राजकीय मेडिकल कॉलेज उरई में NDRF का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण, 415 प्रतिभागियों ने सीखे राहत-बचाव और प्राथमिक उपचार के गुर

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई, 8 अक्टूबर 2026। राजकीय मेडिकल कॉलेज, उरई में गुरुवार को आपदा प्रबंधन और प्राथमिक उपचार को लेकर विशेष जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 8वीं वाहिनी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 8(ए) टीम ने मेडिकल कॉलेज परिसर में FAMEx यानी परिचयात्मक एवं जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों और कर्मचारियों को आपात परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से काम करने के तौर-तरीके बताए। प्रशिक्षण का उद्देश्य आपदा के समय घबराहट को कम करना, सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करना और जरूरतमंदों को तत्काल प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने की क्षमता विकसित करना रहा।

कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग छात्र-छात्राओं के साथ-साथ फैकल्टी, नर्सिंग स्टाफ, सुरक्षा कर्मियों, वार्ड बॉय, आउटसोर्स कर्मचारियों और सफाई कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। कुल 415 प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार की आपदाओं और आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

मेडिकल कॉलेज में आपदा के दौरान तैयारी पर जोर

कार्यक्रम के दौरान प्रो. डॉ. प्रेम सिंह, सीएमएस तथा डॉ. प्रशांत निरंजन, चिकित्सा अधीक्षक की उपस्थिति रही। NDRF टीम के प्रशिक्षित सदस्यों ने बताया कि किसी भी आपदा के दौरान शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में यदि मौजूद लोगों को सही प्रक्रिया की जानकारी हो तो जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को समझाया कि आपदा से निपटने की तैयारी केवल घटना के बाद शुरू नहीं होनी चाहिए। इसके लिए पहले से संभावित जोखिमों की पहचान, सुरक्षित रास्तों की जानकारी, निकासी की योजना और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों में यह तैयारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यहां मरीजों के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थी, चिकित्सकीय कर्मचारी और अन्य लोग मौजूद रहते हैं।

भूकंप के समय क्या करें, कराया गया अभ्यास

प्रशिक्षण के दौरान भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के समय बरती जाने वाली सावधानियों पर विशेष चर्चा की गई। NDRF कर्मियों ने बताया कि भूकंप के दौरान जल्दबाजी में भागने के बजाय सुरक्षित स्थान का चयन करना और स्थिति सामान्य होने तक सावधानी बनाए रखना जरूरी है।

प्रतिभागियों को सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि किसी भवन को खाली कराते समय लोगों की भीड़ को नियंत्रित करना, निर्धारित सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना और कमजोर या घायल लोगों की मदद करना महत्वपूर्ण होता है।

आग लगने पर शुरुआती कार्रवाई का प्रशिक्षण

मेडिकल कॉलेज जैसे संवेदनशील परिसर में अग्नि सुरक्षा को देखते हुए NDRF टीम ने प्रारंभिक अग्निशमन तकनीकों का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों को बताया गया कि आग लगने की स्थिति में सबसे पहले आसपास मौजूद लोगों को सतर्क करना और सुरक्षित स्थान की ओर ले जाना जरूरी है।

प्रशिक्षण के दौरान आग के शुरुआती चरण में उपलब्ध संसाधनों का सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करने और आपातकालीन स्थिति में समन्वित कार्रवाई करने के बारे में जानकारी दी गई। कर्मचारियों को यह भी समझाया गया कि आग की घटना के दौरान अफवाह या घबराहट की स्थिति पैदा होने से बचना चाहिए और प्रशिक्षित तरीके से लोगों को बाहर निकालना चाहिए।

सर्पदंश और बाढ़ से बचाव की जानकारी

ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए NDRF टीम ने सर्पदंश के मामलों में प्राथमिक उपचार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। प्रतिभागियों को बताया गया कि ऐसे मामलों में घबराने के बजाय पीड़ित को जल्द से जल्द उचित चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।

इसी तरह बाढ़ जैसी परिस्थितियों में सुरक्षित बचाव के उपायों पर भी प्रशिक्षण दिया गया। टीम ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री का उपयोग करके तैरने में सहायता देने वाले उपकरण तैयार करने का प्रदर्शन किया। इसका उद्देश्य यह समझाना था कि आपदा की स्थिति में सीमित संसाधनों के बावजूद सुरक्षित और व्यावहारिक उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

