जम्मू-कश्मीर में नशे के खिलाफ अभियान तेज, 4 हजार से अधिक गिरफ्तार
श्रीनगर, 2 अक्टूबर 2026। जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान के तहत पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (DGP) नलिन प्रभात के अनुसार, अप्रैल 2026 में शुरू किए गए ‘नशा मुक्त अभियान’ के बाद से अब तक 4,000 से अधिक लोगों को नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में

गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि मादक पदार्थों के नेटवर्क से जुड़ी संपत्तियों और वित्तीय संसाधनों पर भी कार्रवाई की जा रही है।
अप्रैल में शुरू हुआ था अभियान
जम्मू-कश्मीर में नशे की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से ‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर’ अभियान की शुरुआत 11 अप्रैल 2026 को की गई थी। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू से इस अभियान की शुरुआत की थी। अभियान का उद्देश्य नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के साथ-साथ युवाओं को नशे की गिरफ्त से दूर रखने और समाज में जागरूकता बढ़ाना है।
अभियान के दौरान पुलिस और प्रशासन ने नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई बढ़ाई है। अधिकारियों का जोर उन नेटवर्क तक पहुंचने पर भी है, जो मादक पदार्थों के कारोबार को संचालित करने या आर्थिक रूप से सहायता देने में भूमिका निभाते हैं।
3,257 मामलों में दर्ज हुई कार्रवाई
डीजीपी नलिन प्रभात ने श्रीनगर में आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ कार्यक्रम के दौरान अभियान की प्रगति की जानकारी दी। उनके अनुसार, 11 अप्रैल से अब तक जम्मू-कश्मीर पुलिस ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेज (NDPS) एक्ट के तहत 3,257 मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों में लगभग 4,000 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इसके अलावा 170 मामलों में दोषसिद्धि हो चुकी है, जबकि 2,500 से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
ये आंकड़े बताते हैं कि अभियान में पुलिस ने नशीले पदार्थों से संबंधित मामलों की जांच और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है। हालांकि गिरफ्तारियों की संख्या और दोषसिद्धि के आंकड़े अलग-अलग कानूनी चरणों को दर्शाते हैं, इसलिए गिरफ्तारी को दोषसिद्धि के समान नहीं माना जा सकता।
नशीले कारोबार से जुड़ी संपत्तियों पर भी कार्रवाई
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े आर्थिक संसाधनों पर भी कार्रवाई की है। डीजीपी के मुताबिक, अभियान के दौरान 288 संपत्तियां अटैच की गई हैं। इन संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 138 करोड़ रुपये बताया गया है। इसके अलावा पुलिस ने करीब 80 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं।
पुलिस के अनुसार, संपत्ति जब्ती और अटैचमेंट की कार्रवाई का उद्देश्य अवैध नशीले कारोबार से जुड़े आर्थिक ढांचे पर प्रहार करना है। अधिकारियों का मानना है कि केवल छोटे स्तर के आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय आर्थिक नेटवर्क पर भी कानूनी कार्रवाई जरूरी है।
PIT-NDPS कानून के तहत भी कार्रवाई
डीजीपी नलिन प्रभात ने बताया कि 144 आरोपियों के खिलाफ Prevention of Illicit Traffic in Narcotic Drugs and Psychotropic Substances (PIT-NDPS) Act के तहत कार्रवाई की गई है। उनके अनुसार, यह संख्या राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक बताई गई है।
PIT-NDPS कानून का इस्तेमाल अवैध मादक पदार्थों के कारोबार और उससे जुड़े नेटवर्क पर रोक लगाने के लिए किया जाता है। जम्मू-कश्मीर में इस कानून के तहत की गई कार्रवाई को अभियान के सख्त प्रवर्तन वाले हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
युवाओं को नशे से दूर रखने पर जोर
अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू युवाओं को नशे से दूर रखना भी है। ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ के तहत युवाओं के बीच जागरूकता और सकारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस की ओर से खेल और नागरिक सहभागिता से जुड़े कार्यक्रमों को भी युवाओं तक पहुंचने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
डीजीपी ने ‘रन फॉर यूनिटी’ और युवाओं की खेल गतिविधियों में भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा शांतिपूर्ण और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना और उन्हें नशे जैसी सामाजिक समस्या से दूर रखने के प्रयासों को मजबूत करना है।
केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं होगा समाधान
नशे की समस्या से निपटने के लिए कानून-व्यवस्था से जुड़ी कार्रवाई के साथ सामाजिक स्तर पर प्रयास भी महत्वपूर्ण हैं। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अभियान के दौरान स्थानीय समुदायों, युवाओं, शिक्षकों और अन्य सामाजिक समूहों की भागीदारी पर भी जोर दिया है। अप्रैल में अभियान की समीक्षा के दौरान जमीनी स्तर पर पंचायत और वार्ड स्तर तक लोगों को जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया गया था।
इसका मतलब यह है कि अभियान को केवल गिरफ्तारियों तक सीमित रखने के बजाय जागरूकता, रोकथाम और सामाजिक भागीदारी के साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। नशे की समस्या से प्रभावित लोगों के लिए उपचार और पुनर्वास जैसी व्यवस्थाएं भी दीर्घकालिक समाधान का हिस्सा हो सकती हैं।
पुलिस के सामने लगातार चुनौती
जम्मू-कश्मीर पुलिस के सामने नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ अन्य कानून-व्यवस्था संबंधी जिम्मेदारियां भी हैं। डीजीपी ने बताया कि पुलिस अपराध की रोकथाम, आपराधिक मामलों की जांच और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान चला रही है।
जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को नियंत्रित करना पुलिस और प्रशासन के लिए एक बहुआयामी चुनौती है। इसलिए अभियान में जांच, कानूनी कार्रवाई, आर्थिक संसाधनों पर नियंत्रण और जन-जागरूकता जैसे अलग-अलग पहलुओं को शामिल किया गया है।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
अप्रैल से शुरू हुए अभियान के आंकड़े बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों पर प्रवर्तन एजेंसियों ने व्यापक कार्रवाई की है। 3,257 NDPS मामले, 4,000 से अधिक गिरफ्तारियां, 170 दोषसिद्धियां, 2,500 से अधिक निपटाए गए मामले और 138 करोड़ रुपये की संपत्तियों का अटैचमेंट अभियान की अब तक की कार्रवाई को दर्शाते हैं।
आने वाले समय में अभियान की प्रभावशीलता इस बात से भी तय होगी कि अवैध नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर कितनी स्थायी रोक लगती है, युवाओं में जागरूकता कितनी बढ़ती है और प्रभावित लोगों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए किस स्तर पर सहायता मिलती है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन और पुलिस की ओर से अभियान को लगातार आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
निष्कर्ष: जम्मू-कश्मीर में अप्रैल 2026 से चल रहा नशा-विरोधी अभियान अब बड़े स्तर की पुलिस कार्रवाई में बदल चुका है। 4,000 से अधिक गिरफ्तारियों के साथ पुलिस ने नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई, संपत्ति अटैचमेंट और वित्तीय जब्ती पर भी ध्यान केंद्रित किया है। साथ ही युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता और सकारात्मक गतिविधियों को अभियान का हिस्सा बनाया गया है।