाई। उनका कहना है कि नदी को केवल प्रदूषण से बचाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इसके प्राकृतिक स्वरूप को बहाल करने के लिए व्यापक योजना तैयार करने की आवश्यकता है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार नदी की सफाई, दूषित जल की रोकथाम, आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था और नियमित निगरानी जैसे कदम एक साथ उठाए जाने चाहिए। इसके अलावा नदी में कचरा फेंकने पर रोक और लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत भी बताई गई।
लोगों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएं तो साईं नदी की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है। इसके लिए प्रशासन, स्थानीय निकाय, संबंधित विभागों और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा।
प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
धरना-प्रदर्शन के बाद स्थानीय नागरिकों की ओर से प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। इसमें नदी में पहुंच रहे दूषित पानी को रोकने, STP को सक्रिय करने और साईं नदी की सफाई एवं पुनरुद्धार के लिए ठोस कार्रवाई करने की मांग की गई।
ज्ञापन के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेने और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर जल्द समाधान निकालने का आग्रह किया। स्थानीय लोगों ने कहा कि नदी से जुड़ी समस्या का समाधान केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीन पर इसका असर दिखाई देना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि नदी में प्रदूषण की स्थिति की नियमित निगरानी की जाए और यदि कहीं से भी नियमों का उल्लंघन होता है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरने में मौजूद लोगों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को आगे बढ़ाने पर विचार करेंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि साईं नदी के संरक्षण का मुद्दा लगातार गंभीर होता जा रहा है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की कि अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर नदी और नाले की स्थिति का निरीक्षण करे। इसके साथ ही दूषित पानी की निकासी का स्थायी समाधान तैयार किया जाए, ताकि नदी को लंबे समय तक प्रदूषण से बचाया जा सके।
लोगों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी विभाग या व्यक्ति के खिलाफ विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि नदी के संरक्षण के लिए प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए गए तो विवाद और आंदोलन की स्थिति पैदा होने से पहले ही समस्या का समाधान संभव है।
युवाओं और स्थानीय नागरिकों ने दिखाई एकजुटता
धरने में क्षेत्र के कई नागरिकों और युवाओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान हरिओम चतुर्वेदी, अंशुमान सिंह, सचिन रावत और मनीष गुप्ता सहित कई लोग प्रमुख रूप से मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में नदी को स्वच्छ रखने और उसके संरक्षण की मांग की।
साईं नदी को लेकर उठी यह आवाज स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नागरिक भागीदारी को भी दर्शाती है। नदी में प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब प्रशासनिक प्रयासों के साथ स्थानीय समुदाय भी अपनी भूमिका निभाए।
निष्कर्ष
बछरावां में साईं नदी के प्रदूषण को लेकर हुआ धरना अब प्रशासन के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में सामने आया है। स्थानीय नागरिकों ने दूषित पानी के प्रवाह को रोकने, STP व्यवस्था को प्रभावी बनाने और नदी के पुनरुद्धार की मांग की है।
अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं। यदि संबंधित विभाग समयबद्ध तरीके से निरीक्षण, जल निकासी की व्यवस्था और उपचार प्रणाली में सुधार की दिशा में कदम उठाते हैं, तो नदी की स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि साईं नदी को केवल वर्तमान प्रदूषण से ही नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाले प्रदूषण से भी सुरक्षित रखने के लिए स्थायी व्यवस्था विकसित की जाए।