CPR और BLS जैसी जीवनरक्षक तकनीकों का प्रदर्शन

प्रशिक्षण कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा जीवनरक्षक प्रक्रियाओं से संबंधित रहा। NDRF कर्मियों ने CPR और BLS जैसी तकनीकों के बारे में जानकारी दी। प्रतिभागियों को बताया गया कि किसी व्यक्ति के अचानक बेहोश होने या गंभीर आपात स्थिति में शुरुआती सहायता किस प्रकार दी जा सकती है।

इसके साथ ही FBAO से संबंधित प्रक्रिया और रक्तस्राव को नियंत्रित करने के उपायों की जानकारी भी दी गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को यह समझाना था कि चिकित्सकीय सहायता पहुंचने से पहले सही प्राथमिक प्रतिक्रिया कई परिस्थितियों में बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।

स्थानीय संसाधनों से स्ट्रेचर बनाने का प्रदर्शन

आपदा की स्थिति में घायल व्यक्ति को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना भी बड़ी चुनौती हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए NDRF टीम ने स्थानीय संसाधनों की सहायता से स्ट्रेचर तैयार करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन किया।

प्रशिक्षकों ने बताया कि यदि सामान्य आपातकालीन उपकरण तत्काल उपलब्ध न हों, तो आसपास मौजूद सुरक्षित और उपयुक्त सामग्री का इस्तेमाल करके घायल व्यक्ति को स्थानांतरित करने का वैकल्पिक इंतजाम किया जा सकता है। साथ ही घायल व्यक्ति को उठाने और सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई।

सड़क दुर्घटना और डूबने की घटनाओं पर भी प्रशिक्षण

सड़क दुर्घटनाओं के दौरान तत्काल प्रतिक्रिया को लेकर भी प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया। टीम ने बताया कि दुर्घटना स्थल पर पहुंचने के बाद सबसे पहले अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए और इसके बाद घायल व्यक्ति की स्थिति के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

डूबने की घटनाओं में बचाव और सुरक्षा उपायों पर भी प्रशिक्षण दिया गया। इसके अतिरिक्त आकाशीय बिजली से होने वाले जोखिमों से बचने के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी भी साझा की गई। इस दौरान प्रतिभागियों को प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े जोखिमों को समझने और सुरक्षित व्यवहार अपनाने पर जोर दिया गया।

415 लोगों ने लिया प्रशिक्षण

FAMEx कार्यक्रम में कुल 415 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इनमें 100 नर्सिंग छात्र-छात्राएं, 25 फैकल्टी सदस्य, 30 सुरक्षा गार्ड, 100 नर्सिंग जनरल स्टाफ, 75 वार्ड बॉय, 50 आउटसोर्स कर्मचारी और 35 सफाई कर्मचारी शामिल रहे।

इस व्यापक भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ कि आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल चिकित्सकों या विशेषज्ञों तक सीमित नहीं है। अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति को आपातकालीन परिस्थितियों में अपनी भूमिका और जिम्मेदारी की जानकारी होना जरूरी है।

प्रशिक्षण से बढ़ेगी आपात प्रतिक्रिया क्षमता

NDRF टीम ने प्रतिभागियों को संदेश दिया कि किसी भी आपदा के समय घबराहट के बजाय संयम, प्रशिक्षण और आपसी समन्वय के साथ कार्रवाई की जानी चाहिए। अस्पताल जैसे संस्थानों में आपातकालीन प्रतिक्रिया जितनी व्यवस्थित होगी, उतना ही बेहतर तरीके से मरीजों और अन्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

राजकीय मेडिकल कॉलेज, उरई में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए केवल एक जागरूकता गतिविधि नहीं, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में उपयोगी साबित होने वाला व्यावहारिक प्रशिक्षण भी रहा। भूकंप, आग, बाढ़, सर्पदंश, सड़क दुर्घटना, डूबने और अन्य आपात स्थितियों के दौरान प्राथमिक स्तर पर सही कदम उठाने की जानकारी प्रतिभागियों को दी गई।

कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि आपदा कभी भी और कहीं भी आ सकती है। ऐसी स्थिति में पहले से प्रशिक्षित और तैयार लोग न केवल स्वयं को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि आसपास मौजूद अन्य लोगों की मदद भी प्रभावी ढंग से कर सकते हैं। मेडिकल कॉलेज में आयोजित NDRF का यह प्रशिक्षण भविष्य में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

