उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की जालौन इकाई का गठन, नई कार्यकारिणी की घोषणा के बाद बही काव्य रसधारा

0

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई (जालौन)। जनपद जालौन में साहित्यिक गतिविधियों को नई दिशा देने और कवियों एवं साहित्यकारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की जिला इकाई का गठन किया गया। इस अवसर पर जिला कार्यकारिणी की घोषणा के साथ ही काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को भावनाओं, संवेदनाओं, हास्य और सामाजिक सरोकारों से जोड़ा। कार्यक्रम में साहित्य के प्रति समर्पण और जिले में रचनात्मक वातावरण को मजबूत बनाने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।

राजेंद्र नगर स्थित सिटी लाइफ स्कूल में आयोजित इस साहित्यिक कार्यक्रम में नई कार्यकारिणी की घोषणा को लेकर उत्साह दिखाई दिया। उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के प्रधान संयोजक एवं अंतरराष्ट्रीय कवि सर्वेश अस्थाना, अध्यक्ष बलराम श्रीवास्तव तथा सभा के मुख्य समन्वयक गिरधर खरे के अनुमोदन के बाद जिला संयोजक शफीकुर्रहमान कशफी और जिलाध्यक्ष डॉ. अनुज भदौरिया ने जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के नामों की घोषणा की।

नई जिला कार्यकारिणी में साहित्यकारों को मिली जिम्मेदारी

कार्यक्रम के दौरान संगठन के विभिन्न पदों पर साहित्य से जुड़े लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई। सिद्धार्थ त्रिपाठी को जिला इकाई का वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया। श्रीमती प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम और श्रीमती इंदु विवेक उदैनिया विवेकानंद को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई।

राघवेंद्र कनकने को सचिव/महासचिव, श्रीमती शिखा गर्ग को कोषाध्यक्ष, जबकि श्रीमती शिरोमणि सोनी और श्रीमती गरिमा पाठक को सहसचिव नियुक्त किया गया। दिव्यांशु दिव्य को प्रचार सचिव तथा श्रीमती सीता खरे को संगठन सचिव बनाया गया।

इसके अलावा श्रीमती संगीता द्विवेदी, सुश्री प्रगति मिश्रा और अवध नारायण द्विवेदी को कार्यकारिणी में सदस्य के रूप में शामिल किया गया। संगठन की ओर से यह भी बताया गया कि कोंच, कालपी, माधौगढ़, रामपुरा और जालौन तहसीलों के प्रभारी पदाधिकारियों की घोषणा जल्द की जाएगी। इससे जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में साहित्यिक गतिविधियों को विस्तार देने और स्थानीय रचनाकारों को जोड़ने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

वाणी वंदना और नात-ए-पाक से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत शिरोमणि सोनी की वाणी वंदना से हुई। इसके बाद बुंदेलखंड में रफी के नाम से प्रसिद्ध मिर्जा साबिर बेग ने नात-ए-पाक प्रस्तुत की। आध्यात्मिक और साहित्यिक भावनाओं से ओतप्रोत प्रस्तुतियों के बाद काव्य गोष्ठी ने गति पकड़ी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता शायर असरार अहमद मुकर्री और हास्य कवि कृपाराम कृपालु ने की। मंच पर उपस्थित रचनाकारों ने अपनी-अपनी विधा में रचनाएं सुनाकर श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया। कहीं पारिवारिक रिश्तों की गहराई देखने को मिली, तो कहीं बुजुर्गों के सम्मान, सामाजिक बदलाव और मानवीय संवेदनाओं को शब्दों में पिरोया गया।

कविताओं में उभरे परिवार, रिश्ते और जीवन के अनुभव

काव्य गोष्ठी में राघवेंद्र कनकने ने प्रेम और पारिवारिक स्नेह पर केंद्रित अपनी रचना प्रस्तुत की। उनकी पंक्तियों में अपनों के प्रति समर्पण और पिता के प्रेम की भावना दिखाई दी। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को पारिवारिक रिश्तों के महत्व से जोड़ने का प्रयास किया।

