कानपुर में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार पर बड़ी कार्रवाई, 28 थोक फर्मों के लाइसेंस रद्द
अमरेश त्रिपाठी
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात
कानपुर। शहर में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार और दवा बिक्री से जुड़े नियमों की अनदेखी करने वाली फर्मों के खिलाफ औषधि विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग की ओर से चलाए गए व्यापक सत्यापन और जांच अभियान में बड़ी संख्या में दवा कारोबारियों की गतिविधियों की पड़ताल की गई। जांच पूरी होने के बाद 28 थोक दवा फर्मों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद दवा कारोबार से जुड़े लोगों में खलबली मची हुई है।

औषधि विभाग की इस कार्रवाई को नशीली और प्रतिबंधित दवाओं की अवैध आपूर्ति पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाली किसी भी दवा फर्म के खिलाफ कार्रवाई में ढिलाई नहीं बरती जाएगी। विभाग का सत्यापन अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है और आने वाले समय में जांच के दायरे में आने वाली अन्य फर्मों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
3,270 दवा फर्मों की हुई जांच
विभागीय अभियान के तहत कानपुर में संचालित करीब 3,270 दवा फर्मों का सत्यापन और परीक्षण किया गया। इस प्रक्रिया में थोक दवा विक्रेताओं के लाइसेंस, कारोबार से संबंधित दस्तावेज, दवाओं की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड और फर्म के वास्तविक संचालन की स्थिति की जांच की गई।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि दवा कारोबार निर्धारित नियमों के अनुसार चल रहा है या नहीं। इसके साथ ही यह भी देखा गया कि कहीं प्रतिबंधित अथवा नशीली दवाओं की बिक्री बिना आवश्यक अनुमति या निर्धारित प्रक्रिया के तो नहीं की जा रही है।
जांच के दौरान विभागीय टीमों को अलग-अलग स्तर पर कई प्रकार की अनियमितताएं मिलीं। कुछ मामलों में कारोबार से संबंधित दस्तावेजों में कमी सामने आई, जबकि कुछ फर्मों की वास्तविक स्थिति और कागजी रिकॉर्ड में अंतर पाया गया।
12 फर्मों में नशीली दवाओं से जुड़े साक्ष्य
जांच के दौरान 12 दवा फर्मों से नशीली दवाओं के कारोबार से संबंधित साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है। इन फर्मों की गतिविधियों को विभाग ने गंभीरता से लिया है। नशीली दवाओं की अवैध बिक्री और आपूर्ति को लेकर कानून में सख्त प्रावधान हैं, इसलिए ऐसे मामलों में संबंधित फर्मों के लाइसेंस और दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।
औषधि विभाग की कार्रवाई का एक अहम उद्देश्य दवाओं की सप्लाई चेन को पारदर्शी बनाना भी है। यदि किसी थोक विक्रेता के स्तर से नियमों को दरकिनार करके दवाओं की आपूर्ति की जाती है तो उसका प्रभाव सीधे बाजार और आम लोगों तक पहुंच सकता है। इसी कारण विभाग अब लाइसेंसधारी फर्मों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी कर रहा है।
कई इलाकों में चला सत्यापन अभियान
औषधि विभाग की टीमों ने कानपुर के विभिन्न प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों में पहुंचकर दवा फर्मों की जांच की। बिरहाना रोड, कल्याणपुर और लालबंगला सहित कई इलाकों में थोक दवा कारोबारियों का सत्यापन किया गया।
जांच के दौरान अधिकारियों ने फर्मों के पंजीकृत पते और वास्तविक संचालन की स्थिति का मिलान किया। टीमों ने यह भी देखने का प्रयास किया कि जिस स्थान पर फर्म का लाइसेंस दर्ज है, वहां वास्तव में दवा कारोबार हो रहा है या नहीं।
इस प्रक्रिया में कुछ ऐसी फर्मों का भी पता चला, जिनका अस्तित्व दस्तावेजों में दर्ज था, लेकिन मौके पर अपेक्षित कारोबारी गतिविधियां नहीं मिलीं। इस तरह के मामलों को विभाग ने गंभीरता से लिया है, क्योंकि दवा कारोबार में लाइसेंस और वास्तविक संचालन के बीच स्पष्ट समानता होना आवश्यक माना जाता है।
कागजों पर कारोबार करने वालों पर भी नजर
