टेलीकॉम और ऑनलाइन फ्रॉड के खिलाफ चीन में बड़ा अभियान, फोन पहचान सत्यापन और साइबर निगरानी पर जोर
बीजिंग। चीन में दूरसंचार और इंटरनेट के जरिए होने वाली धोखाधड़ी पर नियंत्रण के लिए सरकारी स्तर पर कार्रवाई तेज की जा रही है। अधिकारियों का जोर ऐसे मोबाइल नंबर, इंटरनेट अकाउंट और डिजिटल माध्यमों की पहचान मजबूत करने पर है, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधों के लिए किया जा सकता है। अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा फोन

उपयोगकर्ताओं की वास्तविक पहचान की पुष्टि, संदिग्ध नंबरों की निगरानी और विभिन्न सरकारी तथा तकनीकी संस्थाओं के बीच सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान से जुड़ा है।
चीन में दूरसंचार और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए पहले से ही कानूनी और तकनीकी ढांचा मौजूद है। 2023 में लागू किए गए एंटी-टेलीकॉम और ऑनलाइन फ्रॉड कानून में टेलीफोन उपयोगकर्ताओं के वास्तविक नाम के पंजीकरण, संदिग्ध सिम कार्ड की दोबारा पहचान जांच और जोखिम के आधार पर सेवाओं को सीमित करने जैसे प्रावधान किए गए हैं।
फर्जी पहचान से होने वाली धोखाधड़ी पर नजर
ऑनलाइन अपराधों में अक्सर ऐसी पहचान का इस्तेमाल किया जाता है जो वास्तविक उपयोगकर्ता से अलग होती है। अपराधी दूसरे लोगों के नाम पर मोबाइल नंबर या इंटरनेट अकाउंट हासिल करके धोखाधड़ी के नेटवर्क को संचालित करने की कोशिश कर सकते हैं। इसी चुनौती को देखते हुए चीन की व्यवस्था में फोन नंबरों की वास्तविक पहचान की पुष्टि को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
कानून के अनुसार, यदि किसी टेलीफोन कार्ड के इस्तेमाल में असामान्य गतिविधि दिखाई देती है और उसके धोखाधड़ी में शामिल होने का संदेह होता है, तो दूरसंचार कंपनियां अतिरिक्त पहचान सत्यापन कर सकती हैं। निर्धारित प्रक्रिया के तहत सत्यापन पूरा नहीं होने या असफल रहने पर संबंधित नंबर की सेवाओं को सीमित या निलंबित किया जा सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि संदिग्ध संचार माध्यमों की पहचान पहले ही करने की क्षमता बढ़ाना है।
मोबाइल नंबर और इंटरनेट अकाउंट की जांच
चीन में फोन नंबरों के साथ-साथ इंटरनेट अकाउंट पर भी निगरानी बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ‘一证通查’ यानी एक पहचान से जुड़े नंबरों और इंटरनेट अकाउंट की जानकारी जांचने वाली व्यवस्था को एंटी-फ्रॉड व्यवस्था के एक उपयोगी माध्यम के रूप में विकसित किया गया है।
इस प्रणाली के जरिए नागरिक यह पता कर सकते हैं कि उनके पहचान दस्तावेज से कितने मोबाइल नंबर या संबंधित इंटरनेट अकाउंट जुड़े हुए हैं। यदि किसी व्यक्ति को ऐसा नंबर या अकाउंट दिखाई देता है जिसे उसने स्वयं पंजीकृत नहीं कराया है, तो आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से उसकी जांच और आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि किसी व्यक्ति की जानकारी के बिना उसके नाम से सक्रिय नंबर या अकाउंट साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने का जोखिम पैदा कर सकते हैं।
व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा भी अभियान का हिस्सा
टेलीकॉम फ्रॉड की समस्या केवल फोन कॉल या संदेश तक सीमित नहीं है। अपराधियों तक यदि नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी पहुंच जाए तो उसका इस्तेमाल फर्जी कॉल, सोशल इंजीनियरिंग, नकली निवेश प्रस्ताव या अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है।
चीन के 2026 के व्यक्तिगत सूचना संरक्षण अभियान में केंद्रीय साइबरस्पेस प्रशासन, उद्योग एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय समेत संबंधित विभागों ने ऐप और डिजिटल सेवाओं में व्यक्तिगत जानकारी के संग्रह तथा इस्तेमाल की जांच पर जोर दिया है। अगस्त 2026 तक 20 हजार से अधिक ऐप और SDK की जांच की गई थी तथा कई मामलों में सुधारात्मक कार्रवाई की गई।
20 सितंबर 2026 को भी चीन के केंद्रीय साइबरस्पेस प्रशासन ने 30 ऐप में व्यक्तिगत जानकारी के संग्रह और इस्तेमाल से जुड़ी समस्याओं की सूचना जारी की। संबंधित संचालकों को निर्धारित अवधि में सुधार करने के निर्देश दिए गए।
साइबर अपराध के खिलाफ कानून का सख्त ढांचा
चीन के एंटी-टेलीकॉम और ऑनलाइन फ्रॉड कानून में मोबाइल नंबर, इंटरनेट ऑफ थिंग्स कार्ड, संचार लाइन, एसएमएस पोर्ट, बैंकिंग तथा भुगतान खातों और इंटरनेट अकाउंट की अवैध खरीद-बिक्री या किराये पर देने को रोकने के प्रावधान हैं।
कानून इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को भी संदिग्ध अकाउंट की दोबारा जांच और जोखिम के आधार पर आवश्यक कदम उठाने की व्यवस्था देता है। गंभीर जोखिम की स्थिति में संबंधित अकाउंट की सुविधाएं सीमित करने, सेवा रोकने या अकाउंट बंद करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। साथ ही कानून में प्रभावित व्यक्ति के लिए शिकायत और सुधार की प्रक्रिया का भी प्रावधान किया गया है।
