‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान को लेकर कांग्रेस की प्रेस वार्ता, 8 अक्टूबर को निकलेगा विरोध मार्च
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
उरई, जालौन। आगामी 8 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान को लेकर जिला एवं शहर कांग्रेस कमेटी तथा इंडिया गठबंधन के घटक दलों की संयुक्त प्रेस वार्ता बुधवार को कांग्रेस कार्यालय में आयोजित की गई। प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार और निर्वाचन व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए। नेताओं ने बताया कि इन्हीं मुद्दों को लेकर 8 अक्टूबर की शाम उरई में विरोध मार्च निकाला जाएगा।

कांग्रेस पदाधिकारियों के मुताबिक विरोध मार्च शाम चार बजे अंबेडकर चौराहे से शुरू होकर गांधी प्रतिमा, तहसील के सामने तक पहुंचेगा। पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ताओं, समर्थकों और इंडिया गठबंधन से जुड़े सहयोगी दलों से मार्च में शामिल होने का आह्वान किया है। नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता का वोट सबसे महत्वपूर्ण अधिकार है और इससे जुड़े किसी भी विवाद का निष्पक्ष तरीके से समाधान होना जरूरी है।
एसआईआर के मुद्दे पर कांग्रेस का विरोध
प्रेस वार्ता में जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष अरविंद्र सिंह सेंगर ने कहा कि प्रस्तावित विरोध मार्च में ‘एसआईआर वापस लो’ की मांग प्रमुख रूप से उठाई जाएगी। कांग्रेस नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां जाहिर कीं और निर्वाचन संबंधी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार का बदलाव सीधे तौर पर नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ा विषय है। इसलिए सूची के पुनरीक्षण अथवा संशोधन की प्रक्रिया में प्रत्येक स्तर पर पारदर्शिता, स्पष्टता और जवाबदेही होनी चाहिए। पार्टी का कहना है कि यदि किसी मतदाता का नाम सूची से हटाया जाता है तो उसके पीछे स्पष्ट कारण और निर्धारित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लेकर भी उठाए सवाल
प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी अपनी मांग रखी। नेताओं ने उनके पद से हटाए जाने तथा गिरफ्तारी की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों और मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा कराए जाने की मांग की।
कांग्रेस पदाधिकारियों ने कहा कि निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर जनता का विश्वास लोकतंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार निर्वाचन प्रक्रिया से संबंधित किसी भी शिकायत अथवा आरोप की निष्पक्ष जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। पार्टी नेताओं ने मांग की कि मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों की स्वतंत्र जांच हो और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदारी तय की जाए।
मतदाता सूची में नाम हटाने का लगाया आरोप
प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में गड़बड़ी के माध्यम से लोगों के मताधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की गई है। हालांकि ये आरोप कांग्रेस नेताओं की ओर से लगाए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक होगी।
वक्ताओं ने विशेष रूप से फॉर्म नंबर-7 के कथित दुरुपयोग का उल्लेख किया। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल करते हुए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। कांग्रेस नेताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया की गहन समीक्षा की जानी चाहिए।
नेताओं का कहना था कि किसी भी नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल होना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उसके लोकतांत्रिक अधिकार से जुड़ा विषय है। इसलिए मतदाता सूची में संशोधन करते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि वास्तविक मतदाताओं के नाम अनावश्यक रूप से न हटें।
विरोध मार्च के जरिए उठाई जाएगी आवाज
कांग्रेस ने इन मुद्दों को जनता के बीच ले जाने के लिए विरोध मार्च आयोजित करने का निर्णय लिया है। 8 अक्टूबर को प्रस्तावित मार्च अंबेडकर चौराहे से शुरू होगा और गांधी प्रतिमा, तहसील के सामने तक जाएगा। पार्टी नेताओं के अनुसार मार्च के दौरान लोकतंत्र, मताधिकार और मतदाता सूची की पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
कार्यक्रम को लेकर स्थानीय कांग्रेस संगठन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिला और शहर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों के साथ इंडिया गठबंधन के घटक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भागीदारी की उम्मीद जताई गई है। कांग्रेस का कहना है कि विरोध मार्च शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा और इसके माध्यम से संबंधित मुद्दों पर प्रशासन तथा निर्वाचन व्यवस्था का ध्यान आकर्षित किया जाएगा।
लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा पर जोर
प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आवश्यक हैं। उनके अनुसार चुनाव प्रक्रिया में मतदाता सूची की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसी सूची के आधार पर नागरिक मतदान करते हैं। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची में नहीं रहता है तो वह मतदान के अधिकार से वंचित हो सकता है।
इसी संदर्भ में कांग्रेस नेताओं ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े मामलों में अधिक पारदर्शिता की मांग की। उनका कहना है कि मतदाताओं को अपने नाम की स्थिति की जानकारी आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए तथा किसी भी प्रकार की आपत्ति या शिकायत के निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।
पार्टी नेताओं ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का समाधान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्य और स्वतंत्र जांच के आधार पर होना चाहिए। इससे मतदाताओं के बीच विश्वास मजबूत होगा और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी।
इंडिया गठबंधन के घटक दलों की मौजूदगी
संयुक्त प्रेस वार्ता में कांग्रेस के साथ इंडिया गठबंधन के घटक दलों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। नेताओं ने अभियान को लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा बताते हुए प्रस्तावित विरोध मार्च में भागीदारी की बात कही।
प्रेस वार्ता में नगर अध्यक्ष राजकुमार वर्मा, रेहान सिद्दगी, आयुव अंसारी, राघवेंद्र प्रताप सिंह, देवेश चौरसिया, कामरेड विनय पाठक और नफीस पठान समेत कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 8 अक्टूबर का कार्यक्रम केवल एक राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मतदाता सूची और मतदान के अधिकार से जुड़े सवालों को सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाने का प्रयास होगा। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा जरूरी है।
प्रशासन और निर्वाचन व्यवस्था पर निगाह
विरोध मार्च की घोषणा के बाद अब प्रशासन और स्थानीय पुलिस की ओर से भी कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था पर नजर रखे जाने की संभावना है। सार्वजनिक स्थान पर प्रस्तावित मार्च को देखते हुए भीड़ प्रबंधन और यातायात संचालन जैसे विषय भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
कांग्रेस ने अपने अभियान के माध्यम से जिन आरोपों और मांगों को उठाया है, उन पर आगे राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज होने की उम्मीद है। विशेष रूप से एसआईआर, मतदाता सूची में नाम हटाए जाने के आरोप और फॉर्म नंबर-7 के कथित दुरुपयोग जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं।
फिलहाल कांग्रेस ने 8 अक्टूबर की शाम चार बजे अंबेडकर चौराहे से गांधी प्रतिमा तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है। पार्टी नेताओं ने इसे ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान का महत्वपूर्ण चरण बताया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि मार्च में कितनी भागीदारी होती है और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े इन मुद्दों पर प्रशासन तथा संबंधित संस्थाओं की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।