दवा कारोबार में केवल लाइसेंस हासिल करना पर्याप्त नहीं है। लाइसेंस के अनुरूप निर्धारित स्थान पर कारोबार करना, खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड रखना और संबंधित नियमों का पालन करना भी जरूरी है। जांच अभियान के दौरान ऐसे मामलों की भी पड़ताल की गई, जहां कागजों पर फर्म संचालित दिखाई दे रही थी, लेकिन वास्तविक स्थिति अलग मिली।
अधिकारियों के मुताबिक, यदि किसी फर्म के दस्तावेजों में दर्ज जानकारी और मौके की स्थिति में अंतर पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इसी तरह लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों पर भी विभाग की नजर है।
दवा कारोबार में नियमों का पालन जरूरी
दवाओं की बिक्री अन्य सामान्य वस्तुओं के कारोबार से अलग होती है। कई दवाओं की बिक्री के लिए विशेष नियम निर्धारित हैं और कुछ दवाओं को लेकर रिकॉर्ड एवं बिक्री प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होता है। नशीली और नियंत्रित श्रेणी की दवाओं के मामले में नियम और भी सख्त होते हैं।
ऐसे में यदि कोई फर्म बिना उचित रिकॉर्ड या निर्धारित प्रक्रिया के दवाओं का कारोबार करती है तो इससे दवाओं के दुरुपयोग की आशंका बढ़ सकती है। औषधि विभाग का सत्यापन अभियान इसी तरह की गतिविधियों की पहचान करने और उन्हें रोकने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
28 लाइसेंस निरस्त होने से बढ़ी सख्ती
जांच के बाद 28 थोक दवा फर्मों के लाइसेंस निरस्त किए जाने को विभाग की ओर से बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। लाइसेंस रद्द होने के बाद संबंधित फर्मों के लिए दवा कारोबार जारी रखना संभव नहीं होगा, जब तक कि सक्षम स्तर से कोई वैधानिक अनुमति या अन्य प्रक्रिया पूरी न हो।
इस कार्रवाई से उन दवा कारोबारियों को भी संदेश गया है, जो नियमों की अनदेखी करके कारोबार करने का प्रयास करते हैं। विभाग का संकेत साफ है कि दवा कारोबार में किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर लाइसेंस संबंधी कार्रवाई की जा सकती है।
अभियान अभी जारी रहने की संभावना
औषधि विभाग की कार्रवाई को फिलहाल अंतिम चरण नहीं माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार सत्यापन और जांच की प्रक्रिया जारी है। आने वाले दिनों में अन्य दवा फर्मों के रिकॉर्ड और वास्तविक संचालन की भी जांच की जा सकती है।
यदि जांच में नियमों का उल्लंघन, संदिग्ध दवा कारोबार, दस्तावेजों में गड़बड़ी अथवा लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित फर्म के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दवा बाजार में निगरानी बढ़ने की उम्मीद
कानपुर जैसे बड़े शहर में दवाओं का थोक कारोबार काफी व्यापक है। ऐसे में दवा बाजार की नियमित निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। विभाग की इस कार्रवाई के बाद दवा कारोबारियों के बीच अपने दस्तावेज और कारोबारी रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने की जरूरत और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार दवा की आपूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता रहने से न केवल अवैध कारोबार पर रोक लगाने में मदद मिलती है, बल्कि मरीजों तक सही और अधिकृत माध्यम से दवाएं पहुंचाने की व्यवस्था भी मजबूत होती है।
निष्कर्ष
कानपुर में औषधि विभाग द्वारा चलाया गया व्यापक सत्यापन अभियान दवा कारोबार में नियमों के पालन को लेकर प्रशासन की सख्ती को दर्शाता है। 3,270 फर्मों की जांच के बाद 28 थोक दवा फर्मों के लाइसेंस निरस्त किए जाने से साफ है कि विभाग अब केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर संतुष्ट नहीं है, बल्कि फर्मों के वास्तविक संचालन और दवा कारोबार की प्रक्रिया की भी जांच कर रहा है।
विशेष रूप से नशीली दवाओं से जुड़े मामलों में सामने आए साक्ष्यों ने विभाग की चिंता बढ़ाई है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि आगे की जांच में कितनी और फर्में नियमों के दायरे में आती हैं और विभाग की कार्रवाई किस स्तर तक पहुंचती है। फिलहाल जारी अभियान ने कानपुर के दवा कारोबारियों को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि नियमों की अनदेखी करने पर कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।