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राजकीय मेडिकल कॉलेज उरई में NDRF का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण, 415 प्रतिभागियों ने सीखे राहत-बचाव और प्राथमिक उपचार के गुर

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 8, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई, 8 अक्टूबर 2026। राजकीय मेडिकल कॉलेज, उरई में गुरुवार को आपदा प्रबंधन और प्राथमिक उपचार को लेकर विशेष जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 8वीं वाहिनी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 8(ए) टीम ने मेडिकल कॉलेज परिसर में FAMEx यानी परिचयात्मक एवं जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों और कर्मचारियों को आपात परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से काम करने के तौर-तरीके बताए। प्रशिक्षण का उद्देश्य आपदा के समय घबराहट को कम करना, सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करना और जरूरतमंदों को तत्काल प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने की क्षमता विकसित करना रहा।

कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग छात्र-छात्राओं के साथ-साथ फैकल्टी, नर्सिंग स्टाफ, सुरक्षा कर्मियों, वार्ड बॉय, आउटसोर्स कर्मचारियों और सफाई कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। कुल 415 प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार की आपदाओं और आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

मेडिकल कॉलेज में आपदा के दौरान तैयारी पर जोर

कार्यक्रम के दौरान प्रो. डॉ. प्रेम सिंह, सीएमएस तथा डॉ. प्रशांत निरंजन, चिकित्सा अधीक्षक की उपस्थिति रही। NDRF टीम के प्रशिक्षित सदस्यों ने बताया कि किसी भी आपदा के दौरान शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में यदि मौजूद लोगों को सही प्रक्रिया की जानकारी हो तो जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को समझाया कि आपदा से निपटने की तैयारी केवल घटना के बाद शुरू नहीं होनी चाहिए। इसके लिए पहले से संभावित जोखिमों की पहचान, सुरक्षित रास्तों की जानकारी, निकासी की योजना और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों में यह तैयारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यहां मरीजों के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थी, चिकित्सकीय कर्मचारी और अन्य लोग मौजूद रहते हैं।

भूकंप के समय क्या करें, कराया गया अभ्यास

प्रशिक्षण के दौरान भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के समय बरती जाने वाली सावधानियों पर विशेष चर्चा की गई। NDRF कर्मियों ने बताया कि भूकंप के दौरान जल्दबाजी में भागने के बजाय सुरक्षित स्थान का चयन करना और स्थिति सामान्य होने तक सावधानी बनाए रखना जरूरी है।

प्रतिभागियों को सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि किसी भवन को खाली कराते समय लोगों की भीड़ को नियंत्रित करना, निर्धारित सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना और कमजोर या घायल लोगों की मदद करना महत्वपूर्ण होता है।

आग लगने पर शुरुआती कार्रवाई का प्रशिक्षण

मेडिकल कॉलेज जैसे संवेदनशील परिसर में अग्नि सुरक्षा को देखते हुए NDRF टीम ने प्रारंभिक अग्निशमन तकनीकों का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों को बताया गया कि आग लगने की स्थिति में सबसे पहले आसपास मौजूद लोगों को सतर्क करना और सुरक्षित स्थान की ओर ले जाना जरूरी है।

प्रशिक्षण के दौरान आग के शुरुआती चरण में उपलब्ध संसाधनों का सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करने और आपातकालीन स्थिति में समन्वित कार्रवाई करने के बारे में जानकारी दी गई। कर्मचारियों को यह भी समझाया गया कि आग की घटना के दौरान अफवाह या घबराहट की स्थिति पैदा होने से बचना चाहिए और प्रशिक्षित तरीके से लोगों को बाहर निकालना चाहिए।

सर्पदंश और बाढ़ से बचाव की जानकारी

ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए NDRF टीम ने सर्पदंश के मामलों में प्राथमिक उपचार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। प्रतिभागियों को बताया गया कि ऐसे मामलों में घबराने के बजाय पीड़ित को जल्द से जल्द उचित चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।

इसी तरह बाढ़ जैसी परिस्थितियों में सुरक्षित बचाव के उपायों पर भी प्रशिक्षण दिया गया। टीम ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री का उपयोग करके तैरने में सहायता देने वाले उपकरण तैयार करने का प्रदर्शन किया। इसका उद्देश्य यह समझाना था कि आपदा की स्थिति में सीमित संसाधनों के बावजूद सुरक्षित और व्यावहारिक उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