इसके बाद शिखा गर्ग ने मां के दर्द और भावनात्मक संवेदनाओं को अपनी कविता के माध्यम से व्यक्त किया। उनकी रचना में मां के आंसुओं, उसकी पीड़ा और संतान के प्रति उसके निस्वार्थ स्नेह का मार्मिक चित्रण सामने आया। प्रस्तुति ने मातृत्व से जुड़ी भावनाओं को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया।

सिद्धार्थ त्रिपाठी ने अपनी रचना में विश्वास और रिश्तों के अनुभवों को प्रमुखता दी। उनकी कविता में उन लोगों के व्यवहार पर विचार दिखाई दिया, जिन पर व्यक्ति भरोसा करता है, लेकिन वही विश्वास कभी-कभी उसे कठिन परिस्थितियों में पहुंचा देता है। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को संबंधों की वास्तविकता पर सोचने का अवसर दिया।

दिव्यांशु दिव्य ने बदलते पारिवारिक मूल्यों और बुजुर्गों के प्रति जिम्मेदारी के विषय को उठाया। उनकी रचना में जीवनकाल में माता-पिता की देखभाल और उनके निधन के बाद किए जाने वाले धार्मिक कर्मों के बीच दिखाई देने वाले अंतर पर सवाल खड़ा किया गया। कविता का संदेश था कि बुजुर्गों का सम्मान केवल परंपराओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके जीवनकाल में भी उनकी आवश्यकताओं और भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।

बुजुर्गों के आशीर्वाद और पिता के संघर्ष को मिला स्वर

शिरोमणि सोनी ने अपनी रचना के जरिए बुजुर्गों के आशीर्वाद की महत्ता बताई। उनकी कविता में यह भाव उभरकर सामने आया कि घर के वरिष्ठ सदस्यों का स्नेह और आशीर्वाद परिवार को सुख, शांति और मजबूती प्रदान करता है। उनकी प्रस्तुति ने पारिवारिक संस्कारों और बड़ों के सम्मान का संदेश दिया।

हास्य कवि कृपाराम कृपालु ने अपनी रचना के माध्यम से पिता के संघर्ष और उनकी भावनाओं को सामने रखा। उनकी कविता में पिता द्वारा परिवार की परेशानियों को स्वयं तक सीमित रखने और बच्चों को कठिनाइयों से बचाने के प्रयास का उल्लेख था। रचना ने पिता के त्याग और उनके मौन संघर्ष को भावपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत किया।

वहीं शायर असरार अहमद मुकर्री ने हास्य और व्यंग्य से भरपूर अंदाज में अपनी रचना सुनाई। उनकी प्रस्तुति में पड़ोसी से विवाद और पुलिस थाने तक पहुंचने की स्थिति को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किया गया। उनकी शायरी ने गोष्ठी के वातावरण में हास्य का रंग भर दिया और श्रोताओं को मनोरंजन का अवसर मिला।

संचालन के दौरान कशफी ने भी सुनाया कलाम

कार्यक्रम का संचालन कर रहे जिला संयोजक शफीकुर्रहमान कशफी ने भी अपना कलाम प्रस्तुत किया। उनकी रचना में साहित्यिक परंपरा, रचनात्मक विरासत और पूर्ववर्ती शायरों के प्रभाव को स्वीकार करने का भाव दिखाई दिया। उन्होंने अपनी पंक्तियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि किसी रचनाकार की अभिव्यक्ति में उसकी व्यक्तिगत प्रतिभा के साथ-साथ साहित्यिक परंपराओं का योगदान भी महत्वपूर्ण होता है।

