शिक्षकों की पदोन्नति की राह होगी आसान, वरिष्ठता सूची तैयार करने के निर्देश जारी
अमरेश त्रिपाठी
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात
प्रयागराज/कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बेसिक शिक्षा परिषद ने महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाया है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षकों की वरिष्ठता निर्धारित करने के लिए प्रदेश के सभी जिलों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। परिषद के सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी की ओर से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को जारी निर्देशों में वरिष्ठता सूची तैयार कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे अंतिम रूप देने को कहा गया है।

परिषद ने स्पष्ट किया है कि वरिष्ठता सूची तैयार करने का काम निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। जिलों से अंतिम वरिष्ठता सूची 23 अक्टूबर 2026 तक परिषद कार्यालय को उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था की गई है। इस आदेश के बाद उन शिक्षकों में उम्मीद जगी है, जिनकी पदोन्नति प्रक्रिया वरिष्ठता सूची से संबंधित कार्यवाही पूरी नहीं होने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
सेवा नियमों के आधार पर तैयार होगी सूची
वरिष्ठता सूची बनाते समय शिक्षकों की सेवा से जुड़े अभिलेखों और लागू नियमों का परीक्षण किया जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली, 1981 के संशोधित प्रावधानों को आधार बनाया जाएगा। पदोन्नति और ज्येष्ठता से जुड़े नियमों के अनुसार प्रत्येक शिक्षक की सेवा संबंधी जानकारी का परीक्षण कर उसका क्रम निर्धारित किया जाएगा।
वरिष्ठता तय करने में संबंधित शिक्षक की मूल पद पर नियुक्ति की तारीख को प्रमुख आधार माना जाएगा। इसके साथ ही नियुक्ति के बाद कार्यभार ग्रहण करने से जुड़े अभिलेखों को भी देखा जाएगा। यदि एक ही दिन कई शिक्षकों की नियुक्ति हुई है तो ऐसी स्थिति में लागू नियमों के तहत उपलब्ध क्रम और संबंधित अभिलेखों के आधार पर वरिष्ठता निर्धारित की जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य वरिष्ठता निर्धारण में एक समान प्रक्रिया लागू करना है, ताकि अलग-अलग जिलों में सूची तैयार करते समय नियमों की व्याख्या में अनावश्यक अंतर न रहे।
पदोन्नति के बाद कार्यभार ग्रहण करने का भी महत्व
परिषद के निर्देशों में पदोन्नति के बाद कार्यभार ग्रहण करने से संबंधित स्थिति को भी ध्यान में रखने को कहा गया है। यदि किसी शिक्षक को पदोन्नति मिलने के बाद बिना वैध एवं स्वीकार्य कारण के निर्धारित पद पर कार्यभार ग्रहण नहीं करने की स्थिति बनती है, तो संबंधित सेवा नियमों के अनुसार उसकी वरिष्ठता प्रभावित हो सकती है।
इसलिए वरिष्ठता सूची तैयार करने वाले अधिकारियों को केवल नियुक्ति संबंधी जानकारी पर निर्भर न रहने, बल्कि शिक्षक के सेवा अभिलेखों का समुचित परीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे सूची तैयार करते समय वास्तविक सेवा स्थिति को रिकॉर्ड में शामिल किया जा सकेगा।
दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित शिक्षकों की वरिष्ठता भी होगी निर्धारित
वरिष्ठता सूची तैयार करने में उन शिक्षकों का मामला भी महत्वपूर्ण है, जिन्होंने स्वेच्छा से एक स्थानीय क्षेत्र से दूसरे स्थानीय क्षेत्र में स्थानांतरण कराया है। ऐसे शिक्षकों को नए क्षेत्र की वरिष्ठता सूची में शामिल करते समय लागू नियमों का पालन किया जाएगा।
परिषद के निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानांतरण के कारण वरिष्ठता से जुड़े मामलों में भी निर्धारित प्रावधानों का पालन हो। संबंधित शिक्षक की सेवा पुस्तिका, नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज और स्थानांतरण संबंधी अभिलेखों के आधार पर वरिष्ठता का निर्धारण किया जाएगा।
इससे उन शिक्षकों की स्थिति भी स्पष्ट होने की संभावना है, जिनकी सेवा का कुछ हिस्सा एक क्षेत्र में और बाद का कार्यकाल दूसरे क्षेत्र में रहा है।
68500 शिक्षक भर्ती से जुड़े शिक्षकों को भी मिलेगा लाभ
वरिष्ठता निर्धारण की इस प्रक्रिया में 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती के तहत नियुक्त शिक्षकों से जुड़े मामलों को भी शामिल किया गया है। न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में जिन अभ्यर्थियों को नए जिलों का आवंटन किया गया था, उनकी वरिष्ठता को लेकर उत्पन्न परिस्थितियों को भी परिषद के निर्देशों में स्थान दिया गया है।
