भारत-कनाडा व्यापार समझौते पर बढ़ी सक्रियता, CEPA वार्ता में तेजी
नई दिल्ली। भारत और कनाडा के बीच आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने की कोशिशें तेज हो गई हैं। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) को लेकर बातचीत लगातार आगे बढ़ रही है। हाल के महीनों में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों और वाणिज्य मंत्रियों के बीच हुई बैठकों से संकेत मिला है कि व्यापार समझौते को लेकर दोनों पक्ष समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ना चाहते हैं।

सितंबर 2026 में भारत और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता को लेकर उच्चस्तरीय संपर्क हुआ। कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मैनिंदर सिद्धू और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बीच मुंबई में हुई बातचीत में व्यापार, निवेश और CEPA वार्ता की प्रगति पर चर्चा हुई। कनाडा ने वर्ष 2026 के अंत तक समझौते को पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
2030 तक व्यापार बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
भारत और कनाडा ने द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। दोनों सरकारों के अनुसार यह मौजूदा स्तर की तुलना में व्यापार को काफी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
कनाडा सरकार के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 30.4 अरब कनाडाई डॉलर रहा। इसमें वस्तुओं का व्यापार करीब 13.6 अरब कनाडाई डॉलर था। ऐसे में प्रस्तावित CEPA को व्यापार विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण ढांचे के रूप में देखा जा रहा है।
समझौते का उद्देश्य केवल आयात-निर्यात बढ़ाना ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के कारोबारियों के लिए बाजार तक पहुंच को आसान बनाना, निवेश को बढ़ावा देना और व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाओं में अधिक स्पष्टता लाना भी है।
कई दौर की वार्ता हो चुकी है
भारत और कनाडा के बीच CEPA वार्ता 2026 में औपचारिक रूप से आगे बढ़ी। कनाडा सरकार के अनुसार सितंबर तक दोनों पक्षों के बीच चार दौर की बातचीत पूरी हो चुकी थी। अधिकारियों का प्रयास है कि अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद मतभेदों को बातचीत के जरिए कम किया जाए और समझौते के शेष हिस्सों पर सहमति बनाई जाए।
इससे पहले मार्च में पहला दौर, मई में दूसरा और जुलाई में तीसरा दौर आयोजित हुआ था। दोनों पक्षों के मुख्य वार्ताकारों के बीच अलग-अलग दौर के बीच भी लगातार संपर्क बनाए रखने की जानकारी कनाडा सरकार ने दी थी।
इस प्रक्रिया से यह स्पष्ट है कि CEPA केवल एक बैठक या एक दौर की बातचीत का परिणाम नहीं होगा। इसमें वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और अन्य व्यापारिक मुद्दों से जुड़े कई पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की जा रही है।
किन क्षेत्रों में बढ़ सकती है साझेदारी?
भारत और कनाडा की अर्थव्यवस्थाओं में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां व्यापार और निवेश की संभावनाएं मौजूद हैं। कनाडा की ओर से ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, लकड़ी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े क्षेत्रों में अवसर देखे जा रहे हैं। दूसरी ओर भारत की दवा, मशीनरी, आभूषण एवं कीमती धातुओं और विभिन्न सेवा क्षेत्रों में कनाडा के बाजार में मजबूत मौजूदगी है।
कनाडा के आंकड़ों के अनुसार 2025 में भारत से कनाडा को होने वाले वस्तु आयात में कीमती पत्थर एवं धातु, मशीनरी और फार्मास्यूटिकल उत्पाद प्रमुख रहे। वहीं कनाडा से भारत को निर्यात में सब्जियां, खनिज ईंधन एवं तेल और लकड़ी का गूदा प्रमुख उत्पादों में शामिल थे।
ऐसे में CEPA के जरिए इन क्षेत्रों में बाजार पहुंच को अधिक व्यवस्थित बनाने पर दोनों देशों के कारोबारियों को संभावित रूप से लाभ मिल सकता है।
सेवाओं और शिक्षा क्षेत्र की भी अहम भूमिका
भारत-कनाडा आर्थिक संबंध केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच सेवाओं का कारोबार भी महत्वपूर्ण है। कनाडा के आंकड़ों के अनुसार 2025 में कनाडा का भारत को सेवा निर्यात करीब 15.2 अरब कनाडाई डॉलर रहा, जिसमें शिक्षा से जुड़ी यात्राओं का महत्वपूर्ण योगदान था। भारत से कनाडा को सेवा आयात लगभग 4.5 अरब कनाडाई डॉलर रहा।
दोनों देशों के बीच बड़ी संख्या में पेशेवर, विद्यार्थी, कारोबारी और परिवार जुड़े हुए हैं। ऐसे में आर्थिक समझौते के व्यापक प्रभावों में सेवा व्यापार और लोगों के बीच आर्थिक संपर्क भी महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।