पूरी गोष्ठी के दौरान अलग-अलग विषयों पर प्रस्तुत रचनाओं ने कार्यक्रम को विविधता प्रदान की। प्रेम, मां की ममता, पिता के त्याग, बुजुर्गों के सम्मान और सामाजिक व्यवहार जैसे विषयों ने श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ा, जबकि हास्य और व्यंग्य ने आयोजन को सहज और जीवंत बनाए रखा।

साहित्य की लौ को निरंतर जलाए रखने का संकल्प

कार्यक्रम के समापन अवसर पर उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के जिलाध्यक्ष डॉ. अनुज भदौरिया ने संगठन के उद्देश्यों और भविष्य की कार्ययोजना पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि साहित्य सभा अपने मूल उद्देश्यों को पूरी मेहनत और प्रतिबद्धता के साथ पूरा करेगी। संगठन की योजनाओं को केवल घोषणा तक सीमित न रखते हुए उन्हें व्यवहार में उतारने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने साहित्यकारों और पदाधिकारियों से सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि सभी के सहयोग से जनपद में साहित्यिक गतिविधियों को मजबूत बनाया जाएगा और साहित्य की लौ को कभी मंद नहीं पड़ने दिया जाएगा। नई कार्यकारिणी के गठन को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।

कार्यक्रम के अंत में तांछल सर ने उपस्थित अतिथियों, पदाधिकारियों, कवियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया।

उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की जालौन जिला इकाई के गठन और काव्य गोष्ठी के आयोजन से स्थानीय साहित्यिक गतिविधियों को नया आधार मिला। नई जिम्मेदारियों के साथ संगठन के सामने जिले के रचनाकारों को एक मंच पर लाने, काव्य गोष्ठियों को प्रोत्साहित करने और साहित्यिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी होगी। कार्यक्रम में व्यक्त विचारों से स्पष्ट हुआ कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को संवेदनशील बनाने, रिश्तों के महत्व को समझाने और सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा देने का सशक्त साधन भी है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें

ताज़ा खबरें • ब्रेकिंग न्यूज़ • नेशनल और इंटरनेशनल अपडेट

उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की जालौन इकाई का गठन, नई कार्यकारिणी की घोषणा के बाद बही काव्य रसधारा

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 12, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई (जालौन)। जनपद जालौन में साहित्यिक गतिविधियों को नई दिशा देने और कवियों एवं साहित्यकारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की जिला इकाई का गठन किया गया। इस अवसर पर जिला कार्यकारिणी की घोषणा के साथ ही काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को भावनाओं, संवेदनाओं, हास्य और सामाजिक सरोकारों से जोड़ा। कार्यक्रम में साहित्य के प्रति समर्पण और जिले में रचनात्मक वातावरण को मजबूत बनाने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।

राजेंद्र नगर स्थित सिटी लाइफ स्कूल में आयोजित इस साहित्यिक कार्यक्रम में नई कार्यकारिणी की घोषणा को लेकर उत्साह दिखाई दिया। उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के प्रधान संयोजक एवं अंतरराष्ट्रीय कवि सर्वेश अस्थाना, अध्यक्ष बलराम श्रीवास्तव तथा सभा के मुख्य समन्वयक गिरधर खरे के अनुमोदन के बाद जिला संयोजक शफीकुर्रहमान कशफी और जिलाध्यक्ष डॉ. अनुज भदौरिया ने जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के नामों की घोषणा की।

नई जिला कार्यकारिणी में साहित्यकारों को मिली जिम्मेदारी

कार्यक्रम के दौरान संगठन के विभिन्न पदों पर साहित्य से जुड़े लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई। सिद्धार्थ त्रिपाठी को जिला इकाई का वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया। श्रीमती प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम और श्रीमती इंदु विवेक उदैनिया विवेकानंद को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई।