निर्देशों के अनुसार ऐसे शिक्षकों की वरिष्ठता निर्धारित करते समय उनकी प्रथम नियुक्ति की तारीख को आधार बनाया जाएगा। इससे संबंधित शिक्षकों की सेवा अवधि को वरिष्ठता निर्धारण में ध्यान में रखने की व्यवस्था बनती है।
यह प्रावधान उन शिक्षकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिनका जिला आवंटन बाद में बदला गया था और जिनकी वरिष्ठता को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की आवश्यकता थी।
पहले प्रकाशित होगी अंतरिम वरिष्ठता सूची
जिला स्तर पर वरिष्ठता सूची तैयार होने के बाद उसे तत्काल अंतिम सूची का रूप नहीं दिया जाएगा। पहले अंतरिम वरिष्ठता सूची तैयार कर प्रकाशित की जाएगी। इस सूची के माध्यम से शिक्षकों को यह देखने का अवसर मिलेगा कि उनके नाम, नियुक्ति तिथि, वरिष्ठता क्रम और अन्य सेवा विवरण सही दर्ज हैं या नहीं।
यदि किसी शिक्षक को सूची में अपने संबंध में दर्ज जानकारी पर आपत्ति होगी तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी आपत्ति प्रस्तुत कर सकेगा। प्राप्त आपत्तियों की जांच संबंधित अधिकारियों द्वारा की जाएगी। आवश्यक दस्तावेजों और सेवा अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।
आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस व्यवस्था से सूची में दर्ज संभावित त्रुटियों को समय रहते सुधारने का अवसर मिलेगा।
समयसीमा के भीतर पूरा करना होगा काम
बेसिक शिक्षा परिषद ने जिलों को वरिष्ठता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों के स्तर पर संबंधित शिक्षकों के सेवा अभिलेखों की जांच, नियुक्ति तिथियों का सत्यापन और अन्य जरूरी विवरणों का मिलान किया जाना है।
23 अक्टूबर 2026 तक अंतिम वरिष्ठता सूची परिषद कार्यालय को उपलब्ध कराना निर्धारित किया गया है। ऐसे में जिला स्तर पर अधिकारियों के सामने कम समय में रिकॉर्ड की जांच और आपत्तियों के निस्तारण सहित पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने की जिम्मेदारी होगी।
पदोन्नति के लिए महत्वपूर्ण है वरिष्ठता सूची
परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया में वरिष्ठता सूची की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। पदोन्नति से संबंधित मामलों में पात्र शिक्षकों का क्रम निर्धारित करने के लिए सेवा अवधि और लागू नियमों को ध्यान में रखा जाता है। ऐसे में वरिष्ठता सूची का अंतिम रूप से तैयार होना आगे की विभागीय कार्रवाई के लिए आधार उपलब्ध करा सकता है।
परिषद के ताजा निर्देशों से यह संकेत मिलता है कि विभाग पदोन्नति से जुड़े लंबित मामलों में आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहता है। हालांकि केवल वरिष्ठता सूची तैयार हो जाने से पदोन्नति स्वतः सुनिश्चित नहीं होती। इसके बाद भी विभागीय नियमों, उपलब्ध रिक्त पदों, पात्रता और अन्य निर्धारित औपचारिकताओं का पालन करना होगा।
शिक्षकों को आपत्तियों के लिए मिलेगा अवसर
अंतरिम सूची प्रकाशित करने के बाद आपत्ति दर्ज कराने की व्यवस्था शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण होगी। इससे किसी शिक्षक की नियुक्ति तिथि या सेवा संबंधी विवरण गलत दर्ज होने की स्थिति में उसे सुधारने का अवसर मिल सकेगा।
शिक्षकों के लिए जरूरी होगा कि वे अपनी सेवा पुस्तिका और नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों में दर्ज जानकारी का मिलान करें। यदि वरिष्ठता सूची में कोई तथ्यात्मक गलती सामने आती है तो संबंधित प्रक्रिया के तहत समय पर आपत्ति दर्ज कराना आवश्यक होगा।
आगे की प्रक्रिया पर रहेगी नजर
बेसिक शिक्षा परिषद के इस कदम के बाद अब जिला स्तर पर वरिष्ठता सूची तैयार करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। अंतिम सूची परिषद कार्यालय तक पहुंचने के बाद पदोन्नति से जुड़े अगले चरणों में विभागीय स्तर पर निर्णय लिए जाने की संभावना रहेगी।
फिलहाल सबसे अहम तारीख 23 अक्टूबर 2026 है, जब तक जिलों को अंतिम वरिष्ठता सूची परिषद कार्यालय में उपलब्ध करानी है। शिक्षकों के लिए यह प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वरिष्ठता का निर्धारण उनकी भविष्य की विभागीय पदोन्नति से जुड़े अवसरों को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि अंतिम रूप से पदोन्नति कब और किस प्रकार होगी, यह संबंधित विभागीय नियमों, रिक्त पदों, पात्रता तथा प्रशासनिक निर्णयों पर निर्भर करेगा। अभी परिषद का मुख्य फोकस वरिष्ठता सूची को नियमों के अनुरूप तैयार कर निर्धारित समयसीमा में अंतिम रूप देने पर है।