इससे साफ है कि चीन की रणनीति में केवल अपराधियों को पकड़ना ही नहीं, बल्कि अपराध के लिए इस्तेमाल होने वाले डिजिटल ढांचे को नियंत्रित करना भी शामिल है।
2026 में कार्रवाई और तेज
2026 में चीन में साइबर अपराध के खिलाफ व्यापक स्तर पर कार्रवाई के संकेत मिले हैं। सुप्रीम पीपुल्स प्रोक्यूरेटोरेट से संबंधित जानकारी के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में दूरसंचार और इंटरनेट धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में 32 हजार लोगों के खिलाफ अभियोजन किया गया। अधिकारियों ने सीमा-पार टेलीकॉम और ऑनलाइन फ्रॉड के खिलाफ विशेष अभियान को भी जारी रखा।
इससे पता चलता है कि साइबर धोखाधड़ी अब केवल स्थानीय स्तर की समस्या नहीं रह गई है। इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क और डिजिटल भुगतान की सीमापार प्रकृति के कारण अपराधियों के नेटवर्क कई क्षेत्रों में फैले हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में भी कदम
चीन ने सितंबर 2026 में टेलीकॉम और साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी पहल की। 10 सितंबर को लियानयुंगांग में इंटरनेशनल एलायंस कॉम्बैटिंग टेलीकॉम एंड साइबर फ्रॉड की स्थापना की गई। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इसके उद्घाटन सम्मेलन में 46 संस्थापक देशों, 34 पर्यवेक्षक देशों और संयुक्त राष्ट्र तथा इंटरपोल समेत चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
इस तरह की पहल का उद्देश्य अलग-अलग देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाना और सीमा-पार साइबर अपराध से निपटने के लिए समन्वय को मजबूत करना है।
तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर
आधुनिक साइबर धोखाधड़ी में अपराधी लगातार नए तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में केवल पारंपरिक जांच व्यवस्था के जरिए हर संदिग्ध गतिविधि की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए चीन के कानून में दूरसंचार कंपनियों, बैंकों, भुगतान संस्थानों और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को धोखाधड़ी की पहचान, निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों को तत्काल रोकने वाली तकनीकों के विकास में सहयोग का प्रावधान किया गया है।
डेटा साझा करने और संदिग्ध गतिविधियों की क्रॉस-वेरिफिकेशन व्यवस्था को भी इस रणनीति का हिस्सा बनाया गया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग डिजिटल सेवाओं में मौजूद संकेतों को जोड़कर जोखिम की पहचान करना है।
आम नागरिकों के लिए क्या मायने हैं
इस तरह के अभियान का सीधा असर मोबाइल और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं पर भी पड़ सकता है। लोगों को अपने नाम पर जारी मोबाइल नंबरों और इंटरनेट अकाउंट की जानकारी पर नजर रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसी अनजान नंबर या अकाउंट का पता चलने पर उसे आधिकारिक चैनल के माध्यम से सत्यापित और आवश्यक होने पर बंद कराया जा सकता है।
साथ ही व्यक्तिगत जानकारी को अनजान लोगों या संदिग्ध डिजिटल सेवाओं के साथ साझा करने से बचना साइबर सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी संदिग्ध कॉल, संदेश या ऑनलाइन प्रस्ताव पर तुरंत भरोसा करने के बजाय उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना भी जोखिम कम कर सकता है।
आगे की चुनौती
टेलीकॉम और ऑनलाइन फ्रॉड का स्वरूप लगातार बदल रहा है। अपराधी तकनीकी बदलावों, फर्जी पहचान और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच मौजूद कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। इसलिए सरकारी एजेंसियों, दूरसंचार कंपनियों, इंटरनेट प्लेटफॉर्म, वित्तीय संस्थानों और नागरिकों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण बना रहेगा।
चीन में 2026 के दौरान व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा, मोबाइल नंबरों की पहचान और साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई को समानांतर रूप से आगे बढ़ाया गया है। आने वाले समय में फोन पहचान सत्यापन, डिजिटल अकाउंट की निगरानी, तकनीकी जोखिम पहचान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर और अधिक ध्यान दिए जाने की संभावना है।
कुल मिलाकर, टेलीकॉम और ऑनलाइन फ्रॉड के खिलाफ यह अभियान डिजिटल व्यवस्था में भरोसा बढ़ाने तथा धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले माध्यमों को नियंत्रित करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है। इसकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीकी निगरानी, कानूनी कार्रवाई, व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और नागरिकों की जागरूकता को किस तरह एक साथ लागू किया जाता है।