राघवेंद्र कनकने को सचिव/महासचिव, श्रीमती शिखा गर्ग को कोषाध्यक्ष, जबकि श्रीमती शिरोमणि सोनी और श्रीमती गरिमा पाठक को सहसचिव नियुक्त किया गया। दिव्यांशु दिव्य को प्रचार सचिव तथा श्रीमती सीता खरे को संगठन सचिव बनाया गया।

इसके अलावा श्रीमती संगीता द्विवेदी, सुश्री प्रगति मिश्रा और अवध नारायण द्विवेदी को कार्यकारिणी में सदस्य के रूप में शामिल किया गया। संगठन की ओर से यह भी बताया गया कि कोंच, कालपी, माधौगढ़, रामपुरा और जालौन तहसीलों के प्रभारी पदाधिकारियों की घोषणा जल्द की जाएगी। इससे जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में साहित्यिक गतिविधियों को विस्तार देने और स्थानीय रचनाकारों को जोड़ने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

वाणी वंदना और नात-ए-पाक से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत शिरोमणि सोनी की वाणी वंदना से हुई। इसके बाद बुंदेलखंड में रफी के नाम से प्रसिद्ध मिर्जा साबिर बेग ने नात-ए-पाक प्रस्तुत की। आध्यात्मिक और साहित्यिक भावनाओं से ओतप्रोत प्रस्तुतियों के बाद काव्य गोष्ठी ने गति पकड़ी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता शायर असरार अहमद मुकर्री और हास्य कवि कृपाराम कृपालु ने की। मंच पर उपस्थित रचनाकारों ने अपनी-अपनी विधा में रचनाएं सुनाकर श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया। कहीं पारिवारिक रिश्तों की गहराई देखने को मिली, तो कहीं बुजुर्गों के सम्मान, सामाजिक बदलाव और मानवीय संवेदनाओं को शब्दों में पिरोया गया।

कविताओं में उभरे परिवार, रिश्ते और जीवन के अनुभव

काव्य गोष्ठी में राघवेंद्र कनकने ने प्रेम और पारिवारिक स्नेह पर केंद्रित अपनी रचना प्रस्तुत की। उनकी पंक्तियों में अपनों के प्रति समर्पण और पिता के प्रेम की भावना दिखाई दी। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को पारिवारिक रिश्तों के महत्व से जोड़ने का प्रयास किया।

इसके बाद शिखा गर्ग ने मां के दर्द और भावनात्मक संवेदनाओं को अपनी कविता के माध्यम से व्यक्त किया। उनकी रचना में मां के आंसुओं, उसकी पीड़ा और संतान के प्रति उसके निस्वार्थ स्नेह का मार्मिक चित्रण सामने आया। प्रस्तुति ने मातृत्व से जुड़ी भावनाओं को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया।

सिद्धार्थ त्रिपाठी ने अपनी रचना में विश्वास और रिश्तों के अनुभवों को प्रमुखता दी। उनकी कविता में उन लोगों के व्यवहार पर विचार दिखाई दिया, जिन पर व्यक्ति भरोसा करता है, लेकिन वही विश्वास कभी-कभी उसे कठिन परिस्थितियों में पहुंचा देता है। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को संबंधों की वास्तविकता पर सोचने का अवसर दिया।

दिव्यांशु दिव्य ने बदलते पारिवारिक मूल्यों और बुजुर्गों के प्रति जिम्मेदारी के विषय को उठाया। उनकी रचना में जीवनकाल में माता-पिता की देखभाल और उनके निधन के बाद किए जाने वाले धार्मिक कर्मों के बीच दिखाई देने वाले अंतर पर सवाल खड़ा किया गया। कविता का संदेश था कि बुजुर्गों का सम्मान केवल परंपराओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके जीवनकाल में भी उनकी आवश्यकताओं और भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।

