बिलासपुर में आशा कार्यकर्ताओं का 15वें दिन भी प्रदर्शन, ₹26 हजार मानदेय की मांग पर अड़ीं कार्यकर्ता
महिपाल सिंह
हिट एंड हॉट न्यूज़ संवाददाता रामपुर
बिलासपुर, रामपुर, 8 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के बिलासपुर क्षेत्र में आशा कार्यकर्ताओं और आशा संगिनियों का मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन लगातार जारी है। प्रदर्शन का आज 15वां दिन बताया जा रहा है। लंबे समय से चल रहे इस धरने में शामिल स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने सरकार से अपनी आर्थिक स्थिति और बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए मासिक मानदेय बढ़ाकर 26 हजार रुपये करने की मांग दोहराई है।

प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद उनकी आय सीमित है और मौजूदा महंगाई के दौर में परिवार का खर्च चलाना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाया है।
15 दिन से जारी है आंदोलन
बिलासपुर में आशा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन कई दिनों से लगातार चल रहा है। आंदोलन के 15वें दिन भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता अपनी मांगों के समर्थन में धरना स्थल पर मौजूद रहीं। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर नारे लगाए और सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल एक-दो क्षेत्रों तक सीमित विरोध नहीं है, बल्कि जिले के अलग-अलग हिस्सों में भी आशा कार्यकर्ताओं के बीच अपनी मांगों को लेकर असंतोष है। प्रदर्शन से जुड़े लोगों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रखने की बात कही जा रही है।
₹26 हजार मासिक मानदेय की प्रमुख मांग
आशा कार्यकर्ताओं के आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग उनके मासिक मानदेय में बढ़ोतरी से जुड़ी है। प्रदर्शनकारी सरकार से 26,000 रुपये प्रति माह देने की मांग कर रही हैं। उनका तर्क है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई, आने-जाने का खर्च और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना कठिन हो रहा है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था में उनकी जिम्मेदारियां काफी व्यापक हैं। वे गर्भवती महिलाओं और बच्चों से संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण, स्वास्थ्य जागरूकता तथा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने जैसे कार्यों में स्थानीय स्तर पर सहयोग करती हैं। ऐसे में उनके मानदेय को उनकी जिम्मेदारियों और काम की प्रकृति के अनुरूप बढ़ाया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका
आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग और आम जनता के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करती हैं। गांवों और स्थानीय बस्तियों में स्वास्थ्य संबंधी सरकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने में इनकी भूमिका रहती है। कई परिवारों को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने, टीकाकरण और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जानकारी देने में आशा कार्यकर्ताओं से मदद मिलती है।
प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का कहना है कि क्षेत्र में काम करते हुए उन्हें विभिन्न परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद वे स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारियों को निभाती रही हैं। उनका कहना है कि काम की जिम्मेदारियों और आर्थिक जरूरतों के बीच बेहतर संतुलन के लिए सम्मानजनक और पर्याप्त मानदेय जरूरी है।
महंगाई को लेकर जताई चिंता
आंदोलन में शामिल कार्यकर्ताओं ने बढ़ती महंगाई को अपनी मांग का एक प्रमुख आधार बताया है। उनका कहना है कि पिछले कुछ समय में रोजमर्रा की वस्तुओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन समेत कई आवश्यकताओं पर खर्च बढ़ा है। ऐसे में सीमित आय में परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल होता जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, उनकी मांग केवल मानदेय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके श्रम के उचित मूल्य और आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ी हुई है। उनका मानना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिला कार्यकर्ताओं की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए।
प्रदर्शन में स्थानीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी
बिलासपुर में चल रहे इस आंदोलन के दौरान कई स्थानीय प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी भी सामने आई। प्रदर्शन स्थल पर प्रीति यादव, शोभा रानी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। इस दौरान आंदोलन में शामिल महिलाओं ने सामूहिक रूप से अपनी आवाज बुलंद की और मांगों के समर्थन में नारे लगाए।
धरना स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए कहा कि वे अपनी मांग को लेकर पीछे हटने के बजाय इसे लगातार उठाती रहेंगी। आंदोलन से जुड़े लोगों ने जिलेभर में इस मुद्दे को मजबूती से उठाने की बात कही है।
सरकार से संवाद और समाधान की उम्मीद
आशा कार्यकर्ताओं का आंदोलन लगातार आगे बढ़ने के साथ अब सरकार और प्रशासन की ओर से संभावित प्रतिक्रिया पर भी नजर बनी हुई है। प्रदर्शनकारी चाहती हैं कि उनकी समस्याओं को सुना जाए और उनकी मांगों के समाधान के लिए बातचीत की प्रक्रिया शुरू की जाए।
आंदोलनकारियों का कहना है कि वे टकराव नहीं बल्कि अपनी समस्याओं का समाधान चाहती हैं। यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल करती है तो आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति पर भी विचार किया जा सकता है। फिलहाल प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर कायम हैं।
जिलेभर में आंदोलन जारी रखने का दावा
प्रदर्शन से जुड़े आयोजकों की ओर से कहा गया है कि यह आंदोलन केवल बिलासपुर तक सीमित नहीं है। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी आशा कार्यकर्ताओं के बीच इस मांग को लेकर समर्थन होने की बात कही गई है। आयोजकों ने संकेत दिया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन को जारी रखा जाएगा।
15वें दिन भी जारी प्रदर्शन से यह स्पष्ट है कि आशा कार्यकर्ता अपनी मांग को लेकर गंभीर हैं। लगातार नारेबाजी और धरने के जरिए वे सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रही हैं।
आगे क्या होगा, इस पर नजर
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि लंबे समय से चल रहे इस आंदोलन पर सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्या कदम उठाया जाता है। आशा कार्यकर्ताओं की मांग सीधे उनके मानदेय और आर्थिक स्थिति से जुड़ी है, इसलिए आने वाले दिनों में प्रशासनिक स्तर पर बातचीत या किसी निर्णय की संभावना पर सभी की नजर रहेगी।
फिलहाल बिलासपुर में आशा कार्यकर्ताओं और आशा संगिनियों का आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारी 26 हजार रुपये मासिक मानदेय की मांग को लेकर अपनी आवाज उठा रही हैं और उनका कहना है कि मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा। आंदोलन के आगे बढ़ने के साथ ही इसका असर जिले के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े जमीनी कामकाज पर कितना पड़ता है और सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।