CPR और BLS जैसी जीवनरक्षक तकनीकों का प्रदर्शन

प्रशिक्षण कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा जीवनरक्षक प्रक्रियाओं से संबंधित रहा। NDRF कर्मियों ने CPR और BLS जैसी तकनीकों के बारे में जानकारी दी। प्रतिभागियों को बताया गया कि किसी व्यक्ति के अचानक बेहोश होने या गंभीर आपात स्थिति में शुरुआती सहायता किस प्रकार दी जा सकती है।

इसके साथ ही FBAO से संबंधित प्रक्रिया और रक्तस्राव को नियंत्रित करने के उपायों की जानकारी भी दी गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को यह समझाना था कि चिकित्सकीय सहायता पहुंचने से पहले सही प्राथमिक प्रतिक्रिया कई परिस्थितियों में बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।

स्थानीय संसाधनों से स्ट्रेचर बनाने का प्रदर्शन

आपदा की स्थिति में घायल व्यक्ति को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना भी बड़ी चुनौती हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए NDRF टीम ने स्थानीय संसाधनों की सहायता से स्ट्रेचर तैयार करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन किया।

प्रशिक्षकों ने बताया कि यदि सामान्य आपातकालीन उपकरण तत्काल उपलब्ध न हों, तो आसपास मौजूद सुरक्षित और उपयुक्त सामग्री का इस्तेमाल करके घायल व्यक्ति को स्थानांतरित करने का वैकल्पिक इंतजाम किया जा सकता है। साथ ही घायल व्यक्ति को उठाने और सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई।

सड़क दुर्घटना और डूबने की घटनाओं पर भी प्रशिक्षण

सड़क दुर्घटनाओं के दौरान तत्काल प्रतिक्रिया को लेकर भी प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया। टीम ने बताया कि दुर्घटना स्थल पर पहुंचने के बाद सबसे पहले अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए और इसके बाद घायल व्यक्ति की स्थिति के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

डूबने की घटनाओं में बचाव और सुरक्षा उपायों पर भी प्रशिक्षण दिया गया। इसके अतिरिक्त आकाशीय बिजली से होने वाले जोखिमों से बचने के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी भी साझा की गई। इस दौरान प्रतिभागियों को प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े जोखिमों को समझने और सुरक्षित व्यवहार अपनाने पर जोर दिया गया।

415 लोगों ने लिया प्रशिक्षण

FAMEx कार्यक्रम में कुल 415 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इनमें 100 नर्सिंग छात्र-छात्राएं, 25 फैकल्टी सदस्य, 30 सुरक्षा गार्ड, 100 नर्सिंग जनरल स्टाफ, 75 वार्ड बॉय, 50 आउटसोर्स कर्मचारी और 35 सफाई कर्मचारी शामिल रहे।

इस व्यापक भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ कि आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल चिकित्सकों या विशेषज्ञों तक सीमित नहीं है। अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति को आपातकालीन परिस्थितियों में अपनी भूमिका और जिम्मेदारी की जानकारी होना जरूरी है।

प्रशिक्षण से बढ़ेगी आपात प्रतिक्रिया क्षमता

NDRF टीम ने प्रतिभागियों को संदेश दिया कि किसी भी आपदा के समय घबराहट के बजाय संयम, प्रशिक्षण और आपसी समन्वय के साथ कार्रवाई की जानी चाहिए। अस्पताल जैसे संस्थानों में आपातकालीन प्रतिक्रिया जितनी व्यवस्थित होगी, उतना ही बेहतर तरीके से मरीजों और अन्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

राजकीय मेडिकल कॉलेज, उरई में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए केवल एक जागरूकता गतिविधि नहीं, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में उपयोगी साबित होने वाला व्यावहारिक प्रशिक्षण भी रहा। भूकंप, आग, बाढ़, सर्पदंश, सड़क दुर्घटना, डूबने और अन्य आपात स्थितियों के दौरान प्राथमिक स्तर पर सही कदम उठाने की जानकारी प्रतिभागियों को दी गई।

कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि आपदा कभी भी और कहीं भी आ सकती है। ऐसी स्थिति में पहले से प्रशिक्षित और तैयार लोग न केवल स्वयं को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि आसपास मौजूद अन्य लोगों की मदद भी प्रभावी ढंग से कर सकते हैं। मेडिकल कॉलेज में आयोजित NDRF का यह प्रशिक्षण भविष्य में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।