निवेश संबंधों को भी मिल सकती है मजबूती
CEPA के साथ-साथ भारत और कनाडा निवेश संबंधों को भी मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं। अगस्त 2026 में दोनों देशों के वित्त मंत्रियों के बीच पहली इकोनॉमिक एंड फाइनेंशियल डायलॉग बैठक हुई। इसमें व्यापार और निवेश संबंधों को गहरा करने तथा वित्तीय एवं वाणिज्यिक संपर्क बढ़ाने पर चर्चा हुई। भारत ने द्विपक्षीय निवेश संधि पर बातचीत शुरू करने की तत्परता भी जताई।
बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने मजबूत और विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं की जरूरत पर जोर दिया।
महत्वपूर्ण खनिज और ऊर्जा सहयोग
आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण खनिजों की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए यह क्षेत्र भारत-कनाडा आर्थिक साझेदारी में अहम भूमिका निभा सकता है। कनाडा के पास विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों और महत्वपूर्ण खनिजों का आधार है, जबकि भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और औद्योगिक जरूरतों के कारण विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर ध्यान दे रहा है।
सितंबर में भारत और कनाडा के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी CEPA के साथ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों में दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
व्यापारिक रिश्तों में व्यापक सुधार की कोशिश
CEPA वार्ता ऐसे समय आगे बढ़ रही है जब भारत और कनाडा अपने व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों ने व्यापार के अलावा ऊर्जा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा, सुरक्षा, रक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में भी संस्थागत संवाद बढ़ाया है। सितंबर में हुई विदेश कार्यालय परामर्श बैठक में दोनों पक्षों ने संबंधों में जारी गति का उल्लेख किया।
इसका असर व्यापारिक बातचीत पर भी दिखाई दे रहा है। दोनों सरकारें कारोबारी प्रतिनिधिमंडलों और उद्योग जगत के संपर्क को बढ़ाने पर भी जोर दे रही हैं।
समझौते में कई मुद्दों पर सहमति जरूरी
हालांकि CEPA को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन किसी भी व्यापक व्यापार समझौते में विभिन्न क्षेत्रों के हितों को संतुलित करना महत्वपूर्ण होता है। कनाडा में हुई सार्वजनिक सलाह प्रक्रिया के दौरान व्यापारिक संगठनों, कंपनियों, गैर-सरकारी संगठनों, प्रांतीय सरकारों और आम नागरिकों से राय ली गई थी।
कनाडा सरकार के अनुसार इस प्रक्रिया में 624 प्रस्तुतियां प्राप्त हुईं। इनमें बाजार पहुंच, कृषि, गैर-टैरिफ बाधाएं, निवेश, श्रम और पर्यावरण मानकों तथा विवाद समाधान जैसे विषयों पर अलग-अलग प्राथमिकताएं सामने आईं।
इससे पता चलता है कि अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए दोनों पक्षों को कई तकनीकी और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तृत बातचीत करनी होगी।
कारोबारियों के लिए संभावित अवसर
यदि CEPA पर सहमति बनती है और इसे प्रभावी रूप से लागू किया जाता है, तो दोनों देशों के कारोबारियों के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ाने के अवसर बन सकते हैं। निर्यातकों को शुल्क, नियमों और व्यापार प्रक्रियाओं में अधिक स्पष्टता मिलने की संभावना होगी। इसके अलावा निवेशकों के लिए भी कारोबारी माहौल में पूर्वानुमेयता बढ़ सकती है।
भारत के लिए कनाडा ऊर्जा, प्राकृतिक संसाधनों, महत्वपूर्ण खनिजों, कृषि और उन्नत तकनीक जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साझेदार बन सकता है। वहीं कनाडा के लिए भारत का विशाल बाजार और तेजी से बढ़ता उपभोक्ता एवं औद्योगिक आधार व्यापार विस्तार के अवसर प्रदान करता है।
आगे की राह पर निगाह
सितंबर 2026 तक दोनों देशों ने CEPA वार्ता को वर्ष के अंत तक पूरा करने का साझा लक्ष्य दोहराया है। हालांकि अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए वार्ताकारों को बाजार पहुंच, शुल्क, सेवाओं, निवेश और विभिन्न नियामकीय मुद्दों पर सहमति बनानी होगी।
कुल मिलाकर भारत-कनाडा व्यापार संबंधों में CEPA वार्ता एक महत्वपूर्ण आर्थिक पहल के रूप में सामने आई है। दोनों देश व्यापार को मौजूदा स्तर से काफी आगे ले जाने की दिशा में काम कर रहे हैं। यदि वार्ता निर्धारित समयसीमा में सफल होती है, तो यह समझौता आने वाले वर्षों में दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार और निवेश संबंधों के लिए नया ढांचा तैयार कर सकता है।