UPI पर MDR के विरोध में अलीगढ़ के व्यापारी, 15 अक्टूबर से डिजिटल भुगतान रोकने की चेतावनी
अलीगढ़, 21 सितंबर 2026: डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर अलीगढ़ के व्यापारियों में असंतोष सामने आया है। 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के पात्र व्यक्ति-से-व्यापारी यानी Person-to-Merchant (P2M) UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) लागू किए जाने की घोषणा के बाद व्यापारिक संगठनों और दुकानदारों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। व्यापारियों का कहना है कि पहले से बढ़ी हुई लागत, महंगाई और सीमित लाभ के बीच डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क उनकी परेशानी बढ़ा सकता है।

अलीगढ़ के विभिन्न बाजारों में व्यापारी बैनर और पोस्टर के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है कि UPI को कारोबार के लिए अपनाने में सरकार और वित्तीय संस्थानों ने लंबे समय तक डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित किया। अब बड़े मूल्य के कुछ व्यापारी लेनदेन पर MDR लगाए जाने से कारोबारियों को अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ेगा।
क्या है नया UPI MDR नियम?
National Payments Corporation of India (NPCI) की घोषित व्यवस्था के अनुसार 15 अक्टूबर से पात्र P2M UPI लेनदेन में ₹2,000 से अधिक की राशि पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन रखी गई है। वहीं ₹2,000 तक के P2M भुगतान और व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांसफर को इस MDR से बाहर रखा गया है।
उदाहरण के तौर पर ₹10,000 का पात्र व्यापारी भुगतान होने पर 0.4 प्रतिशत के हिसाब से ₹40 MDR बनता है। हालांकि यह राशि ग्राहक से अलग से वसूलने के बजाय निर्धारित व्यवस्था के अनुसार व्यापारी पक्ष पर लागू होगी। वित्त मंत्रालय ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि व्यापारी इस शुल्क को सीधे ग्राहकों पर न डालें।
व्यापारियों की सबसे बड़ी चिंता लागत को लेकर
अलीगढ़ में विरोध कर रहे कारोबारियों का तर्क है कि व्यापार में वास्तविक लाभ और कुल बिक्री एक समान नहीं होती। किराना, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, थोक कारोबार और दूसरे क्षेत्रों में कई बार बिक्री की रकम बड़ी होती है, लेकिन लाभ का प्रतिशत सीमित रहता है। ऐसे में हर पात्र डिजिटल भुगतान पर MDR लगने से कारोबार की कुल लागत बढ़ने की आशंका व्यापारियों को है।
व्यापारियों का कहना है कि बिजली, किराया, परिवहन, कर्मचारियों की लागत और अन्य कारोबारी खर्च पहले ही बढ़ चुके हैं। यदि डिजिटल भुगतान की लागत भी व्यापारी को ही वहन करनी होगी, तो छोटे और मध्यम कारोबार पर इसका असर पड़ सकता है।
यही वजह है कि अलीगढ़ के बाजारों में इस मुद्दे को लेकर विरोध तेज हुआ है। कारोबारियों की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि यदि व्यवस्था में बदलाव नहीं किया गया तो 15 अक्टूबर से बड़े UPI भुगतानों को स्वीकार करने के बजाय नकद भुगतान पर जोर दिया जा सकता है।
पोस्टर और प्रदर्शन के जरिए विरोध
व्यापारियों ने अपनी मांग को सामने रखने के लिए बाजारों में बैनर और पोस्टर लगाए हैं। इन प्रदर्शनों का मुख्य उद्देश्य सरकार और संबंधित संस्थाओं तक यह संदेश पहुंचाना है कि व्यापारिक समुदाय नई MDR व्यवस्था से सहमत नहीं है।
व्यापारियों की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि डिजिटल भुगतान अब रोजमर्रा के व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ग्राहक भी नकदी रखने के बजाय मोबाइल से भुगतान करना अधिक सुविधाजनक मानते हैं। ऐसे में अचानक भुगतान व्यवस्था की लागत बढ़ने से व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के सामने व्यवहारिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
देश के अन्य व्यापारिक क्षेत्रों में भी इसी तरह की चिंता सामने आई है। दिल्ली के चांदनी चौक और उत्तर प्रदेश के दूसरे शहरों में व्यापारियों ने MDR को लेकर विरोध दर्ज कराया है। कुछ बाजारों में कारोबारियों ने 15 अक्टूबर से UPI स्वीकार नहीं करने की चेतावनी भी दी है।
व्यापारियों का सवाल—डिजिटल भुगतान को कैसे बनाए रखें?