बुजुर्गों के आशीर्वाद और पिता के संघर्ष को मिला स्वर

शिरोमणि सोनी ने अपनी रचना के जरिए बुजुर्गों के आशीर्वाद की महत्ता बताई। उनकी कविता में यह भाव उभरकर सामने आया कि घर के वरिष्ठ सदस्यों का स्नेह और आशीर्वाद परिवार को सुख, शांति और मजबूती प्रदान करता है। उनकी प्रस्तुति ने पारिवारिक संस्कारों और बड़ों के सम्मान का संदेश दिया।

हास्य कवि कृपाराम कृपालु ने अपनी रचना के माध्यम से पिता के संघर्ष और उनकी भावनाओं को सामने रखा। उनकी कविता में पिता द्वारा परिवार की परेशानियों को स्वयं तक सीमित रखने और बच्चों को कठिनाइयों से बचाने के प्रयास का उल्लेख था। रचना ने पिता के त्याग और उनके मौन संघर्ष को भावपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत किया।

वहीं शायर असरार अहमद मुकर्री ने हास्य और व्यंग्य से भरपूर अंदाज में अपनी रचना सुनाई। उनकी प्रस्तुति में पड़ोसी से विवाद और पुलिस थाने तक पहुंचने की स्थिति को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किया गया। उनकी शायरी ने गोष्ठी के वातावरण में हास्य का रंग भर दिया और श्रोताओं को मनोरंजन का अवसर मिला।

संचालन के दौरान कशफी ने भी सुनाया कलाम

कार्यक्रम का संचालन कर रहे जिला संयोजक शफीकुर्रहमान कशफी ने भी अपना कलाम प्रस्तुत किया। उनकी रचना में साहित्यिक परंपरा, रचनात्मक विरासत और पूर्ववर्ती शायरों के प्रभाव को स्वीकार करने का भाव दिखाई दिया। उन्होंने अपनी पंक्तियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि किसी रचनाकार की अभिव्यक्ति में उसकी व्यक्तिगत प्रतिभा के साथ-साथ साहित्यिक परंपराओं का योगदान भी महत्वपूर्ण होता है।

पूरी गोष्ठी के दौरान अलग-अलग विषयों पर प्रस्तुत रचनाओं ने कार्यक्रम को विविधता प्रदान की। प्रेम, मां की ममता, पिता के त्याग, बुजुर्गों के सम्मान और सामाजिक व्यवहार जैसे विषयों ने श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ा, जबकि हास्य और व्यंग्य ने आयोजन को सहज और जीवंत बनाए रखा।

साहित्य की लौ को निरंतर जलाए रखने का संकल्प

कार्यक्रम के समापन अवसर पर उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के जिलाध्यक्ष डॉ. अनुज भदौरिया ने संगठन के उद्देश्यों और भविष्य की कार्ययोजना पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि साहित्य सभा अपने मूल उद्देश्यों को पूरी मेहनत और प्रतिबद्धता के साथ पूरा करेगी। संगठन की योजनाओं को केवल घोषणा तक सीमित न रखते हुए उन्हें व्यवहार में उतारने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने साहित्यकारों और पदाधिकारियों से सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि सभी के सहयोग से जनपद में साहित्यिक गतिविधियों को मजबूत बनाया जाएगा और साहित्य की लौ को कभी मंद नहीं पड़ने दिया जाएगा। नई कार्यकारिणी के गठन को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।

कार्यक्रम के अंत में तांछल सर ने उपस्थित अतिथियों, पदाधिकारियों, कवियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया।

उत्तर प्रदेश साहित्य सभा की जालौन जिला इकाई के गठन और काव्य गोष्ठी के आयोजन से स्थानीय साहित्यिक गतिविधियों को नया आधार मिला। नई जिम्मेदारियों के साथ संगठन के सामने जिले के रचनाकारों को एक मंच पर लाने, काव्य गोष्ठियों को प्रोत्साहित करने और साहित्यिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी होगी। कार्यक्रम में व्यक्त विचारों से स्पष्ट हुआ कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को संवेदनशील बनाने, रिश्तों के महत्व को समझाने और सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा देने का सशक्त साधन भी है।