मार्च 29, 2026

दूरदराज़ ग्रामीण अंचलों के बच्चों की शिक्षा के लिए  विधायक अनिल प्रधान जी की पहल

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Anoop singh

चित्रकूट, 24 जून 2025 — उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जनपद से विधायक अनिल प्रधान ने एक अत्यंत संवेदनशील और दूरगामी निर्णय की ओर शासन का ध्यान आकर्षित किया है। प्रदेश सरकार द्वारा जारी उस आदेश के विरुद्ध उन्होंने आवाज़ उठाई है, जिसके अंतर्गत 50 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को बंद कर अन्य विद्यालयों में मर्ज करने का निर्देश दिया गया है।

विधायक अनिल प्रधान ने इस निर्णय को ग्रामीण गरीब तबके के बच्चों के भविष्य के लिए खतरा बताया है। उन्होंने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री को एक औपचारिक पत्र लिखा है जिसमें अनुरोध किया गया है कि इस आदेश को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए।

अनिल प्रधान ने अपने पत्र में कहा है कि चित्रकूट एक सीमावर्ती जनपद है, जहां भौगोलिक और सामाजिक कारणों से शिक्षा का स्तर पहले से ही चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जिन विद्यालयों को मर्ज करने की योजना बनाई जा रही है, वे अक्सर दूरदराज़ गांवों में स्थित हैं और बच्चों के लिए एकमात्र शैक्षिक साधन हैं।

उन्होंने चेताया कि यदि ये विद्यालय बंद किए जाते हैं, तो उन क्षेत्रों के बच्चे शिक्षा से पूरी तरह वंचित हो जाएंगे क्योंकि उन्हें निकटतम अन्य विद्यालय तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जो छोटे बच्चों के लिए असंभव या असुरक्षित हो सकता है। इससे न केवल शिक्षा का अधिकार बाधित होगा, बल्कि बाल मजदूरी, बाल विवाह जैसे सामाजिक कुप्रथाएं भी बढ़ सकती हैं।

विधायक ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वह इस मामले की गंभीरता को समझते हुए बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा मर्ज किए जाने वाले आदेशों पर पुनर्विचार करें और उन्हें स्थगित किया जाए, ताकि गरीब व वंचित वर्ग के बच्चों का भविष्य अंधकार में न डूबे।

यह पहल न केवल एक विधायक के कर्तव्यबोध को दर्शाती है, बल्कि यह भी प्रमाणित करती है कि जब जनप्रतिनिधि आम जनता की आवाज़ को शासन तक मजबूती से पहुंचाते हैं, तो लोकतंत्र वास्तव में जीवंत होता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेती है और क्या ग्रामीण बच्चों की शिक्षा के संरक्षण के लिए कोई वैकल्पिक योजना प्रस्तुत करती है या नहीं।


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