अलीगढ़ के व्यापारियों की मुख्य मांग यह है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ उससे जुड़ी लागत का समाधान भी किया जाए। उनका कहना है कि छोटे कारोबारियों के लिए प्रत्येक लेनदेन की लागत महत्वपूर्ण होती है।
व्यापारियों का यह भी कहना है कि यदि डिजिटल भुगतान को कम लागत और आसान भुगतान माध्यम के रूप में बढ़ावा दिया गया था, तो अब शुल्क लागू करने से पहले छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
हालांकि नई व्यवस्था में छोटे व्यापारियों के लिए कुछ राहत का प्रावधान भी बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार QR कोड के जरिए प्रतिमाह ₹1 लाख तक UPI प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को MDR से छूट दी गई है। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर नई व्यवस्था का प्रभाव सीमित करना है।
सरकार और भुगतान क्षेत्र का पक्ष
नई MDR व्यवस्था को लेकर सरकारी पक्ष का तर्क यह है कि UPI नेटवर्क के बढ़ते आकार के साथ उसके बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और संचालन की लागत भी बढ़ रही है। घोषित शुल्क से भुगतान व्यवस्था में शामिल विभिन्न संस्थाओं को राजस्व प्राप्त होगा और इससे डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलने की बात कही गई है।
इस व्यवस्था को सामान्य UPI टैक्स के रूप में नहीं देखा जा रहा है। MDR मूल रूप से व्यापारी द्वारा भुगतान स्वीकार करने की प्रक्रिया से जुड़ा शुल्क है और इसका वितरण भुगतान व्यवस्था में शामिल पक्षों के बीच होता है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले सामान्य UPI ट्रांसफर पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। यानी परिवार, दोस्तों या अन्य व्यक्तियों के बीच होने वाले P2P भुगतान पहले की तरह MDR से मुक्त रहेंगे।
ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?
नियमों के अनुसार MDR का भुगतान व्यापारी पक्ष द्वारा किया जाना है और इसे ग्राहक पर सीधे डालने की अनुमति नहीं है। इसलिए सामान्य ग्राहक के लिए UPI से भुगतान करने पर अलग से 0.4 प्रतिशत शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए।
हालांकि व्यापारियों का विरोध इस बात को लेकर है कि लागत उनके हिस्से में आने से उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है। कुछ कारोबारी संगठनों ने आशंका जताई है कि यदि व्यापारी नकद भुगतान की ओर लौटते हैं तो ग्राहकों को भी भुगतान के वैकल्पिक तरीके तलाशने पड़ सकते हैं।
यह स्थिति विशेष रूप से उन बाजारों में महत्वपूर्ण हो सकती है जहां अधिकांश ग्राहक मोबाइल भुगतान के आदी हो चुके हैं। दूसरी ओर, नकद भुगतान की अपनी अलग संचालन लागत होती है, इसलिए व्यापारी और ग्राहक दोनों के लिए भुगतान माध्यम का चुनाव कई कारकों पर निर्भर करेगा।
15 अक्टूबर को लेकर बढ़ी नजर
अलीगढ़ के व्यापारियों का विरोध अब 15 अक्टूबर की तारीख पर केंद्रित हो गया है। कारोबारियों ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर समाधान नहीं निकलता है तो वे बड़े मूल्य के UPI भुगतान को रोकने का कदम उठा सकते हैं।
इससे पहले उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में भी व्यापारियों की ओर से विरोध दर्ज किया जा चुका है। प्रयागराज के कुछ व्यापारियों द्वारा QR स्कैनर हटाने या उन्हें पलटकर रखने और नकद भुगतान पर जोर देने की खबरें सामने आई हैं।
ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार, NPCI, बैंकिंग क्षेत्र और व्यापारिक संगठनों के बीच बातचीत इस मुद्दे की दिशा तय कर सकती है। व्यापारियों की मांग है कि छोटे और मध्यम कारोबार पर अतिरिक्त लागत न बढ़े, जबकि नई व्यवस्था का उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना बताया गया है।
डिजिटल भुगतान के भविष्य पर बहस
UPI ने भारत में भुगतान करने के तरीके को बड़े स्तर पर बदला है। दुकानों, बाजारों और छोटे कारोबार तक QR आधारित भुगतान पहुंचने से नकदी पर निर्भरता कम हुई है। अब MDR लागू होने का मुद्दा इसी डिजिटल व्यवस्था की लागत और स्थिरता से जुड़ी बहस को सामने ला रहा है।
अलीगढ़ में व्यापारियों का विरोध इसी व्यापक बहस का स्थानीय रूप है। एक ओर व्यापारी कम लागत वाले भुगतान माध्यम को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नई व्यवस्था के समर्थक UPI के बड़े होते नेटवर्क के लिए वित्तीय स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।
फिलहाल 15 अक्टूबर 2026 से नई व्यवस्था लागू होने की घोषणा है। तब तक व्यापारिक संगठनों और संबंधित अधिकारियों के बीच बातचीत से कोई बदलाव होता है या नहीं, इस पर कारोबारियों और ग्राहकों दोनों की नजर रहेगी।